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ढुलाई का खर्चा कैसे होगा कम; नितिन गडकरी ने बताया प्लान

इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बताया कि उनका मंत्रालय ढुलाई की लागत घटाने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है

नितिन गडकरी (फाइल फोटो)
नितिन गडकरी (फाइल फोटो)
अपडेटेड 27 फ़रवरी , 2026

25 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव में शिरकत करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में उन्होंने देश के रोड इंफ्रा, ग्रीन फ्यूल और नेशनल हाईवे के विस्तार पर खुलकर अपनी बात रखी.

'नेशनल कनेक्टिविटी: मेकिंग भारतमाला 3.0 ए रियलिटी (National connectivity: Making Bharatmala 3.0 a reality )' विषय पर गडकरी ने कहा कि किसी देश के आर्थिक विकास में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद अहम भूमिका निभाता है. इसे अब इसे पर्यावरण के अनुकूल और बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए.

गडकरी के भाषण का बड़ा हिस्सा लॉजिस्टिक्स लागत (ढुलाई और परिवहन की कुल खर्च) पर केंद्रित था, जिसे उन्होंने भारत की निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि पहले भारत में लॉजिस्टिक्स लागत 14-16 फीसद के बीच थी, जबकि चीन में यह सिर्फ 8 फीसद है. जबकि यूरोप-अमेरिका में इसपर खर्च 12 फीसद के आसपास है. उन्होंने कहा, “मंत्री के तौर पर मेरा लक्ष्य है कि लॉजिस्टिक्स लागत को सिंगल डिजिट यानी 9 फीसद या उससे कम तक लाया जाए.”

उन्होंने IIM बैंगलोर और कानपुर व चेन्नई IIT के रिसर्च का हवाला देते हुए दावा किया कि सड़कों की गुणवत्ता में सुधार से लॉजिस्टिक्स लागत लगभग 10 फीसद तक कम हो गई है. उनका मुख्य संदेश यह था कि हाईवे का विस्तार सिर्फ कनेक्टिविटी के लिए नहीं है, बल्कि सभी क्षेत्रों में इनपुट लागत (कच्चे माल आदि की लागत) को कम करने के लिए भी है.

गडकरी ने सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल की ओर बढ़ावा देने से जोड़ा. मुंबई-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी बदलाव की हिस्सा है, जिसमें बेहतर सड़कें और साफ ऊर्जा दोनों शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ अच्छी सड़कें ही नहीं बना रही, बल्कि अल्टरनेटिव फ्यूल और बायोफ्यूल पर भी काम कर रही है. उन्होंने दावा किया कि नई तकनीकों से ईंधन की लागत बहुत तेजी से कम हो सकती है.

उन्होंने कहा, "हम हाइड्रोजन पर एक पायलट प्रोजेक्ट चला रहे हैं. हमने 10 राष्ट्रीय राजमार्गों को चुना है. इसमें Reliance, Tata, Ashok Leyland, Volvo, HPCL और IPCL जैसी कंपनियां स्टेकहोल्डर हैं. इन राजमार्गों के लिए हमने पहले ही हाइड्रोजन ट्रकों और बसों के पायलट प्रोजेक्ट के लिए 600 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं. हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है. मेरा सपना है कि हाइड्रोजन की कीमत को 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक ला दूं.”

हालांकि, अपनी बात रखते हुए गडकरी ने हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट और हाइड्रोजन भरने वाली स्टेशन्स की भारी कमी को लेकर चिंता जाहिर की. साथ ही गडकरी ने सड़क निर्माण में नगर निगम के कचरे के इस्तेमाल का उदाहरण भी दिया. उन्होंने बताया कि अब तक 80 लाख टन कचरा सड़कों में इस्तेमाल हो चुका है. इसके कारण दिल्ली के पास गाजीपुर लैंडफिल की ऊंचाई 7 मीटर कम हो गई है. उन्होंने कहा, “अब विचार यह है कि नगर कचरे को अलग-अलग करें- जैसे कांच, धातु, प्लास्टिक  और जैविक कचरा. ताकि इन अलग-अलग कचरों का इस्तेमाल अलग-अलग वजहों से किया जाना संभव हो."

गडकरी ने टोल सुधारों पर कहा कि दिसंबर तक टोल प्लाजा पूरी तरह बैरियर-फ्री (बिना रोक-टोक) हो जाएंगे. गाड़ियां 80 किमी/घंटा की रफ्तार से बिना रुके गुजर सकेंगी. उन्होंने बताया कि ₹3,000 वाला वार्षिक पास अब 200 टोल एंट्री तक बिना अतिरिक्त पैसे के इस्तेमाल किया जा सकता है, जो एक सबके लिए फायदेमंद व्यवस्था है.

अप्रैल से टोल पर कैश लेनदेन पूरी तरह बंद हो जाएगा. पेमेंट सिर्फ FASTag, UPI, Visa या Mastercard से ही होगा. मतलब साफ है कि अब टोल पर लाइन में नहीं लगना पड़ेगा, गाड़ी रुकनी नहीं पड़ेगी और कैश बिल्कुल नहीं चलेगा. सड़क किनारे की सुविधाओं पर असंतोष जताते हुए गडकरी जी ने कहा कि टॉयलेट और अन्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए.

उन्होंने पुरानी नौकरशाही सोच की आलोचना की, जो इन सुविधाओं को मुख्य रूप से राजस्व कमाने का स्रोत मानती थी. उन्होंने कहा, “अब हम इनसे पैसा कमाना नहीं चाहते.”पहले टॉयलेट आदि से पैसे वसूलने पर जोर था, लेकिन अब फोकस सिर्फ साफ-सफाई और सुविधा पर है. पहाड़ी इलाकों की नाजुक सड़कों जैसे उत्तराखंड में, खासकर चार धाम कॉरिडोर पर, गडकरी जी ने बताया कि 350 लैंडस्लाइड-प्रोन स्पॉट (भूस्खलन वाले खतरे वाले स्थान) पहचाने गए हैं.

उन्होंने कहा कि मंत्रालय स्विट्जरलैंड की एक कंपनी के साथ काम कर रहा है, जिसका इलाका हिमालय जैसा ही है. सैटेलाइट-बेस्ड टेक्नोलॉजी से अब संभव लैंडस्लाइड को 15 दिन पहले ही अनुमान लगाया जा सकेगा, ताकि पहले से रोकथाम की जा सके. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह असर आने वाले मानसून में दिखेगा या नहीं, इस पर वे पूरी तरह आश्वस्त होकर कुछ नहीं कह सकते हैं.

गडकरी ने खुद को “बहुत ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल और सभी प्रकार के हरित ईंधन तथा हरित ऊर्जा का समर्थक” बताया. उन्होंने कहा कि हाईवे के किनारे 4.8 करोड़ पेड़ लगाए गए हैं और 88 लाख से ज्यादा पेड़ों का ट्रांसप्लांट किया गया है. उन्होंने कहा, “मेरा हर बार विचार यही रहता है कि हम पर्यावरण और पारिस्थितिकी की कैसे रक्षा करें. साथ ही विकास को कैसे तेज करेंगे और ज्यादा रोजगार कैसे पैदा करें."

गडकरी ने माना कि सड़कें और हाईवे हवा में प्रदूषण में लगभग 40 फीसद योगदान देते हैं. गडकरी ने कहा, “हम दिल्ली में प्रदूषण कम करने पर गंभीरता से सोच रहे हैं. हम इस पर काम कर रहे हैं, और मुझे विश्वास है कि कुछ समय में हम इसे कम कर देंगे.”

सड़क सुरक्षा पर अपनी टिप्पणियों में गडकरी ने इसे अपने मंत्रालय के लिए एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा, “हर साल हमें 5 लाख दुर्घटनाएं होती हैं और 1.80 लाख मौतें, जिनमें से 30,000 मौतें इसलिए होती हैं क्योंकि लोग हेलमेट नहीं पहनते, करीब 20,000 मौतें इसलिए क्योंकि ड्राइविंग के दौरान फोन पर बात करते हैं, और 30,000 मौतें इसलिए क्योंकि लोग सीट बेल्ट नहीं लगाते. सड़क इंजीनियरिंग भी एक समस्या है."  

गडकरी की इन टिप्पणियों से उनकी दोहरी रणनीति झलकती है- एक तरफ हाईवे निर्माण को तेज करना और लॉजिस्टिक्स लागत कम करना, दूसरी तरफ परिवहन को अल्टरनेटिव ईंधनों की ओर ले जाना

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