Hindi News
अररिया के रानीगंज से अपने घुटनों का इलाज कराने भागलपुर आ रहे बुजुर्ग रमेश प्रसाद साह बरारी घाट पर नाव से तो किसी तरह उतर गए. मगर वे घाट की पथरीली जमीन पर चढ़ नहीं पाए. उन्हें नाविकों ने हाथ का सहारा देकर आगे बढ़ाया. पूछने पर वे कहने लगे, "दिक्कत ये नहीं है कि पुल टूट गया और नाव की सवारी करनी पड़ रही है… 2001 से पहले तक तो हमलोग नाव-जहाज से ही इधर आते रहे हैं. असल दिक्कत है कि व्यवस्था ठीक नहीं है. यहां प्लेटफार्म तो ठीक होना चाहिए था."
3-4 मई की दरम्यानी रात विक्रमशिला सेतु का एक स्लैब टूटकर गिर जाने के बाद से ही इस रूट पर महादेवपुर घाट से बरारी घाट के बीच 75 से अधिक नावें और एक खुला जहाज चलाया जा रहा है. इस रास्ते से 12 से 15 हजार लोग रोज गंगा नदी को पार कर रहे हैं. मगर इस हादसे के लगभग एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी सरकार यहां नौका परिचालन की बेहतर व्यवस्था नहीं कर पा रही है.




























