संस्मरणों की अपनी नई किताब एक्चुअली आइ मेट देम में निर्देशक, कवि और गीतकार गुलज़ार ने सिनेमा, संगीत और साहित्य के कई दिग्गजों को याद किया है
● इस किताब का उनवान (शीर्षक) किस तरह से तय किया आपने?
उनवान पर हमारे डिस्कशन के दौरान 'मेरी जर्नी’ बार-बार सामने आता, संस्मरणों के अमूमन जो इस्तेमाल होता है. मुझे तो अब भी इस सच पर हैरत होती है कि मैंने बिमल रॉय, पंडित रविशंकर, उत्तम कुमार या महाश्वेता देवी जैसी शख्सियतों के साथ काम किया है.
ये सारे महान लोग हैं, उनके साथ काम करते हुए मैंने सीखा बहुत. तभी मैंने सोचा, एक्चुअली...आइ मेट देम एक उम्दा उनवान होगा क्योंकि लोग शायद यकीन ही न करें कि मैंने इन सभी के साथ काम किया या कि मिला भी था.
● किताब में आप दर्जन भर से ज्यादा महान शख्सियतों से मुलाकातों के अनुभव साझा करते हैं मसलन सत्यजीत रे, किशोर कुमार, सुचित्रा सेन...
दरअसल, इन 18 लोगों के बारे में बात करने का अनुभव मेरे लिए इतना मजेदार था कि मैंने इसी तरह से कुछ और लोगों पर किताब लिखने की सोची थी. पर वह मुमकिन न हुआ. ऐसे कुछ लोगों पर मेरी कविताएं हैं और मुझे उम्मीद है कि वे एक दिन छपकर आएंगी.
● क्या ऐसे भी कुछ नाम हैं जिनके साथ आप काम करना चाहते थे पर कर नहीं पाए?
कई सारे हैं. मैं गुरुदत्त के साथ काम करना चाहता था. वे उसी दौरान फिल्में बना रहे थे जिन दिनों मैं बिमल रॉय के सहायक के रूप में काम कर रहा था. मेरी इच्छा थी कि उन्हें भी असिस्ट करूं. मेरी अपनी पीढ़ी में मैं श्याम बेनेगल के साथ काम करने का बड़ा इच्छुक था.
● मैंने सुना है कि आप कोविड से संबंधित किसी प्रोजेक्ट पर भी किसी तरह का काम कर रहे थे.
पिछले दो साल खासे परेशान करने वाले थे. लॉकडाउन के दौरान शुरू के कुछेक महीने तो मैंने बीते दिनों में हुए पढ़ने के अपने नुक्सान की भरपाई की, पर उस बीच नियमित लिख भी रहा था. जिंदगी और आसपास के लोगों से आपको जुड़ना ही होता है.
देश और दुनिया में हो रही घटनाओं से भी मैं राब्ता बनाए हुए था. उस दौरान मैंने जो अनुभव किया और देखा-जाना, उन पर लिखा. इस सारे पद्य और गद्य को इकट्ठा कर साल-छह महीने में मैं इनकी एक पतली-सी किताब छपवाऊंगा.
—करिश्मा उपाध्याय

