
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता था. एक राजनैतिक तख्तापलट के बाद शपथ लेने के तीन महीने से भी कम समय में, ग्रीनफील्ड परियोजना में भारत का अब तक का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट निवेश महाराष्ट्र से फिसलकर पड़ोसी गुजरात चला गया. ताइवान की फर्म फॉक्सकॉन और अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के बीच 1.54 लाख करोड़ रुपए के सेमीकंडक्टर निर्माण के संयुक्त उद्यम (जेवी) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में थी.
लेकिन परियोजना महाराष्ट्र के हाथ आते-आते रह गई. भविष्य में और अधिक निवेश लाने के शिंदे के किसी भी आश्वासन से उन आरोपों की आग शांत करने में मदद नहीं मिलेगी कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर अनावश्यक रूप से ''सुस्त’’ थी और भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इशारे पर निवेश गुजरात चला गया जहां चुनाव होने वाले हैं.
आरोप तो यह भी लगाए जा रहे हैं कि वास्तव में इस संयुक्त उद्यम को महाराष्ट्र ने अपने पड़ोसी की तुलना में अधिक अनुकूल प्रस्ताव दिया था. महाराष्ट्र सरकार ने वेदांता-फॉक्सकॉन के लिए 40,000 करोड़ रु. के प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी थी और संयंत्र के लिए पुणे के पास तालेगांव में भूखंड की भी पहचान की गई थी. गुजरात ने अपनी ओर से कंपनी को 12,000 करोड़ रुपए के प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश की है.
दरअसल, गुजरात सरकार ने परियोजना के लिए जमीन की तलाश तभी शुरू की, जब महाराष्ट्र में विपक्ष ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के 'विश्वासघात’ के खिलाफ मोर्चा खोला था. गुजरात के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सचिव, विजय नेहरा ने फॉक्सकॉन-वेदांता के साथ सौदे के पांच दिन बाद 18 सितंबर को पत्रकारों से कहा कि एक-दो सप्ताह में एक साइट फाइनल की जा सकती है. नेहरा ने कहा, ''वेदांता-फॉक्सकॉन ने विशेषज्ञों को काम पर लगाया है जो तकनीकी पहलुओं, वाणिज्यिक व्यवहार्यता और कनेक्टिविटी के आधार पर संभावित स्थानों का मूल्यांकन कर रहे हैं.’’
बस छूट गई
वेदांता ने भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकोसिस्टम के निर्माण के लिए 60:40 के संयुक्त उद्यम में फॉक्सकॉन से हाथ मिलाया है. सेमीकंडक्टर चिप्स कारों और मोबाइल फोन से लेकर डेबिट/क्रेडिट कार्ड तक, डिजिटल उपभोक्ता उत्पादों के आवश्यक घटक हैं.
केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में ''सस्टेनेबल सेमीकंडक्टर विकसित करने’’ और विभिन्न राज्यों में उपयुक्त मैन्युफैक्चरिंग स्थानों की पहचान करने के लिए 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ की घोषणा की थी. यह साझेदारी केंद्र की उस घोषणा के बाद पहला बड़ा उद्यम है. वेदांता-फॉक्सकॉन को अपने राज्यों में लाने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु एक-दूसरे से होड़ कर रहे थे.
कंपनी ने उन आंतरिक रिपोर्टों के बाद गुजरात का नाम अपनी संभावित सूची से हटा दिया था, जिसमें कहा गया था कि राज्य की ओर से सेमीकंडक्टर हब के रूप में चिह्नित जगह धोलेरा अनुपयुक्त है क्योंकि यहां भूमि बंजर और दलदली है और बुनियादी ढांचे के विकास और सिविल कार्यों पर बहुत अधिक व्यय की आवश्यकता होगी. उस रिपोर्ट का एक अंश हिस्सा इंडिया टुडे के हाथ लगा है जिसमें कुछ प्रतिकूल टिप्पणियां हैं.
रिपोर्ट कहती है, ''यहां जल संकट है, खारे पानी को उपयोगी बनाने के लिए डिसेलिनेशन संयंत्रों की जरूरत होगी... पानी के उपयोग को लेकर कई बंदिशें और पुनर्चक्रण पर जोर है... कुशल कार्यबल की अपेक्षाकृत कम उपलब्धता... वर्तमान में साइट के पास कोई आपूर्ति शृंखला विक्रेता और ग्राहक मौजूद नहीं हैं... राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पारिस्थितिकी तंत्र नगण्य है... जलवायु चरम पर...और एक नया शहर विकसित करना होगा...’’
दूसरी ओर, महाराष्ट्र में लगभग 10,000 एकड़ में फैले तालेगांव फेज IV को एक इलेक्ट्रॉनिक सिटी के रूप में तैयार किया गया था और रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना के लिए यह सबसे अनुकूल था. रिपोर्ट में कहा गया है, ''उपलब्ध घटक निर्माताओं के साथ संभावित ग्राहकों के साथ ईएमसी (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी) सहित 200 किमी के दायरे में अत्यधिक विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्लस्टर उपलब्ध है.’’
भूमि की उपलब्धता, कर प्रोत्साहन, निर्बाध बिजली आपूर्ति और गुजरने वाली ट्रेनों से कंपन मुक्त क्षेत्र जैसे पहलुओं का मूल्यांकन करने के बाद, महाराष्ट्र जुलाई के मध्य में अंतिम विकल्प के रूप में उभरा. 26 जुलाई को शिंदे और उपमुख्यमंत्री भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि वेदांता-फॉक्सकॉन प्लांट तालेगांव में आ रहा है.
लेकिन इसके तुरंत बाद चीजें एकदम उलटी दिशा में जाने लगीं. गुजरात सरकार ने 28 जुलाई को 'गुजरात सेमीकंडक्टर नीति 2022-27’ की घोषणा की, जिसमें राज्य ने महत्वाकांक्षी धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र के हिस्से के रूप में अहमदाबाद के पास 'सेमीकॉन सिटी’ का प्रस्ताव रखा था.
तब, महाराष्ट्र सरकार ने वेदांता-फॉक्सकॉन को मैन्युफैक्चरिंग के लिए 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत, 1 रुपए प्रति यूनिट की बिजली सब्सिडी, 750 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए सहायता, बिजली शुल्क से छूट और जमीन तथा पानी पर सब्सिडी जैसी कई अन्य रियायतों की पेशकश की थी. शिंदे के वेदांता को 26 जुलाई को लिखे एक पत्र से पता चलता है कि सीएम ने कंपनी को आश्वासन दिया कि उसकी दो शर्तों—'केंद्र के साथ गठबंधन’ और राज्य कैबिनेट से अनुमोदन—को जल्द पूरा किया जाएगा.
शिंदे ने वेदांता-फॉक्सकॉन से 29 जुलाई को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने की तारीख को अंतिम रूप देने का अनुरोध किया था. हालांकि, आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कंपनी ने इसको लेकर बैठक नहीं की. फडणवीस, जो वित्त मंत्रालय भी संभालते हैं, ने 16 सितंबर को बताया कि उन्होंने एमओयू को पूरा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से 5 सितंबर को वेदांता के अग्रवाल को फोन किया था.
फडणवीस ने मुंबई में कहा, ''अग्रवाल ने मुझे बताया कि उन्होंने गुजरात जाने का मन बना लिया है. अग्रवाल का कहना था कि महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई में 'प्रतिस्पर्धी पेशकश के साथ अन्य राज्यों को पछाड़ने के लिए’ बहुत बड़ा प्रयास किया था... लेकिन हमने कुछ महीने पहले गुजरात का फैसला किया क्योंकि वे हमारी उम्मीदों पर खरे उतरे.’’

क्या केंद्र ने बांहें मरोड़ी हैं?
वेदांता-फॉक्सकॉन ने गुजरात जाने का फैसला केंद्र सरकार के दबाव में किया है, यह चर्चा तब शुरू हुई जब अग्रवाल ने एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद कंपनी को ''चीजों को इतनी जल्दी अंतिम रूप देने’’ में मदद के लिए केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को धन्यवाद दिया.
इसके तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ''यह समझौता ज्ञापन भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण महत्वाकांक्षाओं को गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण कदम है. 1.54 लाख करोड़ रु. का निवेश अर्थव्यवस्था और नौकरियों के बाजार को बढ़ावा देने में प्रभावशाली कदम साबित होगा.’’ अग्रवाल ने बाद में ट्वीट किया कि गुजरात को चुनने का निर्णय ''पेशेवर और स्वतंत्र सलाह’’ पर आधारित था.
महाराष्ट्र में विपक्षी दल बहुत जोर-शोर से इसका प्रचार कर रहे हैं कि महाराष्ट्र, गुजरात से पराजित हो गया. पूर्व सीएम पृथ्वीराज चह्वाण ने आरोप लगाया कि अग्रवाल के न चाहने के बावजूद केंद्र सरकार ने इस परियोजना को गुजरात भेज दिया. चह्वाण ने 15 सितंबर को संवाददाताओं से कहा, ''उन्हें कहा गया कि अगर वे केंद्र से कोई प्रोत्साहन चाहते हैं तो उन्हें वेदांता प्रोजेक्ट को गुजरात लेकर जाना होगा. पीएम मोदी के ऐसे हुक्म के बाद फडणवीस एक शब्द भी नहीं बोल सकते.’’
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने वर्तमान सरकार को उसकी सुस्ती के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने 17 सितंबर को शिवसेना के पदाधिकारियों से कहा, ''हमने इस परियोजना को महाराष्ट्र में लाने के लिए बहुत प्रयास किए. वे (भाजपा और शिवसेना के बागी शिंदे) अब इस पर राजनीति कर रहे हैं.’’ उन्होंने यह भी कहा, ''एकनाथ शिंदे दिल्ली में मुजरा करते हैं लेकिन वेदांता-फॉक्सकॉन प्रोजेक्ट या किसी अन्य प्रोजेक्ट पर कुछ नहीं कहते.’’ महाराष्ट्र सरकार के एक सूत्र का कहना है कि केंद्र ने पिछले दो वर्षों में कई प्रेजेंटेशन के बावजूद राज्य में 3 लाख करोड़ रु. की परियोजनाओं के लिए मंजूरी नहीं दी है.
गुजरात सरकार के सूत्रों का कहना है कि राज्य की सेमीकंडक्टर नीति में भूमि खरीद पर सब्सिडी के प्रावधान के कारण वेदांता-फॉक्सकॉन ने यहां आने का फैसला किया. इसके तहत पात्र परियोजनाओं को निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए पहली 200 एकड़ जमीन खरीदने पर 75 फीसदी की सब्सिडी दी जाएगी. इसके अलावा, अगर निवेशक पांच साल में अपना डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठे में बदलने के लिए संयंत्र) बनाता है, तो राज्य उसे 50 प्रतिशत की पूंजी सब्सिडी प्रदान करता है.
सूत्रों ने बताया, ''महाराष्ट्र 1 रुपए प्रति यूनिट की बिजली शुल्क सब्सिडी की पेशकश कर रहा था. हमारी नीति में उत्पादन में जाने के बाद पहले 10 वर्षों के लिए 2 रुपए प्रति यूनिट बिजली शुल्क सब्सिडी का प्रावधान है. ऐसी परियोजनाएं इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी के भुगतान से छूट का दावा भी कर सकती हैं.’’ गुजरात ने बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के अलावा पट्टे, बिक्री या हस्तांतरण पर ली गई भूमि के लिए 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क की भरपाई करने पर भी सहमति व्यक्त की.
फडणवीस अब दावा करते हैं कि वेदांता-फॉक्सकॉन ने आश्वासन दिया है कि महाराष्ट्र में एक सहायक इकाई स्थापित की जाएगी. उन्होंने 16 सितंबर को मुंबई में कहा, ''गुजरात हमारा ही छोटा भाई है. यह पाकिस्तान में नहीं है. हमें बड़ी परियोजनाएं मिलेंगी. '' शिंदे अभी भी उम्मीद से हैं. उन्होंने 18 सितंबर को मुंबई में कहा, ''अगर वेदांता-फॉक्सकॉन विचार बदलते हैं, तो उनका महाराष्ट्र में स्वागत है.’’
नफा-नुक्सान
प्रस्तावित सेमीकंडक्टर प्लांट में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) के रूप में गुजरात के खजाने में 27,000 करोड़ रु. लाने की क्षमता है. इससे 2,00,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ 21 अरब डॉलर (1.7 लाख करोड़ रु.) का अतिरिक्त प्रत्यक्ष निवेश और 5-8 अरब डॉलर (40,000-64,000 करोड़ रु.) का परोक्ष निवेश होने की संभावना है.
संयोग से, फॉक्सकॉन के साथ महाराष्ट्र का ऐसा पहला अनुभव नहीं था. 2015 में, तत्कालीन सीएम फडणवीस ने कंपनी की मेजबानी की थी और फॉक्सकॉन ने एक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने के लिए पांच वर्षों में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करने का वादा करते हुए एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. कंपनी ने पहले नवी मुंबई में मोबाइल निर्माण के एक छोटे संयंत्र और बाद में तालेगांव में एक बड़े संयंत्र की परिकल्पना की थी. हालांकि, कर रियायतों पर मतभेद के कारण प्रोजेक्ट नहीं लगा. कंपनी ने वह संयंत्र तमिलनाडु स्थानांतरित कर दिया.
राजनैतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव की वजह से केंद्र ने वेदांता-फॉक्सकॉन प्रोजेक्ट को गुजरात स्थानांतरित करने के लिए मंजूरी दी. निवेश योजना से भाजपा और सीएम भूपेंद्र पटेल को गिनाने के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन पार्टी को महाराष्ट्र में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, खासकर मुंबई और पुणे में जहां इस साल के अंत में नगरपालिका चुनाव होने हैं. मुंबई में, ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट और राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने पहले ही भाजपा को ''महाराष्ट्र विरोधी’’ बताना शुरू कर दिया है.
महाराष्ट्र कांग्रेस भी शिंदे पर उद्योगों को भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों पर टालमटोल के आरोप लगा रही है. 1 जून को 12,000 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी लेकिन शिंदे ने भूमि आवंटन पर रोक लगा दी थी. सीएम ने अंतत: 19 सितंबर को रोक हटाई. इससे राज्य में 191 कारोबारी प्रस्तावों में से 183 के लिए जमीन आवंटन का रास्ता साफ हुआ. बहरहाल, राजनैतिक खींचतान के बीच अगर भाजपा इस बार मुंबई में वोटरों को समझाने में नाकाम रहती है तो उसे आने वाले चुनावों में भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है.

