
71 वर्ष गणतंत्र के/ दूरसंचार
जब 24 मार्च, 2020 को लॉकडाउन लागू हुआ, तो घरेलू कामकाज करने वाली आशा ने सोचा तक नहीं था कि यह 21 दिन से आगे बढ़ेगा. लेकिन महीने भर बाद, आखिरकार उसने अपना बोरिया-बिस्तर बांधा और अपनी दो बेटियों के साथ कोलकाता के लिए निकल गई.
वह जिन घरों में काम करती थी, उनमें से कई ने उसे काम पर आने से मना कर दिया था और अपने शहर लौट जाने का मतलब यह था कि वह अपने मकान का किराया बचा सकती थी क्योंकि उसकी बेटियां ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रख सकती थीं. आशा का स्मार्ट फोन उसकी बेटियों की कक्षाओं के साथ मनोरंजन का साधन भी बन गया. वह हर महीने सिर्फ 15,000 रुपए कमाती है लेकिन अब स्मार्ट फोन उनके परिवार के लिए जरूरत बन गई है.
आशा की कहानी देश के टेलीकॉम सेक्टर की कामयाबी का किस्सा है और यह भी कि यह सेक्टर करोड़ों लोगों के लिए क्या अहमियत रखता है. एक वक्त घर में लैंडलाइन फोन रखना भी प्रतिष्ठा का प्रश्न हुआ करता था और उसके कनेक्शन के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता था. उन दिनों से लेकर कुछ हजार रुपयों में मोबाइल फोन खरीदने तक, करोड़ों लोगों को जोडऩे वाली टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश ने काफी बढ़त हासिल की है.
इसकी संख्या हैरतअंगेज है—देश में तकरीबन 117.83 करोड़ मोबाइल फोन कनेक्शन हैं. जून, 2019 तक देश में करीब 66.52 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे और इनमें 59.46 करोड़ ब्रॉडबैंड यूजर थे. महामारी के दौरान, देश के संचार सेक्टर ने अर्थव्यवस्था के रक्षक की भूमिका निभाई क्योंकि करोड़ों लोग पढ़ाई, कामकाज और घर से खरीदारी के लिए इंटरनेट की सेवा लेने लगे.
देश में डिजिटल भुगतान, एजुटेक और डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर के लिए डिजिटल तरीका अपनाया गया और इन सबसे इंटरनेट के इस्तेमाल में उछाल दर्ज किया गया. इस दिशा में देश का डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत स्तंभ की तरह उभरा.
देश के टेलीकॉम सेक्टर की कामयाबी अनूठी रही क्योंकि इसके विकास की अगुआई निजी क्षेत्र कर रहा था. 1999 में घोषित नई दूरसंचार नीति ने निजी कंपनियों को इस सेक्टर में ऌप्रवेश दिलाया. इसी से देश में टेलीकॉम सेक्टर की कामयाबी की नींव पड़ी. इस नीति ने तयशुदा लाइसेंस शुल्क को कम कर दिया, जो निजी क्षेत्र को सरकार को देनी होती थी और इसकी बजाए राजस्व बंटवारे का मॉडल अपनाया गया.
अगस्त, 2000 में सरकार ने लंबी दूरी की कॉल सेवा के लिए निजी खिलाडिय़ों के लिए दरवाजे खोल दिए—यह कदम ऐसा था जिससे कॉल दरें कम हो गईं. मोबाइल हैंडसेट पर आयात शुल्क 25 फीसद से घटाकर 5 फीसद कर दिए गए, और इससे मोबाइल हैंडसेट की कीमत भी काफी कम हो गई.

अगला फोकस हर आदमी को हाइस्पीड इंटरनेट की उपलब्धता पर है. इसका लक्ष्य डिजिटल पहचान और सार्वजनिक क्लाउड का होगा, जिसमें किसी की सारी सूचनाएं इकट्ठा होंगी, और वित्तीय लेन-देन के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा. अधिकाधिक लोग कैशलेस हो पाएंगे और गवर्नेंस का ऐसा मंच मुहैया होगा, जहां लोग अपने प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय कर पाएंगे.
इस बीच, डिजिटल साक्षरता की कमी और नेट की धीमी स्पीड ने ग्रामीण इलाकों में डिजिटल खाई को चौड़ा कर दिया है. अधिकतर, टेलीकॉम कंपनियां दूरदराज के इलाकों को फायदेमंद नहीं मानती हैं, इसलिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में देरी हो रही है. डेलोइट-एसोचैम की रिपोर्ट का अनुमान है कि देश में करीब 80 लाख हॉटस्पॉट (अभी 31,000 हॉटस्पॉट हैं) की जरूरत है, ताकि हर 150 लोगों पर एक वाइ-फाइ हॉटस्पॉट के वैश्विक स्तर तक पहुंचा जा सके.
इस बीच, टेलीकॉम कंपनियां 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी पर स्पष्टता चाह रही हैं, केंद्रीय कैबिनेट ने 2,251.25 मेगाहर्ट्ज के स्पेक्ट्रम की नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसकी कीमत 17 दिसंबर, 2020 को करीब 3.92 लाख करोड़ आंकी गई थी.
डिजिटल इंपावरमेंट फाउंडेशन की 2018 की रिपोर्ट केमुताबिक, भारत में 90 फीसद लोग डिजिटल निरक्षर
75 वें वर्ष का एजेंडा
देश में अमीर और गरीब लोगों के बीच डिजिटल खाई को पाटना
डेलोइट-एसोचैम रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मौजूदा 31,000 हॉटस्पॉट के मुकाबले 80 लाख हॉटस्पॉट की दरकार, ताकि हर 150 लोगों पर एक वाइफाइ हॉटस्पॉट के वैश्विक मानक तक पहुंचा जा सके
नवाचार और विकास के साथ डेटा सुरक्षा के लिए कानून जरूरी
ऊंची इंटरनेट स्पीड. 2020 की ऊकला रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक औसत मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में 138 देशों में 131 के स्थान पर है

