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कश्मीर की राह पर है असम

अल्पसंख्यक संगठन वह काम कर चुके हैं जिसके बारे में सोचा नहीं जा सकता था: वे मुसलमानों की लड़ाई को ऊपरी असम के जिलों तक लेकर गए हैं, जो असमी संस्कृति के केंद्र माने जाते हैं. उन्हें अपने 'इस्लाम खतरे में है’ के लोकप्रिय नारे के साथ देशज मुसलमानों में अविश्वास का माहौल पैदा करने में भी सफलता मिल गई है.

अपडेटेड 1 अक्टूबर , 2012

असम में सामुदायिक संघर्ष आम बात है, लेकिन बोडोलैंड की मौजूदा अशांति कई मायनों में अलग है. पहली बार, स्थानीय लोगों और मुस्लिम प्रवासियों के बीच खाई काफी गहरी हुई है. बोडो और गैर बोडो मूल निवासी समुदायों जैसे असमी बोलने वाले राभाओं, कोच राजबंगशियों और आदिवासियों में एक नीतिगत गठजोड़ भी बना है. ये समुदाय 1998 तक जगह और पहचान के लिए एक-दूसरे से लड़ते रहे हैं.

प्रवासी मुसलमानों और अन्य समुदायों के बीच विभाजन बहुत ज्यादा हो गया है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) के बदरुद्दीन अजमल जैसे धार्मिक अल्पसंख्यक नेताओं को स्थानीय असमी मुसलमानों और प्रवासी मुसलमानों के बीच खाई को कम करने में सफलता मिली है.

असल में 2012 की हिंसा की जड़ बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) के गठन में ही है. बीटीसी का गठन करीब 10 साल पहले संविधान की छठीं अनुसूची के तहत किया गया था. बोडो लिबरेशन टाइगर्स (बीएलटी) के निर्देश पर की जा रही हत्याओं और हिंसा के बीच बीटीसी का जन्म हुआ था और 2003 में बोडो लोगों की तरफ से इसके लिए समझौते पर दस्तखत करने वाला अकेला बीएलटी ही था.

स्वायत्तता के बाद बोडो टाइगर्स ने एक नया राजनैतिक दल, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) बना लिया ताकि चुनावी राजनीति की नई जरूरतों में भी जगह बनाई जा सके. वैसे तो कई लड़ाकों ने अपने हथियारों के साथ समर्पण किया था, लेकिन बहुत ऐसे भी थे जिन्होंने अपने हथियारों को अपने पास ही रख लिया था. 2006 में बीपीएफ राज्य में कांग्रेस के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो गया.

कांग्रेस उस पर निर्भर थी, इसलिए बीपीएफ नेताओं को लगा कि वे जो करते हैं वही 'कानून-व्यवस्था’ है, न कि वह संवैधानिक 'कानून का शासन’ जिसकी रक्षा करने का उनके ऊपर दायित्व है. बोडो समाज और अन्य आतंकवादी संगठनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब कई लोगों की 'गोपनीय हत्याएं’ होने लगीं.

यह असम में 1996 से 2002 के बीच हुई उल्फा सदस्यों के परिजनों की हत्याओं जैसा ही था. बीटीसी की सत्ता को चुनौती दे सकने वाले सबसे प्रभावी आतंकवादी संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड को अन्य बोडो सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ ही शांत कर दिया गया था. अपने बड़े आलोचकों को शांत करने के बाद बीपीएफ ने लड़ाकू गुटों के साथ मेल-जोल की प्रक्रिया शुरू की. इसके बाद 2009 तक एकजुटता के साथ बोडो संघर्ष चला.

वैसे तो हिंसा पर काबू पाना और कानून-व्यवस्था की बहाली असम में शांति कायम रखने का पैमाना है, लेकिन संरचनात्मक मुद्दों को हल करने की कभी कोशिश नहीं की गई. इन मुद्दों में अवैध प्रवासियों द्वारा जमीन पर कब्जा और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के जरिए विदेशियों को बसाने का काम शामिल हैं. प्रतिनिधित्व यदि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है तो बीटीसी के मौजूदा स्वरूप में सुधार करके उसमें सबको प्रतिनिधित्व देना चाहिए और बोडोलैंड के दूसरे पक्षों को पर्याप्त महत्व देना चाहिए. प्रवासी मुसलमानों की हत्या और विस्थापन के बड़े मायने हैं.

बंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद से पूर्वोत्तर के लोगों के भारी पलायन की बदौलत एआइयूडीएफ के प्रमुख अजमल को प्रवासी मुसलमानों के हक की बात को राष्ट्रीय सीमा से परे ले जाने में सफलता मिल चुकी है. अल्पसंख्यक संगठन वह काम कर चुके हैं जिसके बारे में सोचा नहीं जा सकता था: वे मुसलमानों की लड़ाई को ऊपरी असम के जिलों तक लेकर गए हैं जो असमी संस्कृति के केंद्र माने जाते हैं. उन्हें अपने 'इस्लाम खतरे में है’ के लोकप्रिय नारे के साथ देशज मुसलमानों में अविश्वास का माहौल पैदा करने में भी सफलता मिल गई है.

हमारे नीति-नियंताओं को असम और शेष पूर्वोत्तर के भू-सामरिक महत्व को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह जम्मू-कश्मीर से कम महत्वपूर्ण नहीं है. इन दोनों इलाकों में कई समानताएं हैं. मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि के लिहाज से जम्मू-कश्मीर के बाद असम दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. इस राज्य की सीमा चीन, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से मिलती है.

बागी संगठन यहां बड़े पैमाने पर हथियारों की खेप आने से भारत से लडऩे को और प्रेरित होते हैं. हालांकि अभी तक मुस्लिम संगठन बोडो, मेइतीज, नगा और असमियों की तरह बड़े पैमाने पर हथियारबंद नहीं हुए हैं. यह इलाका हथियारों और उग्र विचारों की मुक्ïत आवाजाही की उर्वर जमीन बन गया है. हम असम को भारत का दूसरा कश्मीर बनते नहीं देख सकते.

लेखक गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर हैं

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