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आभासी दुनिया में दिन-रात गोता लगाने वालों की तादाद दिनोदिन बढ़ती जा रही है, ये लोग सोशल मीडिया और चैट में घंटों डूबे रहते हैं. जानकारों के मुताबिक डिजिटल दीवानगी हद से ज्यादा बढ़कर दिमागी बीमारी बनी. हर पांच में से दो युवा अपने स्मार्टफोन के बगैर बेचैन होने लगते हैं तो 96 फीसदी हर सुबह उठते ही सबसे पहले सोशल मीडिया खंगालते हैं.

आजकल 22 वर्षीय अभिषेक टिंडर पर भिड़ा हुआ है. वह अपने मोबाइल पर जैसे ही यह डेटिंग ऐप खोलता है, उसके दिमाग में एंडोर्फिन रसायन का तेजी से संचार होने लगता है, ठीक वैसे ही जैसे कि सेक्स के दौरान, कसरत करते वक्त या फिर मादक दवाओं को लेने से होता है. उसकी उंगलियां काफी तेजी से मोबाइल पर घूम रही हैं और वह लगातार “दाईं ओर स्वाइप” करता जा रहा है.

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