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आठवीं शताब्दी के संन्यासी, दार्शनिक और अद्वैत वेदांत के गुरू आदि शंकर के जयंती समारोह के लिए मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में 17 से 22 अप्रैल तक धार्मिक विद्वान, वैज्ञानिक, आध्यात्मिक गुरू और सांस्कृतिक विशेषज्ञ एकत्रित होंगे. उनकी जयंती हर साल वैशाख शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है.

आदि शंकर को अद्वैत या गैर-द्वैतवाद की अवधारणा का श्रेय दिया जाता है. यह अवधारणा बताती है कि आत्मन् (स्वयं की आत्मा) और ब्रह्म (परम वास्तविकता) एक ही हैं. आदि शंकर ने ही द्वारका, जोशीमठ, श्रृंगेरी और पुरी में प्रमुख मठों की स्थापना भी की थी.

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