वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में फाइनल बाउट से पहले क्या चल रहा था आपके दिमाग में?
फाइनल बाउट से पहले मैं थोड़ा परेशान और नर्वस थी. पर मैंने खुद को शांत और एकाग्र बनाए रखा. भावनाओं को मैंने खुद पर हावी नहीं होने दिया. इसका श्रेय मैं अपने कोच, सपोर्ट स्टाफ, अपने प्रायोजकों और सबसे बढ़कर अपने परिवार को दूंगी. उन्होंने उस वक्त मुझ पर भरोसा किया जब बाकियों ने मुझे चुका हुआ मान लिया था.
आपके ही भार वर्ग में एमसी मैरीकॉम सीनियर बॉक्सर हैं और कई मौकों पर वे आपकी चैलेंजर रही हैं. उनसे आपने कोई सबक सीखा है?
वे मेरी आइडियल हैं. यह सच तो बदलने वाला नहीं. उनसे मैंने जो सबसे अहम चीज सीखी थी अपने भीतर और बड़ा लक्ष्य पाने की भूख पैदा करना और जो हमारे पास पहले से है उसी पर संतोष करके न बैठ जाना.
भारत में एक मुसलमान महिला बॉक्सर होने के क्या मायने हैं?
शुरू में इससे काफी मुसीबतें आईं. लोग तमाम उल्टे-सीधे कटाक्ष करते रहते थे. यहां तक कि परिवार वालों को भी समाज से बुरा-भला सुनना पड़ा. लोग कहते कि 'अपनी लड़की को बॉक्सिंग में क्यों डाल दिया?’ हम उनकी अनदेखी करके खुद पर ही ध्यान देते.
2011 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन का ताज और इस महीने वर्ल्ड चैंपियन का खिताब, रिंग पिछले 10 साल के सफर को आप किस तरह से देखती हैं?
बहुत शानदार सफर रहा. जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतना मेरे लिए बड़ी बात थी. इससे मुझे भरोसा हुआ कि मैं बॉक्सिंग में करिअर बना सकती हूं. पर कंधे में चोट की वजह से जब करीब मुझे डेढ़ साल रिंग से बाहर रहना पड़ा तो लोगों ने सोचा कि बॉक्सिंग का मेरा सफर पूरा हो गया.
मैंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और वापसी के लिए कड़ी मेहनत की. मैंने एक के बाद दूसरा जीता कि तभी 2020 में लॉकडाउन लग गया. उस दौरान ट्रेनिंग और खुद को फिट बनाए रखना बहुत मुश्किल हो गया. आखिरकार 2022 में मेरी शुरुआत अच्छी रही—स्त्रैंजा मेमोरियल में मैंने गोल्ड जीता और अब मैं वर्ल्ड चैंपियन हूं.
—शैल देसाई

