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विशेेषांकः सच्ची संपदा है जहां 

केरल ने प्रसन्नता के सभी मानकों पर ऊंचे अंक हासिल किए हैं, जबकि गोवा सरकार ने ईंधन और पानी की लागत घटाकर वहां के लोगों की प्रसन्नता पक्की करने का प्रयास किया है.

मौज की सवारी गोवा की सड़कों पर कार्निवाल परेड का एक दृश्य
मौज की सवारी गोवा की सड़कों पर कार्निवाल परेड का एक दृश्य
अपडेटेड 13 दिसंबर , 2021

बड़ा राज्य: केरल; छोटा राज्य: गोवा

इंडिया टुडे के राज्यों की दशा-दिशा सर्वेक्षण की नई श्रेणी प्रसन्नता सूचकांक में केरल शीर्ष पर रहा है. यह दक्षिणी राज्य 1,000 में से 756.5 अंक लेकर देश का सबसे प्रसन्न राज्य बना. इसके बाद गुजरात और तमिलनाडु हैं. केरल ने सभी मानकों-स्वच्छता (90/100), शिक्षा (108/120), स्वास्थ्य (140/150), पर्यावरण (80/80), सुशासन (50/75), ढांचागत विकास (86.7/100) और कानून-व्यवस्था (70.8/125) में ऊंचे अंक हासिल किए.

केरल के 2020-21 के बजट के हिसाब से 2020-21 में इसकी अर्थव्यवस्था 8.78 लाख करोड़ रुपए के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के साथ देश में नौवीं सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्था थी. प्रति व्यक्ति आय के मामले में यह छठें स्थान पर है (2021-22 में 205,484 रु.).

हालांकि, 2014 से मनीऑर्डर अर्थव्यवस्था मॉडल पर फल-फूल रहा यह राज्य फिलहाल कोविड-19 महामारी और निताकत (सऊदी अरब सरकार की वह योजना जिसके तहत हर सऊदी कंपनी में कर्मचारियों का एक निश्चित प्रतिशत सऊदी नागरिकों का होना चाहिए) के कारण खाड़ी देशों से कामगारों की वापसी का सामना कर रहा है.

केरल के प्रवासी हर साल विदेशों से यही कोई 80,000 करोड़ रुपए भेजते रहे हैं, लेकिन कोविड संकट के बाद से राज्य में आने वाली ये रकम 15 फीसदी घटी है. राज्य में बेरोजगारी दर भी ऊंची है—15-29 आयु वर्ग में 43.9 फीसदी. 

इसके बावजूद, मुद्रास्फीति दर और सार्वजनिक देनदारियां इकाई अंक में हैं जो इशारा करती हैं कि राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली प्रभावी है और बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश हुआ है. राज्य सरकार ने आधारभूत ढांचे के विकास पर ध्यान दिया है और राज्य को तेजी से विकसित करने के संसाधन जुटाने के लिए केरल इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड की स्थापना की है.

पिछले साढ़े पांच साल में राज्य ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, स्वच्छता, जलापूर्ति, परिवहन और बिजली क्षेत्र के विकास पर 60,000 करोड़ रु. से ज्यादा खर्च किया है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार ने राज्य के भीतर बेहतर आवाजाही पक्की करने के लिए कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक एक सेमी हाइ-स्पीड रेल कॉरिडोर के रूप में सिल्वरलाइन रेल परियोजना शुरू की है.

मुख्यमंत्री विजयन का कहना है कि ''केरल का लक्ष्यबद्ध विकास हो रहा है. राज्य में समावेशी विकास पक्का करने के लिए हमने कई मिशन शुरू किए हैं. हम राज्य को निवेशकों के अनुकूल बनाने के कार्यक्रमों पर काम करने के साथ ही सार्वजनिक संपत्तियों के निर्माण पर भारी निवेश कर रहे हैं.

भूमिहीन या आवासहीन परिवारों के लिए घर बनाने के विशाल अभियान 'केरल लाइफ मिशन’ के तहत गरीबों को मुक्रत में पांच लाख से ज्यादा घर दिए गए हैं. हम शासन में केरल के लोगों को पारदर्शिता पक्की करने और जरूरतमंदों को दी जाने वाली सेवा में सुधार को प्रतिबद्ध हैं.’’

प्रसन्नता सूचकांक में छोटे राज्यों में गोवा अव्वल रहा. पिछले 3 नवंबर को केंद्र सरकार के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमश: पांच और सात रुपए की कटौती के बाद गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी दोनों प्रकार के ईंधन की कीमतों में सात रुपए की कटौती की. ईंधन की घटी हुई कीमतों ने तीन सप्ताह में गोवा सरकार को महंगाई एक सीमा तक नियंत्रित करने में मदद की है.

दो महीने के भीतर नागरिकों को राज्य सरकार का यह दूसरा तोहफा है. नवंबर के शुरू से राज्य सरकार हर घर को महीने में 16,000 लीटर पानी मुफ्त में उपलब्ध करा रही है. इससे सरकार को आठ करोड़ रुपए मासिक का नुकसान होगा लेकिन इस फैसले के चलते करीब 80 फीसदी घरों में पानी का बिल शून्य रहा है. 

आम तौर पर ऊंघते-औंघाते-से रहने वाले राज्य गोवा में संकट के समय शासन तंत्र सक्रिय हो जाता है. सितंबर में मुख्यमंत्री सावंत ने अपनी सरकार की 152 योजनाओं को लोगों तक ले जाने की पहल 'सरकार तुमच्या दारी’ (सरकार आपके दरवाजे पर) शुरू की थी. नवंबर के पहले हफ्ते में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इस पहल में हजारों लाभार्थियों की पहचान की गई और उन्हें लाभ मिलना शुरू हो चुका है.

राज्य में कच्चे लोहे का खनन मार्च 2017 से ठप है, जिससे सरकारी खजाने को सालाना 1,000 करोड़ रुपए का नुकसान होता है. 2020 में कोविड महामारी से बचाव के लिए लागू किए गए लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को पंगु बना दिया.

फिर भी गोवा बेरोजगारी दर को 11.7 फीसद तक सीमित रखने में कामयाब रहा है, जो देश के छोटे राज्यों में सबसे कम है. 31 मार्च, 2021 के आंकड़ों के मुताबिक गोवा की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय रु. 3.04 लाख थी, जो देश में सर्वाधिक थी. राष्ट्रीय औसत रु. 95,000 है. 

गोवा के लोगों ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है. पिछले एक साल में उन्होंने दक्षिण गोवा में कोयला परिवहन बढ़ाने के प्रस्ताव के साथ-साथ उत्तरी गोवा में वनक्षेत्र को नष्ट करके भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) का परिसर स्थापित करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया.

सड़क नेटवर्क और बिजली आपूर्ति के मामले में बेहतर बुनियादी ढांचे ने भी गोवा के निवासियों की जीवनशैली को बेहतर बनाया है.

मुख्यमंत्री सावंत प्रसन्नता सूचकांक पर गोवा की प्रगति का श्रेय महामारी के दौरान सरकारी कर्मचारियों के अथक परिश्रम को देते हैं. वे कहते हैं, ''हम उनकी वजह से राज्य को सामान्य स्थिति में ला सके. इस सूचकांक में उनका योगदान बहुत बड़ा है.’’ 

खुश रहने के बारे में गोवावासियों की ललक सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली. 'द हैपिनेस प्रोजेक्ट’ नाम का एक मोबाइल एप्लिकेशन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहा है. हैप्पीनेस रिसर्च में योगदान देने के लिए कोई इस ऐप पर पांच मिनट में चार में से एक गेम खेल सकता है. हजारों लोगों ने चार महीने से भी कम समय में इस गेम को दस लाख से ज्यादा बार खेला. 

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