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लखनऊ से करीब 70 किलोमीटर दूर, घाघरा के किनारे बसा बाराबंकी का किंतूर गांव इन दिनों अचानक सुर्खियों में है. वजह सिर्फ पश्चिम एशिया की सियासत नहीं, बल्कि वह ऐतिहासिक धागा है जो इस छोटे से गांव को तेहरान की सत्ता के केंद्र से जोड़ता रहा है.
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर जैसे ही इंटरनेट मीडिया के जरिये यहां पहुंची, गांव में गम का माहौल पसर गया. मस्जिदों में दुआएं हुईं, घरों में चर्चा छिड़ी और पुराने रिश्तों की याद ताजा हो गई.































