जाट आरक्षण पर आपकी क्या राय है?
राजकुमार सैनी: किसी आयोग ने जाटों को पिछड़ा नहीं माना. आज 45 फीसदी क्लास वन, टू के पदों पर जाट हैं और अब क्लास-थ्री में ओबीसी को मिल रहे 27 फीसदी आरक्षण में असंवैधानिक तरीके से घुसने के लिए लालायित हैं. सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक आदेश को रद्द कर दिया. लेकिन केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका दी है, उससे ओबीसी में भारी आक्रोश है. ओबीसी के लोग अर्धनग्न अवस्था में जंतर मंतर पर जाट आरक्षण का विरोध करने और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करने के लिए शांतिपूर्वक धरना देंगे.
संजीव बालियान: मंडल कमिशन ने जब गुर्जर, यादव, जाट को एक श्रेणी में माना था, तब जाटों ने अपने अहं की वजह से ओबीसी में जाना शान के खिलाफ समझा इसलिए किसी ने इस समुदाय की पैरवी नहीं की. चौधरी चरण सिंह कभी नहीं चाहते थे कि जाट आरक्षण की श्रेणी में शामिल हों. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने दिल्ली में बैठकर ही रिपोर्ट बना दी, जमीन पर जाकर सर्वे नहीं किया और विरोध में अपनी रिपोर्ट दे दी. लेकिन यूपीए सरकार ने आखिरी समय में जाट आरक्षण की अधिसूचना जारी कर दी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया. अब हमारी सरकार ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है.
सामाजिक सौहार्द बिगड़ा तो?
सैनी: हम अपनी आवाज बुलंद करेंगे. कोई लठ की लड़ाई नहीं होगी. जाटों ने आरक्षण को लेकर सामाजिक सौहार्द तो बिगाड़ ही दिया है, वे अपने भीतर झांक कर देखें क्या वे गरीब हैं? इनको आरक्षण देना है तो बेहतर होगा कि सारे आरक्षण को खत्म कर बीपीएल कार्ड धारकों को दिया जाए जो इसके वास्तविक हकदार हैं और सभी जातियों में हैं.
बालियान: जाटों को आरक्षण पहले ही मिल जाना चाहिए था. देरी से मिला और बहुत जल्दी छीन लिया गया, जाटों को न्याय मिलना चाहिए. उनके पास जमीन पर अब काम नहीं है, पर इस समाज को मिलने वाले अधिकारों को कुछ लोग सामाजिक वैमनस्यता फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि मोदी सरकार की मंशा इसको लेकर स्पष्ट है कि जाटों को आरक्षण मिलना चाहिए.
मोदी सरकार ने आरक्षण के हक में कदम बढाया, फिर विरोध क्यों?
सैनी: सरकार ने सिफारिश करके याचिका नहीं दी है, कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार ने काम किया है. लेकिन जाटों का लोकतंत्र में विश्वास ही नहीं है. लठतंत्र में भरोसा करते हैं. वे समाज में जात-पांत का जहर घोल रहे हैं. सवा पैंतीस बिरादरी ने हमें समर्थन का फैसला किया है. हमारा मानना था कि सभी जातियों की जातिगत गणना हो जाए और जिसकी जितनी संख्या, उतना हक मिल जाए. जाटों को घाटा लग रहा है तो इनकी गिनती हो जाए और सरकार में नौकरी वालों की गिनती हो जाए. अगर ज्यादा हैं तो निकाल दिए जाएं और कम हैं तो ले लें.
बालियान: देखिए, विरोध करने वाले चुनिंदा लोग हैं. वे क्यों ऐसा कर रहे हैं पता नहीं, हमारी सरकार ने पिछली सरकार के रुख को न्यायोचित माना है, लेकिन अब यह तय है कि जाटों को आरक्षण मिलेगा, लेकिन रास्ता क्या होगा, सिर्फ यही तय करना है.
कहां तक जाएंगे आरक्षण को लेकर?
सैनी: अगर जाटों को ओबीसी कोटे में आरक्षण दिया जाता है तो हम इस अन्याय के खिलाफ कानूनी तौर पर लड़ेंगे. संसद में मैं लड़ूंगा, विधानसभाओं में विधायक और गलियों में हमारे ओबीसी के लोग हैं, वे लड़ेंगे. जब आदमी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसके दो परिणाम निकलते हैं. एक बहुत अच्छा और दूसरा घातक. मुझे न अच्छे की परवाह है, न बुरे की. बीजेपी का एजेंडा ही नहीं है जाटों को आरक्षण देना, हमने कभी नहीं कहा.
बालियान: जाट समुदाय दिल्ली के चारों तरफ फैला हुआ है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि जाट राजनैतिक रूप से संगठित कौम है और उन्हें आरक्षण नहीं मिलना चाहिए, समझ से परे और दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है. राजनैतिक और कानूनी तरीके से जो भी उचित होगा, कदम उठाया जाएगा. हमारा मानना है कि जब 1934 के आंकड़ों पर 1993 में आरक्षण मिल सकता है तो जाटों को पिछले आंकड़ों के आधार पर क्यों नहीं आरक्षण मिलना चाहिए.
बीजेपी में ही अंतर्विरोध क्यों हैं?
सैनी: जाटों ने अपनी बातें कही है, मैं अपनी कह रहा हूं. यह एक चायवाले से पीएम तक पहुंचने वाले की पार्टी है जिन्होंने वाकई गरीबी देखी है. इस पार्टी में हर कोई अपनी बात रखने का हकदार है. जब जाटों ने कहा कि कौन होता है सुप्रीम कोर्ट आरक्षण पर फैसला करने वाला तो यह पार्टी का अंदरूनी मामला नहीं रह जाता. जिन लोगों को संविधान और न्यायपालिका का ख्याल नहीं, उनसे क्या कहना.
बालियान: ऐसा कोई विरोध नहीं है. कुछ लोग आवाज उठा रहे हैं लेकिन मेरा कहना है कि बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी को मर्यादा में रहकर यह बात पार्टी फोरम पर उठानी चाहिए थी.
जाटों ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ दिया: राजकुमार सैनी
जाट आरक्षण का मुद्दा सामुदायिक टकराव की ओर बढ़ा. ओबीसी के विरोध की अगुआई कर रहे बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी और आरक्षण के हिमायती केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान के साथ इंडिया टुडे की बातचीत.

अपडेटेड 5 मई , 2015
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