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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर पिछले डेढ़ साल से चल रही सरकारी मुहिम आखिरकार राजनीतिक, प्रशासनिक और जनदबाव के आगे झुकती दिख रही है. योगी सरकार ने जिस योजना को बिजली सुधारों की बड़ी उपलब्धि और डिस्कॉम्स के घाटे को कम करने का सबसे असरदार हथियार बताया था, उसी पर अब उसे यू-टर्न लेना पड़ा है.
सरकार ने न सिर्फ सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को फिर से पोस्टपेड मोड में बदलने का फैसला किया है, बल्कि नए बिजली कनेक्शन भी अब केवल पोस्टपेड मीटर के जरिए देने की घोषणा कर दी है. यह फैसला सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि उस पूरी नीति पर सवाल खड़े करता है जिसके तहत राज्य में तेजी से प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए गए थे.




























