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और जिला पुरस्कार के विजेता हैं...

गोवा की कला-शिल्प, भारतीय और पुर्तगाली संस्कृति के सौंदर्य का मिश्रण है. उत्तर गोवा के अधिकतर कारीगर बांस शिल्प से जुड़े कार्यों में लगे हैं, जो ज्यादातर परनेम और सत्तारी में केंद्रित हैं. जिले में 11,796 हेक्टेयर में काजू की खेती होती है और सालाना उत्पादन करीब 8,500 मीट्रिक टन है.

गोवा के एक समुद्रतट पर स्थानीय लोग और पर्यटक
गोवा के एक समुद्रतट पर स्थानीय लोग और पर्यटक
अपडेटेड 31 अक्टूबर , 2019

जब 1 अक्तूबर को पर्यटन सीजन की पहली चार्टर्ड फ्लाइट पहुंची, तो रूस के पर्यटकों ने न तो गाइड्स और न ही 'क्या करें' वाली लिस्ट खोजी. वे सीधे उत्तरी गोवा के कैलांगुटे चले गए. कैलांगुटे, बागा, अंजुना, वागाटोर और कैंडोलिम, ये उत्तरी गोवा जिले में हैं, जो देश में समुद्रतटीय पर्यटन के पर्याय बन गए हैं.

इस राज्य के दो जिले हैं, उत्तरी गोवा और दक्षिण गोवा. इन जिलों को तालुका में बांटा गया है. वर्तमान उत्तरी गोवा जिला 18वीं और 19वीं सदी की शुरुआत में मराठा सेना का गढ़ था. आज यह कला, पर्यटन और उद्योगों के प्रोत्साहन का पसंदीदा केंद्र है. 1,736 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले में जनसंख्या घनत्व काफी कम, 471 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है. यहां की आबादी मुख्यत: हिंदू (76.1 प्रतिशत) है, पर यहां ईसाई (16.4 प्रतिशत) और मुस्लिम (7.1 प्रतिशत) भी हैं. यहां साक्षरता दर 89.6 प्रतिशत है. क्षेत्र में कुछ बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं, जिनमें मोपा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और पेरनेम में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी शामिल हैं, जिसमें 25,000 लोगों को रोजगार मिलेगा.

दक्षिण गोवा 1,966 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यहां जनसंख्या घनत्व 329 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है. 2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की साक्षरता दर 87.6 प्रतिशत है और स्त्री-पुरुष अनुपात 980 महिला प्रति 1,000 पुरुष है. यही नहीं, 32 प्रतिशत श्रम शक्ति के साथ इस जिले में आंत्रप्रन्योरशिप के लिए काफी संभावनाएं हैं.

उत्तरी गोवा

पुर्तगालियों की घुसपैठ के बाद, फिर छत्रपति शिवाजी और उनके पुत्र संभाजी के वक्त से ही उत्तर गोवा ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है. शिवाजी की सेना ने पोंडा को जीत लिया, तो संभाजी ने बारदेज पर अधिकार कर लिया था. पुर्तगालियों ने फोर्ट अगुआडा को अपना घर बना लिया था. यह किला अब जेल में तब्दील हो चुका है. गोवा में बोम जीसस बेसिलिका के बारे में कहा जाता है कि यहां सेंट फ्रांसिस जेवियर के नश्वर अवशेष मौजूद हैं. 16वीं शताब्दी में हिंदू बहुल गोवा में ईसाई धर्म का प्रसार करने का श्रेय कैथोलिक मिशनरी सेंट फ्रांसिस जेवियर को ही दिया जाता है.

उत्तर गोवा में प्रचुर प्राकृतिक संसाधन हैं. तिराकोल, चपोरा, मंडोवी और जुआरी जैसी बारहमासी नदियों के कारण यहां प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध है. बिचोलिम और सत्तारी में लौह अयस्क का खनन, जिले की बड़ी पहचान है. पर इसकी सबसे बड़ी पहचान यहां का वन क्षेत्र है. जिले का 21 फीसद हिस्सा घने जंगल से घिरा है, खासकर सत्तारी का पश्चिमी घाट.

उत्तर गोवा ने यह भी दिखाया है कि कैसे एक पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ते औद्योगिक केंद्रों में बदल सकती है. उत्तर गोवा में 12 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं. 356 इकाइयों के साथ, कुंडिम उत्तर गोवा का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. फलते-फूलते पर्यटन क्षेत्र के अलावा, हाल के वर्षों में दवाएं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग और जहाज निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है. गोवा सरकार ने जैव-प्रौद्योगिकी, विमानन, एयरोस्पेस, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग जैसे ज्ञान-आधारित उद्योगों में औद्योगिक विकास के लिए संभावनाओं की पहचान की है. जिले में आइटी सक्षम सेवाओं, एनिमेशन और गेमिंग तथा डिजिटल मनोरंजन की भी जबरदस्त संभावना है.

गोवा की कला-शिल्प, भारतीय और पुर्तगाली संस्कृति के सौंदर्य का मिश्रण है. उत्तर गोवा के अधिकतर कारीगर बांस शिल्प से जुड़े कार्यों में लगे हैं, जो ज्यादातर परनेम और सत्तारी में केंद्रित हैं. जिले में 11,796 हेक्टेयर में काजू की खेती होती है और सालाना उत्पादन करीब 8,500 मीट्रिक टन है.

चूंकि गोवा में उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ा मुद्दा है, इसलिए राज्य सरकार इसका समाधान लेकर आई है. इसने गोवा (भूमि विकास और भवन निर्माण नियमन) अधिनियम, 2008 और गोवा भूमि विकास और भवन निर्माण नियमन, 2010 में संशोधन किया है. इसका लक्ष्य विभिन्न इंडस्ट्रियल एस्टेट के लिए करीब 3,70,000 वर्ग मीटर भूमि को डी-फ्रीज करना है. सरकार 24 लाख वर्ग मीटर भूमि को बांटने पर भी विचार कर रही है, जिसे विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसइजेड) के प्रवर्तकों से लेकर नए और मौजूदा उद्योगों के लिए खोला गया है.

दक्षिण गोवा

दक्षिण गोवा प्राकृतिक सौंदर्य की भूमि है, जहां विभिन्न मंदिर, झरने, समुद्र तट और पहाड़ हैं. यह औद्योगिक केंद्र भी है. यह खेल और संस्कृति का गढ़ भी है और एफसी गोवा, चर्चिल ब्रदर्स और डेम्पो जैसे गोवा के प्रसिद्ध फुटबॉल क्लबों का ठिकाना है. गोवा का एकमात्र क्रिकेट स्टेडियम मर्गाओ में है जहां रणजी ट्रॉफी मैच आयोजित किए जाते हैं.

दक्षिण गोवा की उच्च साक्षरता दर से शिक्षा के क्षेत्र में इसके अच्छे बुनियादी ढांचे की झलक मिल जाती है. कानून और व्यवस्था की स्थिति भी दक्षिण गोवा में उत्तर गोवा की तुलना में बेहतर है. नतीजतन, आतिथ्य उद्योग दक्षिण गोवा में काफी संपन्न है.

यह जिला लोहा, बॉक्साइट और मैंगनीज अयस्क जैसे खनिजों से समृद्ध है. जिले के करीब 42 प्रतिशत क्षेत्र में सघन वन हैं. यहां तीन वन्यजीव अभयारण्य हैं और एक राष्ट्रीय उद्यान है जो 71 प्रतिशत वन क्षेत्र में फैला है. फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे ज्ञान आधारित उद्योगों के साथ कृषि आधारित उद्योगों के लिए भी दक्षिण गोवा में काफी संभावनाएं हैं. राज्य की 70 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां यहीं हैं.

गोवा सरकार ने पूरे राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित करने की पहल की है. इस नीति का सबसे बड़ा फायदा, दक्षिण गोवा को हो सकता है.

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