गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का दूसरा कार्यकाल हाल में ही शुरू हुआ है, लेकिन उन्होंने अगले पांच साल के लिए हिंदुत्व का एजेंडा तय कर लिया है. उनका यह एजेंडा उस मुद्दे से बहुत दूर भी नहीं है जिसकी पैरोकारी उनकी भारतीय जनता पार्टी पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय स्तर पर करती रही है. सावंत उन मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का अभियान शुरू कर रहे हैं जिन्हें यूरोपीय उपनिवेशवादियों ने अपने 450 साल के शासनकाल में कथित रूप से ध्वस्त किया था. हालांकि, गोवा में इस अभियान में मुगलों के बजाए पुर्तगाली निशाने पर होंगे.
सावंत ने नष्ट हुए मंदिरों को पुनर्स्थापित करने का विचार सबसे पहले दिसंबर 2021 में पोंडा में लोकप्रिय देवस्थान मंगुएशी में आयोजित एक समारोह में रखा था. मुख्यमंत्री ने तब कहा था कि ''श्री मंगुएशी मंदिर का मूल स्थान कुशस्थली या आज के कोर्टालिम में है, जिस पर पुर्तगाली आक्रांताओं ने 1543 में कब्जा कर लिया था. तब हमारे पूर्वजों ने मंगुएश लिंग को मूल स्थान से मंगुएशी के मौजूदा स्थान पर पहुंचा दिया था...अभी तक पर्यटक केवल हमारे समुद्र तटों का आनंद लेने आते थे लेकिन अब हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें अपने मंदिरों में ले जाएं.''
शुरू में गोवा के लोगों को लगा था कि सावंत का बयान चुनावी शोशा भर है क्योंकि मार्च में विधानसभा चुनाव होने थे. लेकिन अब उन्हें एहसास हो रहा है कि इस मुद्दे पर सावंत वाकई गंभीर हैं. मई में दिल्ली में एक सम्मेलन में उन्होंने कहा, ''मैंने अभिलेखागार विभाग से पुर्तगालियों के हाथों नष्ट किए गए मंदिरों की सूची बनाने को कहा है. इसके सर्वे के लिए हमने 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है.''
सावंत ने धर्मांतरण रोकने के लिए 11 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में धर्मांतरण-विरोधी विधेयक लाने की योजना का भी ऐलान किया है. अप्रैल में सिओलिम के पादरी डॉमिनिक डिसूजा की गिरफ्तारी से सावंत के रुख को बल मिला है. गोवा पुलिस ने पादरी पर धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और ''धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने'' के आरोप में मामला दर्ज किया है.
राज्य सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि पुर्तगाली सरकार ने 1561 में शुरू हुए पोप के धर्मरक्षा अभियान के दौरान लगभग 300 हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया था. मई में एक दक्षिणपंथी संगठन हिंदू रक्षा मंच ने पुर्तगाली मिशनरी जेवियर्स के बजाय भगवान परशुराम को गोवा का संरक्षक संत घोषित करवाने के लिए आंदोलन शुरू किया. जेवियर्स का शरीर पुराने गोवा के एक चर्च में संरक्षित है और यह राज्य के सबसे बड़े पर्यटक स्थलों में से एक है. हिंदू रक्षा मंच के नेता सुभाष वेलिंगकर का आरोप है कि ''जेवियर्स ने ईसाई धर्म अपनाने से इनकार करने वाले हजारों हिंदुओं को मारने का आदेश दिया था.'' साथ ही वे दावा करते हैं कि भगवान परशुराम ने अरब सागर से भूमि वापस लेकर गोवा का निर्माण किया था, इसलिए राज्य को उनके नाम से जाना जाना चाहिए.
हालांकि, हर कोई धर्मांतरण के मसले पर मुख्यमंत्री सावंत की बात से सहमत नहीं है. राज्य कांग्रेस सचिव श्रीनिवास खलप का कहना है कि धर्मांतरण विरोधी कानून का समर्थन करने के लिए कोई पुख्ता आंकड़ा नहीं है. वे सवाल करते हैं, ''चुनाव के बाद अचानक यह मुद्दा कहां से आ गया?'' उनका दावा है कि गोवा में जबरन धर्म परिवर्तन के बहुत कम मामले हैं.
गोवा में भाजपा का जो राजनीतिक रुख रहा है, उस हिसाब से सावंत का हिंदुत्ववाद एक नया बदलाव है. वर्ष 2012 में जब दिवंगत मनोहर पर्रीकर ने राज्य में भाजपा के बहुमत वाली पहली सरकार बनाई थी, तो उन्होंने स्वीकार किया था कि ईसाइयों की मदद से सरकार का गठन संभव हुआ है. राज्य के ईसाई-बहुल इलाके साल्सेटे में अपना खाता खोलने के एक दशक बाद अब भाजपा के रुख में बदलाव से इस समुदाय को धक्का लग सकता है. लेकिन पार्टी यह जोखिम उठाने को तैयार है. भाजपा के एक शीर्ष सूत्र का कहना है, ''नावेलिम चुनाव के नतीजों से पता चलता है कि विपक्षी वोटों के कांग्रेस और आप के बीच बिखराव की स्थिति में जीत हमारी होगी, भले ही मतदाताओं में 80 फीसदी ईसाई हों.'' सावंत और उनकी पार्टी को इस सिद्धांत का परीक्षण करने का मौका भी जल्द ही मिलेगा क्योंकि आगामी अक्तूबर में राज्य में पंचायत चुनाव होने की संभावना है.

