कवर स्टोरी

अनिश्चितता से निबटने की कवायद
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत के बजट का गणित गड़बड़ा जाता है लेकिन अगर कीमतों में मौजूदा सुधार जारी रहा तो भारत इस झटके को झेल सकने में सक्षम है

बीच भंवर में डगमग नय्या
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी विवाद ने न सिर्फ हमारे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक यूएई के साथ द्विपक्षीय व्यापार का सारा तारतम्य बिगाड़ दिया बल्कि पश्चिमी देशों को हमारे निर्यात पर भी बेहद बुरा असर डाला

खाड़ी में संग्राम बाजार में कोहराम
तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीति की लगातार अनिश्चित स्थिति और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से भारतीय शेयर बाजार औंधे मुंह गिरे

कराह उठे कारखाने
जंग की वजह से गैस की कमी, महंगी ढुलाई और अटके निर्यात से देश के सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्योगों पर भारी मार पड़ रही

भारत किस तरह चुका रहा है ईरान युद्ध की कीमत
ईरान युद्ध से पैदा हुए संकट से निबटने के लिए मोदी सरकार ने तत्परता के साथ फौरी प्रतिक्रिया वाले उपायों से आगे बढ़कर एक संगठित और व्यवस्थित संकट प्रबंधन की दिशा में पहल की है

बारूदी बुमरा
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन ने हाल में बुमराह को लेकर कहा: ''सनकी बंदा है.’’

दोहरा झटका
महंगे तेल-गैस आयात और खाड़ी देशों में रहकर काम कर रहे लाखों भारतीयों की तरफ से भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकती है.

पश्चिम एशिया में कोहराम
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज्राएल के युद्ध में पूरा पश्चिम एशिया फंसा तो कई बड़े सवाल उभरे, क्या इससे ईरान में सत्ता परिवर्तन होगा? यह युद्ध कितना लंबा चलेगा? और भारत को क्यों होना चाहिए फिक्रमंद?

निकोबार पर नया विवाद
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर 81,000 करोड़ रुपए की बंदरगाह और प्रतिरक्षा परियोजना को मंजूरी दी. पर्यावरणवादी मान रहे इसे वहां की अनूठी जैव-विविधता के विनाश का फरमान.

निजाम बदला फिक्र बरकरार
ढाका में सत्तानसीन हुई तारिक रहमान की नई सरकार के साथ भारत को आखिर किस तरह से आगे बढ़ना चाहिए.

सबका साथ सबसे व्यापार
कई तरह के नए समझौते संकेत हैं कि भारत बड़े देशों की व्यापारिक लीग में शामिल होने के लिए बड़ी लेकिन जोखिम भरी छलांग को तैयार है

लंबी रेस का पक्का फॉर्मूला
सुधार की महत्वाकांक्षा और राजकोषीय विकल्पों से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, नौकरियों और निवेशकों के विश्वास तक बोर्ड ऑफ इंडिया टुडे इकोनॉमिस्ट्स (बाइट) ने 1 फरवरी को पेश केंद्रीय बजट के वादों का व्यापक विश्लेषण किया है.

नारियल को प्रोत्साहन
नारियल और काजू जैसी नकदी फसलों पर नए सिरे से ध्यान देने से भारत की अनाज-केंद्रित खेती में बदलाव की उम्मीद.

कौशल विकास के कॉरिडोर
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास बनने वाले नए यूनिवर्सिटी टाउन का फोकस भविष्य की स्किल्स पर होने वाले ताजा रिसर्च पर होगा, पढ़ाई सीधे उद्योगों और खास तरह की नौकरी की जरूरतों से जोड़ी जाएगी.

तेज रफ्तार के अनेक उपाय
तेज रफ्तार रेल, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जलमार्गों के एकीकृत नेटवर्क से लागत घटेगी, आवाजाही सुधरेगी और क्षेत्रीय विकास को रफ्तार मिलेगी.

इन्फ्रास्ट्रक्चर का नया तोहफा
बजट में दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर विशेष जोर है, जोखिम गारंटी फंड और निवेश ट्रस्ट रियल स्टेट के लिए संभावनाओं के दरवाजे खोलने में मददगार होगा.

छोटे व्यापार का बढ़े आकार
बजट में इक्विटी, जल्द भुगतान और अनुपालन सुधारों के जरिए उम्मीद की गई कि एमएसएमई छोटे आकार के लेवल से आगे बढ़ेंगे

केमिस्ट्री सही करने का समय
केमिकल पार्क और कार्बन कैप्चर जैसे कदम उद्योग को एकीकृत और टिकाऊ बनाने के प्रयास तेजी से हो रहे हैं

ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले मैग्नेट
रेयर अर्थ चुंबक की आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत ऐसे महत्वपूर्ण औद्योगिक इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने और चीन पर निर्भरता घटाने के लिए समर्पित कॉरिडोर पर भरोसा कर रहा है.

चिप की ग्लोबल महत्वाकांक्षा
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का लक्ष्य भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत करना है.
