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जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस चुनाव आयोग पर हमला तेज कर रही है और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय पर BJP के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगा रही है, वहीं चुनाव आयोग के सूत्र एक जवाबी तर्क दे रहे हैं. उनका कहना है कि मतदाता सूची से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में नाम कटने के लिए सत्ताधारी पार्टी खुद जिम्मेदार है.
इस बचाव के केंद्र में एक तकनीकी श्रेणी है जो अब राजनीतिक रूप से विस्फोटक बन गई है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं को 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगतियों) के रूप में चिह्नित किया गया था. मतदाता सूची प्रबंधन में इस शब्द का अर्थ उन विसंगतियों से है जो डेटाबेस मिलान और फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान पकड़ी जाती हैं.































