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गुजरात के भावनगर हवाई अड्डे का टर्मिनल ताजा-ताजा पेंट किया हुआ दिखता है. मगर अंदर की हवा में वही पुरानी गंध पसरी है. एक कोने में प्लास्टिक की कुर्सियां एक के ऊपर एक कतारों में लगी हैं. धूल से सने बैगेज स्कैनर में प्लग नहीं है और वह किसी अलग जमाने का कोई अवशेष जैसा लगता है. महीनों से यहां न तो कोई विमान उड़ा है और न ही उतरा है.
देश के 93 हवाई अड्डों में से कई की तकरीबन ऐसी ही कहानी है. इनमें हेलिपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम भी शामिल हैं. ये सब उस उड़ान यानी 'उड़े देश का आम नागरिक’ योजना का हिस्सा हैं जिसे मोदी सरकार ने 2016 में आम नागरिकों के लिए हवाई सफर को सुलभ बनाने के इरादे से शुरू किया था. इस योजना के तहत सस्ते हवाई मार्गों के जरिए छोटे शहरों को जोड़ने का इरादा जताया गया था.
































