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सुबह की तेज धूप अभी पूरी तरह चढ़ी भी नहीं थी कि 21 अप्रैल को राजधानी लखनऊ की सड़कों पर नारों की गूंज फैलने लगी. सुबह नौ बजे 5 कालीदास मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास से निकलकर सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन की ओर बढ़ता महिलाओं का विशाल हुजूम सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश था. हाथों में तख्तियां, चेहरों पर आक्रोश और कदमों में तेज़ी- “बहन-बेटियों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारे हवा में तैर रहे थे.
इस भीड़ के बीच सबसे आगे चल रहे थे योगी आदित्यनाथ, जिनके साथ पूरा मंत्रिमंडल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदेश नेतृत्व कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा था. यह ‘जनाक्रोश महिला पदयात्रा’ थी. इसका आयोजन सत्ता पक्ष ने विपक्ष को घेरने के लिए किया था और इसकी वजह थी लोकसभा में विपक्ष के विरोध के चलते गिरने वाला 131वां संविधान संशोधन विधेयक जिसे सरकार महिला आरक्षण के लिए जरूरी बता रही थी.




























