
पूर्वांचल के विश्वविद्यालयों में जब छात्र चुनाव आते हैं तो नए-नए नारे भी लहराए जाते हैं. ऐसा ही एक सदाबहार नारा है ‘भईया में भईया ***** भईया’. ख़ाली जगह में रिंकू, कमलेश, मदन, चमन, पिंटू...जैसा कोई भी नाम भर लीजिए. बस ऐसे ही पुरस्कारों की दुनिया में, और ख़ासकर सिनेमा से जुड़े पुरस्कारों की दुनिया में भी नारा ये फिट बैठता है कि ‘अवॉर्ड में अवॉर्ड ऑस्कर अवॉर्ड’. ऑस्कर की महिमा इसी बात से तय कीजिए कि कोई भी क्षेत्र अपने सबसे बड़े पुरस्कार को उस क्षेत्र का ऑस्कर बतलाता है. जैसे थिएटर का ऑस्कर, लिटरेचर का ऑस्कर, आईटी का ऑस्कर...इत्यादि.
हालांकि, सिनेमा की दुनिया में पुरस्कारों की कमी नहीं है. कान्स फिल्म फेस्टिवल है, गोल्डन ग्लोब है, बाफ्टा है और अलग-अलग देशों के अपने राष्ट्रीय पुरस्कार भी हैं. लेकिन अगर कोई एक सम्मान ऐसा है जो किसी फिल्म की किस्मत सचमुच बदल सकता है तो बिना किसी दो राय वह है- ऑस्कर. हर साल जब Academy of Motion Picture Arts and Sciences की ओर से दिए जाने वाले ये पुरस्कार घोषित होते हैं तो दुनिया भर की फिल्म इंडस्ट्री की नजरें उसी मंच पर टिक जाती हैं. वजह सिर्फ प्रतिष्ठा नहीं है. असली कारण है वह आर्थिक असर जो इस एक ट्रॉफी के बाद दिखाई देता है.
फिल्म कारोबार से जुड़े विशेषज्ञ इसे “ऑस्कर बम्प” कहते हैं. यानी ऑस्कर जीतने या नामांकन के बाद फिल्म की कमाई, उसकी लोकप्रियता और मार्केट वैल्यू में अचानक उछाल आ जाना. कई बार ये उछाल इतना बड़ा होता है कि एक मामूली बजट की फिल्म भी देखते-देखते अरबों रुपये के कारोबार में बदल जाती है.
बॉक्स ऑफिस से बाजार तक ऑस्कर का असर
फिल्म उद्योग में अक्सर कहा जाता है कि ऑस्कर जीतने से पहले और बाद की स्थिति बिल्कुल अलग होती है. अगर कोई फिल्म ऑस्कर जीत जाती है या महत्वपूर्ण श्रेणियों में नॉमिनेट हो जाती है, तो उसकी टिकट बिक्री तुरंत बढ़ जाती है. कई देशों में उसे दोबारा रिलीज किया जाता है. नए दर्शक फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों तक पहुंचते हैं और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी उसे अपने प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए बड़ी रकम देने की पेशकश करते हैं.
दक्षिण कोरिया की फिल्म Parasite (पैरासाइट) इसका सबसे चर्चित उदाहरण है. निर्देशक Bong Joon-ho (बोंग जोन हो) की इस फिल्म ने 2020 में इतिहास रचते हुए बेस्ट पिक्चर का ऑस्कर जीता. यह पहली गैर-अंग्रेजी भाषा की फिल्म थी जिसने यह पुरस्कार हासिल किया.

फिल्म का बजट लगभग 1.1 करोड़ डॉलर था. ऑस्कर से पहले इसकी वैश्विक कमाई लगभग 13 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुकी थी. लेकिन अवॉर्ड मिलने के बाद फिल्म को दुनिया के कई देशों में दोबारा रिलीज किया गया. इसके बाद इसकी कमाई बढ़कर 26 करोड़ डॉलर से अधिक हो गई. यानी एक अवॉर्ड ने फिल्म की कमाई लगभग दोगुनी कर दी. इतना ही नहीं, इसके बाद कोरियन सिनेमा और कोरियन कंटेंट की लोकप्रियता भी पूरी दुनिया में अचानक बढ़ गई. इस जीत ने कोरियन फिल्म उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई.
छोटे बजट की फिल्मों के लिए सबसे बड़ा मंच
ऑस्कर का सबसे बड़ा आर्थिक असर अक्सर उन फिल्मों पर होता है जो छोटे बजट की होती हैं. 2008 में आई फिल्म Slumdog Millionaire (स्लमडॉग मिलेनियर) इसका शानदार उदाहरण है. निर्देशक डैनी बॉयल की इस फिल्म का बजट करीबन 1.5 करोड़ डॉलर था. लेकिन जब इस फिल्म ने ऑस्कर में 8 पुरस्कार जीते तो इसकी लोकप्रियता पूरी दुनिया में फैली. इसके बाद इस फिल्म की टोटल वर्ल्डवाइड कमाई हो गई करीबन 38 करोड़ डॉलर. इसी फिल्म के जरिए भारतीय संगीतकार ए. आर रहमान, गीतकार गुलज़ार और साउंड डिजाइनर रसूल पकुट्टी को भी ऑस्कर मिला था.

इसी तरह फिल्म The King’s Speech ( द किंग्स स्पीच) का मामला ले लीजिए. लगभग 1.5 करोड़ डॉलर के बजट में बनी इस फिल्म ने चार ऑस्कर जीते और दुनिया भर में करीब 43 करोड़ डॉलर से ज्यादा की कमाई की. ये नाम और आंकड़े ये बताने के लिए काफ़ी हैं कि ज्यादातर बार एक ऑस्कर किसी छोटे बजट की फिल्म को ग्लोबल सक्सेस में बदल देता है.

कलाकारों के करियर पर भी जबरदस्त असर
ऑस्कर जीतने का असर सिर्फ फिल्मों की कमाई तक ही नहीं रहता. ये कलाकारों के करियर की दिशा भी बदल देता है. जब अभिनेता Matthew McConaughey (मैथ्यू मैकॉनहे) ने फिल्म Dallas Buyers Club (डलास बायर्स क्लब) के लिए बेस्ट एक्टर का ऑस्कर जीता तो उसके बाद उन्हें बड़े बजट की फिल्मों में लगातार काम मिलने लगा. इसी तरह अभिनेत्री Brie Larson (ब्री लार्सन) ने फिल्म Room (रूम) के लिए ऑस्कर जीतने के बाद Captain Marvel (कैप्टन मार्वेल) जैसी बड़े बजट की फिल्मों में काम किया.
सिनेमा इंडस्ट्री में यह आम धारणा है कि ऑस्कर जीतने के बाद किसी एक्टर या डायरेक्टर की फीस तीन से पांच गुना तक बढ़ जाती है.

डिजिटल दौर में ऑस्कर का नया अर्थ
पिछले एक दशक में स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के उभार ने ऑस्कर की आर्थिक अहमियत को और बढ़ा दिया है. आज अगर किसी फिल्म को ऑस्कर मिलता है तो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म उसे अपने प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए भारी रकम देने को तैयार हो जाते हैं. क्योंकि ऑस्कर जीतने वाली फिल्में दर्शकों के लिए तुरंत ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बन जाती हैं. इसी वजह से पिछले कुछ वर्षों में Netflix, Amazon Studios और Apple Studios जैसी कंपनियों ने ऑस्कर की दौड़ में शामिल फिल्मों पर भारी निवेश करना शुरू कर दिया है.
2022 में फिल्म CODA (कोडा) ने बेस्ट पिक्चर का ऑस्कर जीता. यह Apple TV+ प्लेटफॉर्म की पहली फिल्म थी जिसने यह पुरस्कार हासिल किया. यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि इससे साफ हो गया कि अब ऑस्कर की दौड़ सिर्फ ट्रेडिशनल हॉलीवुड स्टूडियो तक बंधी नहीं रही.

ऑस्कर की दौड़ भी करोड़ों की!
यह भी एक दिलचस्प बात है कि ऑस्कर जीतने के लिए खुद भी भारी खर्च करना पड़ता है. हॉलीवुड में इसे “ऑस्कर कैंपेन” कहा जाता है. फिल्म स्टूडियो अकादमी के सदस्यों के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करते हैं. इसके साथ ही बड़े मीडिया विज्ञापन दिए जाते हैं और प्रचार अभियान चलाए जाते हैं. दुनिया भर की सिनेमा रिपोर्ट्स में समय-समय पर दिए जाने वाले आंकड़े बताते हैं कि एक बड़ी फिल्म का ऑस्कर कैंपेन एक से दो करोड़ डॉलर तक का हो सकता है. यानी एक बड़े बजट की भारतीय फिल्म समझ लीजिए. लगभग 90 से 180 करोड़ रुपये. लेकिन अगर फिल्म ऑस्कर जीत जाए तो यह खर्च कई गुना होकर वापस आ सकता है.
भारत के लिए ऑस्कर का मतलब
2023 में फिल्म RRR (आरआरआर) के गाने ‘नाटू नाटू’ को बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग का ऑस्कर मिला. निर्देशक राजामौली की इस फिल्म ने दुनिया भर में लगभग 16 करोड़ डॉलर से अधिक की कमाई की. ऑस्कर मिलने के बाद इस गाने और फिल्म की लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ गई.
आज ऑस्कर सिर्फ एक पुरस्कार नहीं है. यह ग्लोबल फिल्म इंडस्ट्री का सबसे ताकतवर और सबसे बड़ा आर्थिक इंजन भी बन चुका है. एक सुनहरी ट्रॉफी के बाद वह फिल्म जो पहले सीमित दर्शकों तक थी अचानक पूरी दुनिया के सिनेमाघरों और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने लगती है.
इस बार किन फिल्मों ने मारी बाज़ी
98वें अकादमी पुरस्कार समारोह में आखिरकार ऑस्कर 2026 के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है. फिल्म 'सिनर्स' में अपने शानदार अभिनय के लिए माइकल बी. जॉर्डन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला, जिन्होंने लियोनार्डो डिकैप्रियो और टिमोथी चालमेट जैसे मजबूत दावेदारों को पीछे छोड़ दिया. सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार 'वन बैटल आफ्टर अनदर' को मिला है. जेसी बकले को फिल्म 'हैमनेट' में अपनी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला.

