राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बदलते वक्त की हकीकत से कदमताल करना चाहता है. भारत एक हिंदू राष्ट्र है. इस विचार को छोड़ संघ हर परिवर्तन को तैयार है, जिसका पहला शिकार बने हैं बलदेव शर्मा. उन्हें संगठन के मुखपत्र पाञ्चजन्य के संपादक पद से रुखसत कर मुख्यधारा से जुड़े युवा पत्रकार 36 वर्षीय हितेश शंकर को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य और दिल्ली के प्रांत कार्यवाह विजय कुमार को इस पूरे बदलाव का सूत्रधार माना जा रहा है, जो कि पाञ्चजन्य के प्रकाशक भारत प्रकाशन के महाप्रबंधक भी हैं. पर क्या संघ की नई नीति ही शर्मा की विदाई का सबब बनी?
अब राज्यसभा में विराजमान तरुण विजय के संपादकत्व में पहले भी पाञ्चजन्य में अरसे तक काम कर चुके शर्मा 14 अगस्त, 2008 को इसके संपादक बने थे. पिछले साल 28 मई के अंक में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का यशोगान करते हुए शर्मा ने लिखा था, ‘‘नरेंद्र मोदी के स्वच्छ, जनसेवी व विकासमान प्रशासन ने देश के सामने गुजरात को विकास मॉडल के रुप में खड़ा कर अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी प्रतिष्ठा दिलाई है...गुजरात तो एक प्रयोग भूमि है, देश की नयी तस्वीर गढऩा अभी शेष है.’’
माना जा रहा है कि मोदी की यह तारीफ संघ में मोदी विरोधियों के गले नहीं उतरी और शर्मा के अनुबंध को आगे न बढ़ाने का मानस बनाया जाने लगा. संघ के सभी प्रकाशनों की निगरानी करने वाले मनमोहन वैद्य के मोदी से असहज रिश्ते जगजाहिर हैं. और मोदी की ओर शर्मा का रुझान उनके संपादकीयों से साफ झलक रहा था. गुजरात विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत को पाञ्चजन्य ने 22 दिसंबर, 2012 के अंक में राष्ट्रवादी राजनीति की जीत बताया और सारा श्रेय मोदी को दिया. संपादकीय में, जीत के बाद दिए गए मोदी के भाषण की भी जमकर तारीफ की गई और 5 जनवरी के अंक में लोकायुक्त मामले को मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार करार दिया गया.
सूत्रों के मुताबिक, मई 2012 में इस मुखपत्र में लिखे शर्मा के एक आलेख के बाद जब उन्हें सेवा विस्तार न देने की हलचल हुई तो उन्होंने भी संघ में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया. उन्हें छह महीने का विस्तार मिला. यह अवधि इसी 13 फरवरी को खत्म हो रही थी. पर एक्सटेंशन न मिलता देख उन्होंने पहले ही इस्तीफा दे दिया. इस मामले में शर्मा कुछ भी कहने से इनकार करते हैं.
पर विजय कुमार कहते हैं, ‘‘समय पर परिवर्तन होते हैं. बलदेव भाई का कार्यकाल पूर्ण हो गया.’’ वे युवा प्रोफेशनल को कमान सौंपने की संघ की नई सोच के बारे में कहते हैं, ‘‘जो चुनौतियां सभी मीडिया हाउस के सामने हैं, वही हमारे सामने हैं. इसी संदर्भ में बोर्ड ने बदलाव का फैसला किया.’’ हालांकि प्रसार संख्या में आई कमी भी बदलाव की वजह रही है.
संघ ने नए संपादक हितेश शंकर के साथ पांच साल का अनुबंध किया है. हाल तक वे एक हिंदी दैनिक में डिप्टी न्यूज एडिटर थे. संघ नेताओं की दलील है कि अब संघ आधुनिक दौर के साथ कदमताल करना चाहता है और इसी रणनीति के तहत उसने अपने सभी प्रकाशनों में पेशेवर लोगों की भर्ती करने का फैसला किया है.
जल्द ही अंग्रेजी साप्ताहिक आर्गनाइजर में भी बदलाव की संभावना है. संघ के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, ‘संघ ने अपने सभी प्रकाशनों को साफ कर दिया है कि वे विचारधारा के साथ छेड़छाड़ किए बिना आधुनिक जमाने के हिसाब से उसे आगे बढ़ाएं. यह कैसे होगा, इसे युवा प्रोफेशनल्स को ही तय करना है. इसमें नाकाम रहने वालों को हटाने में संघ हिचकेगा नहीं.’
संघ ने कुछ विशेषज्ञों को जोड़कर पाञ्चजन्य का एक मजबूत संपादक मंडल भी गठित किया हैं.

