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ईगेम्स : तो गाड़िए अब गेमिंग में झंडा

इन दिनों हजारों भारतीय युवा प्रतिस्पर्धी ई-स्पोर्ट्स की लुभावनी आवाज पर निसार हो उठे हैं

चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज में बीए के छात्र चरणजोत सिंह 2018 से कॉम्पीटीटिव गेम खेल रहे हैं
चंडीगढ़ के एसडी कॉलेज में बीए के छात्र चरणजोत सिंह 2018 से कॉम्पीटीटिव गेम खेल रहे हैं
अपडेटेड 2 सितंबर , 2023

मयंक प्रजापति जब भी अपने दो साल के बेटे के डायपर नहीं बदल रहे होते हैं, तो लड़ाई वाले वीडियो गेम स्ट्रीट फाइटर V में पैर तोड़ने और सिर फोड़ने में मशगूल होते हैं. इसमें दो खिलाड़ी विरोधी को मात देने के लिए कई विशेष तकनीकों और 'कैरेक्टर’ का इस्तेमाल करते हैं. प्रजापति फ्रीलांस आर्किटेक्ट, घर संभालने वाले पिता और जुनूनी प्रतिस्पर्धी गेमर हैं. वे कैसे इन कामों में संतुलन बनाए रखते हैं, ''यह बहुत मुश्किल है...मुझे बिल्कुल भी नींद नहीं आती.’’ वे जुनूनी भारतीय ईस्पोर्ट्स-प्रतिस्पर्धी वीडियो गेमिंग के बढ़ते समूहों में शामिल हैं. इन समूहों के लोग ऑनलाइन और घर बैठे एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं. दो दशकों तक स्ट्रीट फाइटर खेलने और भारत में कई टूर्नामेंट जीतने वाले 32 वर्षीय प्रजापति को अपने सबसे खुशनुमा पल का इंतजार है. वे चीन के हांगझू के एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जहां पहली बार ईस्पोर्ट्स का पदक स्पर्धा श्रेणी में शुमार किया गया है. इससे प्रजापति 'ईस्पोर्ट्स एथलीट’ कहलाने के भी हकदार हो गए हैं. उन्हीं के शब्दों में, ''यह कहना बड़ा सुकून देता है कि वीडियो गेम खेलते हैं और भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. लोग यकीन ही नहीं करते.’’

प्रजापति उस 15 सदस्यीय भारतीय दल का हिस्सा हैं जो 23 सितंबर से 8 अक्तूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में सात वीडियो गेम स्पर्धाओं में से चार में हिस्सा लेगा. इसमें स्ट्रीट फाइटर के अलावा, फीफा, डोटा 2, लीग ऑफ लीजेंड्स, एरीना ऑफ वेलोर, ड्रीम थ्री किंगडम्स 2 और पबजी मोबाइल हैं. ये गेम विभिन्न श्रेणियों/शैलियों जैसे 'मल्टीप्लेयर ऑनलाइन बैटल एरीना’ या मोबा (लीग ऑफ लीजेंड्स, डोटा 2, एरीना ऑफ वेलोर), खेल-आधारित (फीफा), या 'बैटल रॉयल’ (पबजी) का विस्तृत रूप हैं. दूसरे खेलों की तरह इनमें भी विशेष हुनर की जरूरत होती है. आयु वर्ग के लिहाज से देखें तो सभी पुरुष ईस्पोर्ट्स दल की उम्र 19 से 32 वर्ष के बीच है. भारत एरीना ऑफ वेलोर और पबजी मोबाइल के खिलाड़ियों को नहीं भेज सकता क्योंकि ये सितंबर 2020 से भारत में उपलब्ध नहीं हैं. केंद्र सरकार ने 115 चीनी ऐप्स के साथ उन पर प्रतिबंध लगा दिया था. अब तक उनकी छवि एक बेहद छोटे, मजबूती से आपस में गुंथे-बिंधे-से ऑनलाइन समुदाय की रही है, जिसके लोग अंधेरे कमरों में कंप्यूटर में घंटों खोए रहते हैं, लेकिन गेमिंग अब मुख्यधारा का हिस्सा है.

देश में मीडिया और मनोरंजन उद्योग पर फिक्की-ईवाइ (फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री-अर्न्स्ट ऐंड यंग) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में गेमर्स की संख्या 6,00,000 से बढ़कर 2022 में दस लाख हो गई. 2023 में इसमें 15 लाख और गेमर्स के आ जुड़ने की उम्मीद है. मार्केट रिसर्च फर्म निको पार्टनर्स की 2022 इंडिया गेम्स मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेमिंग बाजार है. ईस्पोर्ट्स और कैजुअल गेमिंग सेग्मेंट का कारोबार 2021 में 2,600 करोड़ रुपए से बढ़कर 2022 में 3,100 करोड़ रुपए हो गया. चाहे क्लैश ऑफ क्लैन्स हो या कैंडी क्रश सागा, देश में करीब 50 फीसद इंटरनेट यूजर किसी न किसी रूप में गेम से जुड़े हुए हैं.

इस बढ़ते बाजार में हांगझू जा रही लीग ऑफ लीजेंड्स (या एलओएल) टीम के कप्तान अक्षज शेनॉय जैसे पेशेवर खिलाड़ी शामिल हैं. शेनॉय का सफर नौ साल की उम्र में कोच्चि में परिवार में एक साझा कंप्यूटर पर शुरू हुआ. जल्द ही, उन्हें एलओएल में दिलचस्पी पैदा हो गई. 17 साल की उम्र में शेनॉय ने अपने मां-बाप को गेमिंग लैपटॉप ले देने को मना लिया. 2020 के अंत तक उन्होंने टीम बनाने के लिए प्रतिभाशाली एलओएल खिलाड़ियों की तलाश शुरू की. शेनॉय बड़े फख्र के साथ कहते हैं, ''तब से किसी दक्षिण एशियाई टीम से नहीं हारे हैं.’’

यह महज मनबहलाव का मामला नहीं

शेनॉय की चाहत तो गेमिंग में करियर बनाने की है लेकिन वे बेंगलूरू के सेंट जोसफ कॉलेज से ट्रिपल डिग्री भी हासिल कर रहे हैं. 22 वर्षीय नौजवान का इरादा एमबीए की डिग्री हासिल करने का है और उन्हें उम्मीद है कि किसी गेमिंग कंपनी के एचआर विभाग में काम मिल जाएगा. शेनॉय कहते हैं, ''भारत में इसे [गेमिंग के करियर के रूप में] संभव होने में वक्त लग सकता है.’’ हालांकि, कुछ लोग कामयाब भी हैं. नमन 'मॉर्टल’ माथुर, जोनाथन अमरल, स्काउटओपी (तन्मय सिंह) और मावी जैसे गेमर्स या गेमिंग क्रिएटर (यूट्यूब चैनल चलाने वाले गेमर्स) के लाखों फॉलोअर हैं. ये फॉलोअर उन्हें यूट्यूब चैनलों और टूर्नामेंटों में खेलते हुए लाइव देखते हैं. लेकिन शेनॉय के विपरीत, उनकी कामयाबी वेलोरेंट और बीजीएमआइ (बैटलग्राउंड मोबाइल इंडिया) जैसे 'शूटिंग गेम्स’ की वजह से है, जो एलओएल और डोटा 2 जैसे एमओबीए रणनीति गेम की तुलना में आसान है. गंभीर बीजीएमआइ एथलीट औसतन 1 से 15 लाख रुपए प्रति माह कमाते हैं. 5,00,000-10,00,000 से अधिक फॉलोअर वाले क्रिएटर प्रति माह 5 लाख रुपए तक कमा सकते हैं.

एशियाई खेलों में भाग लेने वाले सभी गेमर्स के लिए एक बात साझा है. शुरू में सभी को अपने मां-बाप को मनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. उन्हें यह समझाना मुश्किल था कि गेमिंग गंभीर मामला है, सिर्फ मनबहलाव का साधन नहीं. पेशेवर गेमर्स को घंटों कंप्यूटर में आंखें गड़ाए रहना पड़ता है, ताकि अपने हुनर को निखार सकें. गेमिंग को अक्सर लड़कों का शगल माना जाता है, जो कुछ दिनों की लत होती है. कुछ लोग गेमिंग को खेल मानने से भी कतराते हैं. हांगझू जाने वाली डोटा 2 टीम के कप्तान दर्शन बाटा इससे असहमत हैं. इस 29 वर्षीय नौजवान का कहना है, ''मैं इसकी [डोटा और एलओएल] तुलना शतरंज से करता हूं क्योंकि आप अगली चाल के बारे में रणनीति बना रह होते हैं. हर खेल अलग है. इसमें 120 से अधिक कैरेक्टर हैं; हरेक के अलग-अलग मंत्र और शक्तियां हैं जिन्हें आपको याद रखना होता है.’’ उनका कहना है कि ईस्पोर्ट्स में मानसिक शक्ति और धैर्य शारीरिक क्षमता से अधिक मायने रखता है. इसे बकवास बताने वालों को बाटा सलाह देते हैं, ''वे एक बार खेल के देखें तो उन्हें पता चल जाएगा कि यह इतना आसान नहीं है. बहुत मशक्कत की जरूरत है.’’

पीसी (पर्सनल कंप्यूटर) गेमर्स के रूप में शेनॉय और बाटा जैसे भारत में ऑनलाइन गेमिंग समुदाय की छोटी बिरादरी है. कम डेटा खर्च के साथ भारत मोबाइल-फर्स्ट गेमिंग बाजार है, जिसका इसकी कुल कमाई में 85 फीसद हिस्सा है. अनिमेष अग्रवाल उर्फ 8बिट ठग एस8यूएल ईस्पोर्ट्स के सह-संस्थापक और मोर्टल जैसे गेमर्स की प्रतिनिधि संस्था 8बिट क्रिएटिव्ज के संस्थापक तथा सीईओ हैं. वे कहते हैं कि किफायती स्मार्टफोन और बेहतरीन इंटरनेट उपलब्धता से गेमर्स के लिए ईस्पोर्ट्स और कंटेंट क्रिएशन कमाई के अवसर बढ़ गए हैं. दूसरी ओर, गेमिंग पीसी और लैपटॉप की कीमत 1 लाख रुपए है. इसकी किफायती कीमतें 50,000 रुपए के आसपास भी हैं. बाटा का कहना है, ''प्रायोजक दर्शकों की संख्या देखते हैं और मोबा गेम्स भारत में लोकप्रिय नहीं हैं. (डोटा जैसे) किसी गेम को समझने के लिए आपको लंबे समय तक खेलना होगा.’’ कम टूर्नामेंट होने का मतलब है कम खिलाड़ी. इसी के चलते मोबा गेमर्स की बिरादरी छोटी-सी मानी जाती है.

इसके बावजूद ईस्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएसएफआइ) पूरी तैयारी कर रहा है कि एशियाई खेलों में भारत की टीम पूरे दमखम से उतरे. बाटा और डोटा 2 टीम ने अपने चार साथियों के लिए कोच-सह-मनोवैज्ञानिक-सह-विश्लेषक भी रखे हैं. आखिरकार डोटा गेम में ही पिछले साल बर्मिंघम में प्रारंभिक कॉमनवेल्थ ईस्पोर्ट्स चैंपियनशिप में भारत को कांस्य पदक मिले थे. इसके अलावा, ईएसएफआइ ने एथलीटों को माउस और कीबोर्ड उपलब्ध कराने के लिए कंप्यूटर उपकरण वितरक हामा के साथ करार किया है. बाटा अपने शेयर बाजार कारोबार के बाद रोज चार से छह घंटे तैयारी करते हैं. वे कहते हैं, ''मोबाइल गेमर्स ने भारत में जगह बना ली है लेकिन पीसी गेमिंग को अभी भी लंबा रास्ता तय करना है.’’

पश्चिम बंगाल के बीरनगर के स्ट्रीट फाइटर गेमर अयान बिस्वास को उम्मीद है कि एशियाई खेल उस अंतर को पाटने में मददगार हो सकते हैं. बीरनगर जैसे छोटे शहर में बिस्वास का पेशेवर गेमर के रूप में उभरना कुछ विरोधाभास जैसा लगता है, लेकिन देश के लिए खेलना उन्हें मान्यता दिला रहा है. बिस्वास हंसकर कहते हैं, ''यह बदलाव चौंकाने वाला है. मसलन, पहले कहा गया 'गेमिंग से क्या हासिल करोगे?’ फिर कहा गया 'गेम क्यों नहीं खेलते, एशियाई खेलों में जाना है.’’’ वे खेल के लिए पहली बार विदेश यात्रा को लेकर खासे उत्साहित हैं. डाक विभाग में काम करने वाले इस 24 वर्षीय नौजवान ने कहा, ''ईस्पोर्ट्स के बारे में अभी भी ज्यादा जानकारी नहीं है. मुझे उम्मीद है कि लोग एशियाई खेलों में इसका सीधा प्रसारण देखेंगे तो इसमें बदलाव आएगा. अगर अच्छा प्रदर्शन करता हूं तो मुझे स्पांसरशिप मिलने की संभावना बन सकती है.’’

चंडीगढ़ के 20 वर्षीय चरणजोत सिंह भारत के फुटबॉल सिमुलेशन वीडियो गेम फीफा के शीर्ष एथलीट हैं और खेलों में इसके दो प्रतिनिधियों में से एक हैं. बिस्वास के विपरीत, एसडी कॉलेज के इस बीए छात्र ने 2023 में लंदन, रियाद, मलेशिया और दक्षिण कोरिया में चार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लिया है.
भारतीय गेमर 2021 से फीफा वैश्विक सीरीज टूर्नामेंट में खेलने के योग्य बने. चरणजोत विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं. 15 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला टूर्नामेंट-फीफा अल्टीमेट चैंपियनशिप-जीता, जिसे उन्होंने पहली बार खेला था. तब उनके पास कोई गेमिंग कंसोल भी नहीं था. लेकिन प्ले स्टेशन 4 और बाद में 5 हासिल करने के बाद वे आगे ही बढ़ते गए. वे दो बार ईएसएल इंडिया प्रीमियरशिप और एआइएफएफ ई-फुटबॉल चैलेंज, ईस्पोर्ट्स प्रीमियरशिप इंडिया तथा नोस्ट्रा गेमिंग स्पर्धाएं जीत चुके हैं.

बिस्वास और बाटा जैसे एशियाई खेलों में जाने वाले दूसरे एथलीटों के उलट, चरणजोत को ऐसा गेम खेलने का फायदा है जिसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता उन्हें अधिक मौके और बड़ा पुरस्कार पूल उपलब्ध करा सकती है. उनको फुटबॉल देखना (वे चेल्सी फैन हैं) और खेलना पसंद है, लेकिन कंसोल पर उनका हुनर फुटबॉल के मैदान से कहीं अधिक है. वे कहते हैं, ''यह बहुत तेज रफ्तार गेम है. आपको अच्छी जानकारी और हमेशा चौकन्ना रहने की जरूरत है. हर साल फीफा का नया संस्करण आ जाता है, इसलिए लगातार उसमें पारंगत होना होता है.’’ चरणजोत के हुनर से देश को फीफा ईस्पोर्ट्स में छठी रैंक हासिल हुई है. उन्होंने हाल ही में दक्षिण एशिया सीडिंग स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया और 19वें एशियाई खेलों के लिए पक्की सीडिंग की गारंटी कर ली. क्या एशियाई खेलों में भारत की अच्छी संभावनाओं की कल्पना करनी चाहिए? वे कहते हैं, ''जाहिर है, लेकिन कुछ भी हो सकता है. हम खुद को तो नहीं पछाड़ सकते.’’

पर हकीकत क्या है

भारतीय टीम का हर ईस्पोर्ट्स एथलीट गेमिंग में पूर्णकालिक करियर की उम्मीद नहीं करता. बर्मिंघम में कांस्य विजेता डोटा टीम के प्रमुख सदस्य सोलापुर के शुभम गोली को लगता है कि अब नौकरी करने का समय आ गया है. इस 25 वर्षीय नौजवान का कहना है, ''भारत में मेरे हुनर में इजाफे के लिए पर्याप्त डोटा टीमें नहीं हैं. अगर मैं बताऊं कि गेमिंग में कितना समय लगाता हूं तो कोई भी कंपनी मुझे नौकरी पर क्यों रखेगी?’’ फिलहाल पुणे से एडवांस्ड कंप्यूटिंग में डिप्लोमा कर रहे गोली अपनी परीक्षाओं और एशियाई खेलों दोनों की तैयारी कर रहे हैं.
 

अनिमेष यहां एक युक्ति सुझाते हैं. उनकी राय में, भारतीय गेमिंग से होनहार प्रतिभाएं बाहर न जाएं, इसके लिए जरूरी है कि टूर्नामेंट और इवेंट के 'पब्लिशर’ (गेम की मार्केटिंग या 'पब्लिश’ करने वाली कंपनियां), ब्रांड सहयोगी अधिक निवेश करें और अलग गेमिंग सर्वर का विकास करें. वे बताते हैं कि पीसी गेम्स भारत में मोबाइल गेम्स से पीछे हैं, लेकिन वेलोरेंट जैसा पीसी गेमिंग टाइटल अपने पब्लिशर रॉयट गेम्स की कोशिशों से फला-फूला है. अग्रवाल कहते हैं, ''रॉयट और क्राफ्टन जैसे पब्लिशर ने ईस्पोर्ट्स और दूसरे संबंधित उद्योगों के साथ करार किया है. [एलओएल, डोटा और स्ट्रीट फाइटर के] पब्लिशरों को एक टिकाऊ मॉडल तैयार करने पर ध्यान लगाना चाहिए, जिससे भारत में खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिल सके.’’ अगर पीसी गेमिंग में ज्यादा टूर्नामेंट और निवेश होंगे तो दर्शकों की संख्या बढ़ेगी, जिससे पूरे ईस्पोर्ट्स का परिदृश्य बदलेगा.

फिलहाल तो एशियाई खेल के लिए ईस्पोर्ट्स टोली मौके को पूरी तरह से भुनाने को उत्सुक है. चीनी ताइपे के स्ट्रीट फाइटर स्टार गेमर बी और जापान के मार्गो का सामना करने की संभावना से प्रजापति किसी फैनबॉय की तरह उत्तेजित हैं. वे कहते हैं, ''मेरे पास उनसे निबटने की रणनीतियां हैं...मैं उनकी चाल जानता हूं. वे मेरे बारे में कुछ नहीं जानते, इसलिए मैं छुपा रुस्तम हूं.’’ खेल में आप कभी भी किसी छुपे रुस्तम को नजरअंदाज नहीं कर सकते, चाहे खेल वीडियो गेम ही क्यों न हो.

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