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डार्क मोड

मुंबई का अपना देसी शरलॉक होम्स

मुंबई पुलिस के सबसे चहेते अफसर राकेश मारिया ने अपने सीनियर्स को पछाड़ कर हासिल किया मुंबई पुलिस कमिश्नर का पद. दशकभर से मारिया खासे चर्चित रहे हैं.

अपडेटेड 4 मार्च , 2014
मायानगरी मुंबई के नए पुलिस कमिश्नर (सीपी) राकेश मारिया के पुराने सहयोगी और आतंकवाद विरोधी टीम (एटीएस) के एसीपी संजय कदम कहते हैं, ‘‘आपने शरलॉक होम्स पढ़ा है? ये वही हैं.’’

सीबीआइ ने 1994 में डॉ. जलीस अंसारी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया था. ‘‘डॉक्टर बम ऑफ बॉम्बे’’ के नाम से कुख्यात अंसारी का मुंह खुलवाने में नाकाम रहने के बाद सीबीआइ ने क्राइम ब्रांच के युवा अफसर को बुलवाया, जो अपनी होशियारी की वजह से पहचान बना चुका था.

डीसीपी राकेश मारिया पूछताछ के लिए पहुंचे और आधे घंटे में ही अंसारी ने कबूल कर लिया कि उसने 1989 से 1994 के बीच गुरुद्वारों और पुलिस स्टेशनों पर 60 बम धमाके किए थे. सुकेतु मेहता की किताब मैक्सिमम सिटी के एकदम उलट मारिया ने उसे हाथ तक नहीं लगाया था. कदम के मुताबिक, ‘‘आप सख्तजान अपराधियों का मुंह मार-पीट से नहीं खुलवा सकते. मारिया बिल्कुल शरलॉक होम्स की तरह हैं. वे अपराधियों को बखूबी समझते हैं.’’

होम्स के प्रशंसक और पढऩे के शौकीन मारिया ने उपन्यास के अपराधियों की चालों को समझने में महारत हासिल कर ली है, चाहे वह रा का अल घुल हो या जेम्स बॉन्ड के सुपरविलेन; या फिर ज्याफ्री आर्चर से लेकर एड मैक्बेन तक. सड़कों पर सक्रिय रहने वाले इस पुलिस अफसर ने खुद को आसानी से उपलब्ध बनाकर अपना नेटवर्क  बनाया.

बताते हैं कि हर कांस्टेबल के पास उनका नंबर है, जो जरूरत पडऩे पर उन्हें कभी भी फोन कर सकता है. कभी तो वे अपना सेल फोन स्टाफ के पास ही छोड़ जाते हैं. वे अपने ओहदे को भुलाकर कांस्टेबल के साथ वॉलीबाल खेलते हैं. मारिया ने अपना एक खास तरह का आभामंडल तैयार कर रखा है.

ऐक्टर अनुपम खेर बताते हैं कि उन्होंने फिल्म अ वेडनसडे में उन्हीं की पर्सनेलिटी की नकल की थी. खेर कहते हैं, ‘‘मारिया की मौजूदगी में आपको लगता है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा.’’

मारिया मानते हैं कि पुलिस को सबके लिए उपलब्ध होना चाहिए और उससे कोई डरे नहीं. सड़क पर उसकी मौजूदगी का भी एहसास होना चाहिए. 15 फरवरी को पुलिस कमिश्नर बनने के बाद उन्होंने कहा कि बांद्रा में नंगे पांव फुटबाल खेलने वाले लड़के का ख्वाब सच हो गया. उनका फोकस अपराध रोकने और महिलाओं की सुरक्षा पर होगा. वे पुलिस को पूरी मुस्तैदी के साथ हर समय उपलब्ध रहने पर जोर देंगे.
राकेश मारिया पर बनी फिल्में
कमिश्नर बनते ही क्रॉफोर्ड मार्के ट में सीपी के दफ्तर में उन्हें बधाई देने के लिए हर तीन मिनट पर फूलों के बुके पहुंचने शुरू हो गए. कुछ पर भारत सरकार के चिन्ह वाले कार्ड लगे थे तो कुछ साधारण फूलों वाले बुके थे. उनके पास पहुंचाने से पहले एक कांस्टेबल हर बुके की जांच करता है. श्सीपी साहब्य ऑफिस में नहीं हैं, लेकिन उनके दफ्तर के बाहर मिलने वालों की लंबी लाइन लगी है, जो उनके ‘‘दरबार’’ लगाने के समय जुटने वाली भीड़ से कम नहीं है.

छह फुट से ज्यादा की उनकी कद-काठी पर पुलिस का यूनिफॉर्म खूब फबता है. उनकी नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर मंत्रालय में दिन भर की बैठकों से उनके चेहरे पर थकान का भाव है. उनके पूर्ववर्ती कमिश्नर सत्यपाल सिंह बीजेपी में शामिल हो गए हैं, वे कार्यभार सौंपने के लिए मौजूद नहीं थे. उनसे सीनियर दो अधिकारी जावेद अहमद और विजय कांबले उन्हें तरक्की दिए जाने के विरोध में इस्तीफा देने की धमकी दे चुके हैं. मारिया के पास अपने मातहत अधिकारियों के साथ शुरुआती बैठक के लिए भी समय नहीं है.

पुलिस इतिहासकार दीपक राव कहते हैं कि मुंबई में पुलिस कमिश्नर किसी राजा की तरह होता है. उनके शब्दों में, ‘‘आम आदमी भले ही मुख्यमंत्री का नाम न जानता हो, पुलिस कमिश्नर कौन है यह हर कोई जानता है. सड़क पर विवाद के समय कोई यह नहीं कहता है कि ‘‘मैं मंत्री के पास जाऊंगा, बल्कि कहता है, मैं सीपी के पास जाऊंगा.’’ इसकी शुरुआत 1857 में पहले पुलिस कमिश्नर चार्लस फोरजेट के समय हुई थी.’’

2014 में इस पद का हकदार 1981 बैच के इस लोकप्रिय आइपीएस अधिकारी के सिवाय और कोई नहीं हो सकता था. उनके बैच के अधिकारी और महाराष्ट्र में एडीजी (जेल) मीरन बोरवनकर उनकी तारीफ करते हैं, ‘‘हम जानते हैं कि राकेश जांच और पूछताछ करने में बेमिसाल हैं. उन्हें अपने काम से लगाव है. पुलिस अफसर और स्टाफ उन्हें चाहते हैं. वे आगे रहकर काम करते हैं.’’

मारिया ने अपनी यह प्रतिष्ठा तब से बना रखी है जब वे 1990 के दशक में डीसीपी (ट्रैफिक) थे. 1993 में सीपी ए.एस. सामरा ने उन्हें सीरियल बम धमाकों का केस सौंपा था. उन्हें यह जिम्मेदारी उनकी इस प्रतिष्ठा की वजह से दी गई थी कि वे जांच करने में काफी तेज थे. पुलिस को जानकारी मिली थी कि कई खाली पड़े वाहनों में बम रखे गए थे.

मारिया ने अपनी चतुराई का परिचय दिया. उनकी याददाश्त भी काबिलेतारीफ है. जब वे रेलवे में कमिश्नर थे तो उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीरियल बम धमाकों के मामले में 18 आरोपियों के नाम मुंहजुबानी ही बता दिए थे. उन्हें नाम की सूची देखने की जरूरत भी नहीं पड़ी.

मारिया ने संजय दत्त को उनके पिता सुनील दत्त के सामने अपना अपराध कबूल करवाया था. उन्होंने ऐक्ट्रेस मारिया सुसाइराज पर तभी संदेह जता दिया था, जब वे अपने प्रेमी नीरज ग्रोवर की गुमशुदगी की जांच की मांग लेकर आई थीं. उन्होंने प्रमुख पदों पर बैठे पुलिस अफसरों की मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल बनाने की शुरुआत की, ट्रैफिक विभाग में रहते हुए भी धमाकों के मामलों का पता लगाया. एटीएस प्रमुख रहते हुए उन्होंने ग्रामीण नक्सलवाद में शहरी रुचि की जांच की.

मारिया का जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जो कलानिकेतन प्रोडक्शंस का मालिक था. 58 वर्षीय मारिया को पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पसंद है. उनके पास संगीत का अच्छा-खासा संग्रह है. वे बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़ी हैं और राज्य की फुटबाल प्रतियोगिताओं में मुंबई पुलिस की ओर से खेलते रहे हैं. उनके दो बेटे कुणाल और कृश हैं. उनकी पत्नी प्रीति हाउसवाइफ हैं.

मारिया किसी राजनैतिक पार्टी के प्रति झुकाव नहीं रखते हैं. सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से उन्हें जावेद अहमद और विजय कांबली से ज्यादा तरजीह दी गई. वे दोनों अधिकारी कांग्रेस की पसंद थे. लेकिन मारिया के विरोधी भी हैं. सुकेतु मेहता ने अपने उपन्यास मैक्सिमम सिटी में उन्हें अजय लाल के नाम से एक ‘‘जालिम’’ अफसर के रूप में चित्रित किया था.

इसी तरह आइबी का दावा था कि मिर्जा हिमायत बेग को जर्मन बेकरी ब्लास्ट केस में क्राइम ब्रांच ने गलती से पकड़ा था, और विनीता काम्टे ने 26/11 हमले में अपने पति एसीपी अशोक काम्टे की मौत के लिए उन्हें ही जिम्मेदार बताया था. पुलिस में उनके समर्थक उनके साथ हैं. उनके समर्थकों का कहना है कि मारिया की पूछताछ के तरीके ‘‘क्राइम ब्रांच उनके पद वाले किसी भी अधिकारी के लिए स्वाभाविक हैं.’’

विनीता के आरोप पर वे मारिया का बचाव करते हुए उन्हें तत्कालीन सीपी हसन गफूर की गफलत का शिकार बताते हैं. बताया जाता है कि प्रधान समिति की अंतिम रिपोर्ट उन्हें निर्दोष साबित करती है. इन सबके बावजूद राकेश मारिया एक लोकप्रिय अफसर हैं. उन्हें चाहने वाले उनकी नियुक्ति से बेहद खुश हैं.
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