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अपडेटेड 13 अप्रैल 2026, 1:04 AM
Asha Bhosle’s wax figure, unveiled in 2017 at Madame Tussauds Delhi’s Bollywood section.
1957 में फिल्म ‘नया दौर’ ने आशा भोसले के करियर की दिशा बदल दी थी

सांगली के आकाश में जब 8 सितंबर 1933 का सूरज उगा होगा, तब किसे पता होगा कि मंगेशकर परिवार में जन्मी 'आशा' भारतीय संगीत की परिभाषा बन जाएगी. जन्म ऐसे घर में हुआ जहां संगीत पेशा नहीं, परिवेश था. सांस लेने और रियाज़ करने के बीच कोई स्पष्ट भेद नहीं. 

पंडित दीनानाथ मंगेशकर के घर में बच्चे बोलने से पहले सुर पहचानना सीखते थे. किंतु प्रतिभा की कहानियां अक्सर संघर्ष की राख से निकलती हैं. पिता के निधन ने बचपन की उंगली बहुत जल्दी छोड़ दी. घर पर आर्थिक संकट आया और वह उम्र जिसमें बच्चों को खेलना चाहिए, उनके हिस्से काम और जिम्मेदारियां आईं.

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