देश में पत्थरों पर कारीगरी का सबसे बड़ा मेला, देखिए जयपुर के 'इंडिया स्टोन मार्ट' की तस्वीरें

जयपुर में पत्थरों का अनोखा उत्सव सजा है, जिसका नाम इंडिया स्टोन मार्ट है. राजधानी के सीतापुरा इलाके में करीब 24 हजार 741 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला यह मेला संगमरमर, ग्रेनाइट और सैंडस्टोन की जीवंत दुनिया बन गया है.

यहां हर पत्थर अपनी अलग कहानी सुना रहा है. इस आयोजन को वैश्विक पहचान देने के लिए पहली बार 26 भाषाओं में विशेष वेबसाइट तैयार की गई है, ताकि दुनिया के कोने–कोने तक राजस्थान के पत्थरों की गूंज पहुंच सके.

टर्की, ईरान और इटली जैसे देशों के लिए अलग–अलग पवेलियन बनाए गए हैं, जो इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग दे रहे हैं. इस बार स्टोन मार्ट केवल व्यापारिक मंच नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम भी बन गया है.

बीएपीएस स्वामीनारायण संस्थान की ओर से लगाए गए विशेष पवेलियन में दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण मंदिर की भव्य तस्वीर स्वागत करती है, तो भीतर अमेरिका, अबु धाबी और इंग्लैंड स्थित मंदिरों की आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं और दर्शकों को अभिभूत कर रही हैं.

मेले की खासियत ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ थीम है, जिसके तहत राजस्थान के हर जिले के विशिष्ट पत्थरों और स्थानीय कारीगरी को प्रदर्शित किया गया है. यहां मार्बल, ग्रेनाइट, सैंडस्टोन, क्वार्ट्ज, कोटा स्टोन और लाइमस्टोन सहित 50 हजार से अधिक किस्मों की चमक–दमक देखने को मिल रही है. कारीगरों की बारीक नक्काशी और आधुनिक तकनीक का मेल इस आयोजन को और खास बना रहा है.

व्यापारिक दृष्टि से भी यह आयोजन नए कीर्तिमान गढ़ने की ओर बढ़ रहा है. इस वर्ष स्टोन मार्ट के दौरान लगभग 5 हजार करोड़ रुपये के व्यापारिक प्रस्ताव मिलने का अनुमान है. पिछले साल 2025 में यह आंकड़ा 3500 करोड़ रुपये रहा था, जबकि 2024 में 2981 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया था. साफ है कि इंडिया स्टोन मार्ट न केवल राजस्थान की पत्थर इंडस्ट्री को नई उड़ान दे रहा है, बल्कि वैश्विक बाजार में उसकी मजबूत पहचान भी बना रहा है.
