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भारत में 'एक देश-एक चुनाव' पर 81% लोग सहमत! लेकिन दुनिया में कहां-कहां है ऐसी व्यवस्था?

राष्ट्रीय और प्रांतीय या स्थानीय निकाय के एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था अभी दुनिया के सिर्फ तीन देशों में हैं

भारत में एक देश-एक चुनाव पर 81% लोग सहमत
भारत में एक देश-एक चुनाव पर 81% लोग सहमत
अपडेटेड 23 जनवरी , 2024

भारत तेजी से 'एक देश-एक चुनाव' की तरफ बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी समिति ने इस मुद्दे पर जनता से सुझाव मांगे थे. करीब 21,000 लोगों ने इसपर राय दी, जिसमें से 81 फीसदी लोगों की राय 'एक देश एक-चुनाव' के पक्ष में है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि किन देशों राष्ट्रीय और प्रांतीय या स्थानीय निकाय के एक साथ चुनाव होते हैं. अगर ये व्यवस्था लागू हो जाती है, तो भारत ऐसा करने वाला केवल चौथा देश होगा. यह व्यवस्था अभी तक सिर्फ स्वीडन, बेल्जियम और दक्षिण अफ्रीका में है.

स्वीडन में हर चार साल में आम चुनाव (रिक्सडैग चुनाव) के साथ-साथ नगरपालिका के लिए चुनाव कराए जाते हैं और आमतौर पर ये सितंबर में ही होते हैं. लोग इसमें तीन तरह के चुनावों के लिए वोट डालते हैं. राष्ट्रीय चुनाव यानी रिक्सडैग में लोग राष्ट्रीय मुद्दों को ध्यान में रखकर, नगर पालिका चुनावों में स्थानीय मुद्दों के आधार पर और यूरोपीय संसद के चुनाव में पूरे यूरोप को प्रभावित करने वाले कारकों को देखकर लोग वोट करते हैं. खास बात ये है कि सभी चुनाव एक ही दिन करा लिए जाते हैं. 

स्वीडन में आनुपातिक चुनाव प्रणाली है. इसका मतलब ये है कि राजनीतिक दलों को उनके वोट शेयर के आधार पर निर्वाचित विधानसभा या संसद में सीटें दी जाती हैं. जिसका जितना ज्यादा वोट शेयर, उसकी उतनी ज्यादा सीटें. हालांकि रिक्सडैग में 5% से कम वोट हासिल करने वाली पार्टियों को सीटें नहीं दी जातीं. बेल्जियम में भी हर 5 साल पर यूरोपियन यूनियन के चुनावों के साथ ही संघीय और क्षेत्रीय चुनाव भी कराए जाते हैं. 

क्षेत्र के लिहाज से बेल्जियम, और स्वीडन छोटे देश हैं और वहां एक साथ चुनाव कराना कोई बड़ी चुनौती नहीं है. लेकिन दक्षिण अफ्रीका को बेहतर उदाहरण माना जा सकता है. दक्षिण अफ्रीका में नौ प्रांत हैं. वहां हर पांच साल में प्रांतीय और राष्ट्रीय चुनाव एक साथ होते हैं. मतदाताओं को राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानमंडलों में वोट करने के लिए अलग-अलग मतदान पत्र दिए जाते हैं. दक्षिण अफ्रीका की चुनाव प्रणाली संसद और प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए आनुपातिक प्रतिनिधि के सिस्टम पर काम करती है. साउथ अफ्रीका की संसद में 400 सांसद हैं, लेकिन सभी 9 प्रांतीय विधानसभाओं की सीटों की संख्या जनसंख्या के आधार पर अलग-अलग है. प्रांतों में सीटों की संख्या 30 से लेकर 90 तक हैं.

भारत में भी अब एक देश-एक चुनाव पर चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, भारत में लोकतंत्रीय व्यवस्था की शुरुआत ही केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ कराने से हुई थी. 1951-52 में पहले चुनाव लोकसभा और राज्यों की विधानसभा दोनों के लिए कराए गए थे. अगले तीन बार यानी 1957, 1962 और 1967 में भी चुनाव ऐसे ही कराए गए.

लेकिन फिर 1968-69 में कई विधानसभाओं के भंग होने के साथ ये परंपरा टूट गई. 1970 में लोकसभा भी कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग हो गई थी. इसके बाद कभी दोबारा राज्यों और केंद्र के चुनाव एक साथ कराने की कोशिश नहीं की गई.

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