नेशनल

भारत में शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री की एक नई शुरुआत ने जगाई बड़ी उम्मीदें
विदेशी कंपनियां भारत में आधुनिक टग जहाज बनवा रही हैं. ऐसे ऑर्डर से देश के शिपयार्ड को नई तकनीक और विदेशी बाजार से जुड़ने का मौका मिल रहा है

छात्रों के लिए PG और हॉस्टल सुरक्षित कैसे बनें?
हर साल लाखों छात्र पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों का रुख करते हैं, लेकिन कैंपस के बाहर PG और हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी और निगरानी का साफ सिस्टम नहीं है

दिल्ली के 9/11 की कहानी : कैसे शहर बढ़ता गया और गांव बनते गए इतिहास
11 सितंबर 1803 की जंग से शुरू हुआ दिल्ली के बदलने का सिलसिला आगे चलकर जमीन के सर्वेक्षण, अधिग्रहण और तेज शहरीकरण तक पहुंचा. इस सफर में शहर बढ़ता गया और उसके गांव इतिहास का हिस्सा बनते गए

AI से लौटा 1980 का दौर, फिर फर्जी तस्वीरों ने छेड़ी सियासी जंग
AI से रेट्रो तस्वीरें बनाना अब सिर्फ पुरानी यादों को तस्वीरों में उतारने तक सीमित नहीं रह गया है. इसका इस्तेमाल राजनीति में भी होने लगा है जहां फर्जी तस्वीरों के जरिए लोगों को गुमराह करने और महिलाओं की गलत छवि पेश करने का खतरा बढ़ रहा

1,300 सिम कार्ड, दो राज्य, एक गिरफ्तारी : साइबर फ्रॉड की CBI जांच ने चौंकाया
CBI ने बिहार और ओडिशा में कार्रवाई के दौरान 1,300 से ज्यादा सिम कार्ड और सिम बॉक्स बरामद किए हैं. जांच में इन सिम कार्ड के साइबर फ्रॉड के कई मामलों से जुड़े होने की बात सामने आई है

कच्चे तेल की बढ़ी कीमत से बजी भारत के लिए खतरे की घंटी
अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ज्यादा रहती हैं तो भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ सकता है और महंगाई भी बढ़ सकती है. तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार को उन्हें आर्थिक मदद भी देनी पड़ सकती है

मातृत्व का पूरा बाजारी तामझाम
गर्भावस्था अब पहले से कहीं ज्यादा संस्थागत और निगरानी व्यवस्था में. गैरजरूरी ढंग से सीजेरियन की सलाह और मनमाने टेस्ट करवाए जा रहे. इसमें अस्पताल के संसाधन खप रहे. संपन्न और बेचैन-बेताब तबका लग्जरी मैटरनिटी सेवाओं पर खुलकर खर्च कर रहा

आकार लेती अमरावती
बढ़ती लागत, निर्माण संबंधी चुनौतियों और जगन मोहन रेड्डी के विरोध के बीच चंद्रबाबू नायडू के सपनों की राजधानी बसाने की 2028 की समयसीमा तेजी से आ रही करीब

भारत का नया टैंक संहारक
एफजीएम-148 जैवलिन ऐंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल अमेरिका में बनी तीसरी पीढ़ी की एटीजीएम प्रणाली है

त्योहार में चीनी कड़वी
त्योहारों के चलते चीनी की चढ़ती कीमतों को देखते हुए भारत सरकार एक दशक में पहली बार चीनी आयात कर रही. इस बीच बफर स्टॉक, एथेनॉल के वास्ते इस्तेमाल और संभावित जमाखोरी पर उठने लगे सवाल

अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ ने अनुमानों को पीछे छोड़ा. भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद उसने आश्चर्यजनक रूप से दिखाई आंतरिक दृढ़ता लेकिन कुछ विशेषज्ञों ने उठाए आंकड़ों पर सवाल

मुलाकातें हों लेकिन...
सीमा विवाद का सही समाधान निकाले बिना ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी और शी की संभावित मुलाकात 2020 में लगे झटकों की भरपाई नहीं कर सकती

प्रधान संपादक की कलम से
महज सावधानी ही त्रासदियों को रोक सकती है. पहली जरूरत नेपाल, भूटान और चीन के साथ वास्तविक समय में आंकड़े साझा करने और संयुक्त नियम बनाने की है. प्रकृति सीमा पर नहीं रुकती, इसलिए हमारी निगरानी व्यवस्था भी वहां नहीं रुक सकती

फूड वॉर्निंग लेबल पर सुप्रीम कोर्ट के 13 सवाल, FSSAI को 10 दिन का वक्त
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से पूछा कि पैकेज्ड फूड में ज्यादा चीनी, नमक और फैट होने पर चेतावनी लेबल को लेकर क्या व्यवस्था होनी चाहिए

रील से रैंप तक जेन ज़ी को साधने की BJP की नई रणनीति कितनी कारगर?
कॉन्सर्ट वाला मंच, बुकमायशो रजिस्ट्रेशन और 'धुरंधर' वाला अंदाज अपनाने के बाद भी BJP शायद यह सोच रही होगी कि क्या युवाओं तक पहुंचने की उसकी कोशिश जंतर-मंतर पर पैदा हुई दूरी को कम कर पा रही है

किन नियमों में बदलाव अब भारत को बना सकता है बड़ा डिफेंस एक्सपोर्टर?
भारत ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) की व्यवस्था को आसान बनाकर डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के लिए निर्यात की राह आसान कर दी है

जेन ज़ी को गुस्सैल पीढ़ी कहना कितना सही?
करियर की अनिश्चितता, बढ़ती महंगाई और सूचनाओं की बाढ़ के बीच बड़ी हो रही Gen Z को सिर्फ गुस्सैल पीढ़ी कहना उसकी बेचैनी और बदलाव की चाह को नजरअंदाज करना है

चेतावनी के संकेत
एनडीए के पास बेहद स्पष्ट बहुमत और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता बरकरार, मगर बेरोजगारी, महंगाई और जेन ज़ी असंतोष से भाजपा मुसीबत में

युवाओं का आक्रोश और बेचैनी
देश का मिज़ाज सर्वे बताता है कि युवा अपने भविष्य को लेकर बेहद बेचैन हैं. उन्हें डर है कि कहीं वे पीछे न छूट जाएं. साथ ही, उन्हें लगता है कि सरकार उनके लिए ज्यादा कुछ नहीं कर रही. नीति निर्माताओं के लिए बेहतर यही होगा कि युवाओं की चिंताओं पर गहराई से ध्यान दें

घट रहा भरोसा
सत्ता के इस्तेमाल और संस्थाओं के कामकाज को लेकर भारतीयों के मन में संदेह बढ़ रहा है, मगर इसका मतलब यह नहीं कि वे मोदी सरकार के व्यापक राजनैतिक एजेंडे के खिलाफ हो गए हैं
