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अपडेटेड 21 मई 2026, 8:40 PM
Maoist Surrender in Jharkhand (Photo : Ramiz and Abhishek Karn)
माओवादी रहीं वंदना अपनी सात महीने की बच्ची के साथ सरेंडर के बाद (फोटो : रमीज/अभिषेक कर्ण)

मई की 21 तारीख झारखंड पुलिस के लिए मील का पत्थर कही जा सकती है. रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में सुबह आठ बजे से ही काफी हलचल थी. राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा सहित झारखंड पुलिस के सीनियर अधिकारी, सीआरपीएफ के अधिकारी और माओवाद प्रभावित कई जिलों के एसपी लगातार पहुंच रहे थे. इसी दौरान एक पुलिस बस भी पहुंची, जिसमें सरेंडर कर चुके 25 माओवादी सवार थे.

लेकिन एक दृश्य माओवाद सरेंडर के इतिहास में शायद हमेशा याद रखा जाएगा. हुआ यूं कि सरेंडर करने के लिए जब महिला माओवादी शांति उर्फ वंदना मंच पर पहुंची तो उनके हाथ में किसी हथियार की जगह सात महीने का बच्चा था. एक तरफ मां पुलिस अधिकारियों से गुलदस्ता ले रही थी तो दूसरी तरफ बच्चा आराम से मां के कंधे पर सो रहा था.

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