इस साल अगस्त का महीना गेम और ई-स्पोर्ट्स के शौकीनों को सम्मान और पहचान दिलाने वाला रहा. गुजरात में भुज के तीर्थ मेहता ने एशियाई खेल 2018 के ई-स्पोर्ट्स प्रदर्शन टूर्नामेंट में कांस्य पदक हासिल किया. तीर्थ मेहता, जीसीटीतीर्थ, के नाम से जाने जाते हैं. उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मक गेमिंग की शुरुआत, डोटा, के साथ की थी. उसके बाद अच्छे इंटरनेट कनेक्शन के अभाव के कारण उन्होंने स्टारक्राफ्ट पर हाथ आजमाया और फिर हार्थस्टोन पर गेमिंग करने लगे जिसमें रणनीति पर ज्यादा जोर होता है और बटन दबाने पर कम.
तभी से वे एक सक्रिय ई-स्पोर्ट्स गेमर हो चुके हैं और रातों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं और साथ ही साइंस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में डिग्री कोर्स करते हुए गेमप्ले प्रोग्रामर के तौर पर अपने कौशल को निखारते रहते हैं. यह बात कुछ लोगों के लिए समझ से परे हो सकती है कि जिस गतिविधि को बच्चों की नई पीढ़ी के दृष्टिदोष के लिए जिम्मेदार माना जाता था, वह अब एक अंतरराष्ट्रीय खेल का रूप ले चुकी है.
एशियाई खेलों में भारत को मिला कांस्य पदक संकेत है कि देश में ई-स्पोर्ट्स का दौर आ रहा है. ई-स्पोर्ट्स के एथलीट जैसे कि एएफके गेमिंग के अखिल गुप्ता बताते हैं कि वास्तविक तौर पर इसकी प्रतियोगिता 2014-15 में शुरू हुई. छोटे स्तर पर गैर-पेशेवर रूप में इसकी प्रतियोगिता फीफा, काउंटर स्ट्राइक, स्ट्रीट फाइटर और स्टार क्राफ्ट के समय से ही लोकप्रिय हो गई थी.
लेकिन पुरस्कार राशि के साथ गेमिंग की शुरुआत ई-स्पोर्ट्स लीग के प्रवेश और फ्लिपकार्ट और इंडियन गेमिंग लीग की ओर से आयोजित टूर्नामेंटों के साथ 2016 में हुई. अब इसके साथ बड़ी रकम जुड़ गई है. सबसे बड़ा भारतीय टूर्नामेंट ईएसएल प्रीमियरशिप 1 करोड़ रु. की पुरस्कार राशि देता है.
टीम जुग्स ऑन यू के ईस्पोर्ट्स एथलीट साहिल विरादिया (उर्फ माइक्रो) कहते हैं कि गेमिंग में उलझे रहना अब समय की बर्बादी नहीं है. वे कहते हैं, "एक समय ऐसा आया जब शौकिया गेम खेलने वालों को लगा कि वे इसमें कैरियर भी बना सकते हैं.''
विरादिया, डोटा, (जिसे कभी डिफेंस ऑफ द ऐंशियंट्स के तौर पर जाना जाता था) के टूर्नामेंटों में खेलते हैं. वे बताते हैं, "ईएसएल इंडिया प्रीमियरशिप इस सूची में सबसे ऊपर है जिसमें साल में तीन सीजन होते हैं और सबसे बड़ी पुरस्कार राशि होती है.'' भारत के पास इस समय संगठित टीमों का एक बेहतरीन ढांचा है. एएफके गेमिंग के शौनाक सेनगुप्ता (उर्फ गेमबिट) बताते हैं कि खिलाड़ी शौकिया, अर्ध-पेशेवर और पेशेवर स्तरों पर टूर्नामेंटों में हिस्सा लेते हैं.
सेनगुप्ता कहते हैं, "अर्ध-पेशवर टीमों के पास टूर्नामेंटों के दौरान यात्रा और रहने आदि के खर्च के लिए पर्याप्त सहयोग का अभाव होता है. ये टीमें अक्सर इंटरनेट कैफे में जमा होकर अभ्यास करती हैं. पेशेवर टीमों को एक अलग से बूट कैंप की जरूरत होगी, जहां वे बड़े टूर्नामेंटों से पहले अभ्यास कर सकें.'' इन बूट कैंपों में पेशेवर ई-स्पोर्ट्स गेमरों को फाइनल टूर्नामेंट के लिए प्रैक्टिस के समय एक टीम के रूप में अभ्यास करते हुए खर्च के लिए पैसा, कमरा और बोर्ड मिलता है.''
डोटा की टीम में, कैरीज़, "सपोर्ट्स'' "न्यूकर्स'' और दूसरे विशेषज्ञ होते हैं. मसलन, न्यूकर दुश्मनों को मारने के लिए भारी नुक्सान पहुंचाने वाले प्रहार का इस्तेमाल कर सकता है, जबकि जंगलर्स बड़े हमलों से होने वाली क्षति को झेल सकता है. सेनगुप्ता कहते हैं, "अक्सर टीमें बड़ी प्रतियोगिताओं से पहले दिन मंम 12 घंटे प्रशिक्षण लेती हैं और अभ्यास करती हैं.'' डोटा 2 और सीएसःजीओ जैसे गेम भारत में बहुत लोकप्रिय हैं और इनमें बहुत ज्यादा पैसा मिलता है.
एशियाई खेलों में ईस्पोर्ट्स को जगह मिलने के बाद अब ये एथलीट ओलंपिक खेलों में भी इसे शामिल किए जाने के बारे में क्या सोचते हैं. अगर शतरंज को जगह मिल सकती है तो डोटा को क्यों नहीं.
***

