बंगलुरू के 18 वर्षीय आदित्य प्रकाश को जब 2006 में शहर की टाटा पादुकोण एकेडमी में ट्रेनिंग देने का अवसर मिला तो कर्नाटक बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से उनकी मां को भी क्लर्क की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया ताकि उनके परिवार का गुजारा चल सके. लेकिन 22 जुलाई को उनकी किस्मत एक झटके में ही उस वक्त चमक उठी, जब ब्रिटेन के नीलामकर्ता और फाइन आर्ट एक्सपर्ट बॉब हेटन ने दिल्ली के एक पांच सितारा होटल के खचाखच भरे कमरे में नीलामी का घंटा बजाया. बंगलुरू में बैठे प्रकाश ने सुना कि उनकी घरेलू टीम बंगा बीट्स ने इंडियन बैडमिंटन लीग (आइबीएल) की पहली नीलामी के दौरान उन्हें 5,000 डॉलर में खरीद लिया है.
बाकी खिलाडिय़ों की किस्मत तो और भी ज्यादा चमक उठी है. हैदराबाद की 18 वर्षीया के. मनीषा को लखनऊ वॉरियर्स ने 26,000 डॉलर में चुना है, जो उनकी न्यूनतम कीमत से चार गुना ज्यादा है. मनीषा अभी जूनियर सर्किट के आखिरी साल में हैं. पिछले महीने उन्होंने मालदीव में सबको चौंकाते हुए मिश्रित युगल का खिताब जीत लिया था. भारतीय बैडमिंटन के बहुत मजबूत और मजे हुए खिलाडिय़ों में से एक 21 वर्षीय साईं प्रणीत और 23 वर्षीय आरएमवी गुरुसाईं दत्त को 40,000 डॉलर की रकम मिली. लेकिन भारतीय बैडमिंटन खिलाडिय़ों में सबसे मोटी रकम मिली साइना नेहवाल को. उन्हें हैदराबाद की ओर से खेलने के लिए 1,20,000 डॉलर में चुना गया. दुनिया में 12वें नंबर की खिलाड़ी पी.वी. सिंधु को लखनऊ के अवध वॉरियर्स ने 80,000 डॉलर में लिया है.
यह पहली बार है कि बैडमिंटन में इतना पैसा देखने को मिल रहा है. छह फ्रेंचाइजियों ने 14 अगस्त से शुरू होने वाले 17 दिन के आयोजन में 60 खिलाडिय़ों पर 9,65,000 डॉलर की भारी-भरकम रकम झोंक दी है. इसके विपरीत इस खेल के सबसे बड़े टूर्नामेंट सुपर सीरीज प्रीमियर में पुरस्कार की कुल रकम महज 2,50,000 डॉलर ही होती है और जीतने वाले को इस राशि का सिर्फ 8 फीसदी हिस्सा ही मिलता है. इसके उलट आइबीएल के विजेता की रकम 10 लाख डॉलर है. आइबीएल के सभी बड़े खिलाडिय़ों को वेतन के रूप में पहले ही दो सुपर सीरीज की पुरस्कार राशि के बराबर रकम मिल चुकी है.
कुल 36 भारतीय खिलाडिय़ों ने 8,61,000 डॉलर हासिल किए हैं, जबकि विदेशी खिलाडिय़ों को मिलने वाली कुल रकम 7,64,000 डॉलर है. इनमें विश्व के नंबर वन खिलाड़ी मलेशिया के ली चोंग वी पर सबसे ज्यादा 1,35,000 डॉलर की बोली लगाई गई. यह रकम हॉकी इंडिया लीग में खेलने वाले हॉलैंड के खिलाड़ी टेयुन डी नूइजर को दी जाने वाली रकम से 48,000 डॉलर ज्यादा है. वे हॉकी इंडिया लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी थे, जिन पर 87,400 डॉलर की बोली लगाई गई थी.
इसी तरह साइना की कीमत भी भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह से 42,000 डॉलर ज्यादा है. सरदार सिंह की कीमत 78,000 डॉलर लगाई गई थी. यहां तक कि सिंधु की कीमत भी सरदार सिंह से 2,000 डॉलर ज्यादा थी. लेकिन आइपीएल से इसका कोई मुकाबला नहीं है. आइपीएल में ऑस्ट्रेलिया के हरफनमौला खिलाड़ी ग्लेन मैक्सवेल को पिछले साल की नीलामी में 10 लाख डॉलर में लिया गया था और भारत के रवींद्र जडेजा की बोली तो सबसे ज्यादा 20 लाख डॉलर थी.
बहरहाल आइबीएल ने बैडमिंटन को एक पेशेवर खेल बना दिया है, जहां पैसा और शोहरत दोनों हैं. यहां तक कि नए और अभी खास पहचान न रखने वाले खिलाडिय़ों को भी अच्छी-खासी रकम मिलने लगी है. पैसों के लिहाज से देखा जाए तो बैडमिंटन भारत में क्रिकेट के बाद दूसरे नंबर का खेल बन गया है. इसने राष्ट्रीय खेल हॉकी को भी पीछे छोड़ दिया है.
आइबीएल के आयोजक स्पोर्ट्स सॉल्यूशंस के सीईओ आशीष चड्ढा ने इंडिया टुडे से कहा, ''बैडमिंटन ऐसा खेल है, जहां भारतीय खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. साइना के अलावा हमारे पास 7 ऐसे खिलाड़ी हैं, जो चोटी के 30 खिलाडिय़ों में आते हैं. इस प्रकार यह देश में दूसरे नंबर का खेल बन गया है.”
दुनिया में तीसरे नंबर की खिलाड़ी साइना का मानना है कि इस लीग से क्रिकेट के दीवाने देश में बैडमिंटन को बढ़ावा मिलेगा. इस समय विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी साइना कहती हैं, ''आइबीएल के कारण देश के युवाओं को बैडमिंटन खेलने का प्रोत्साहन मिलेगा. मैं हमेशा कहती आ रही हूं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा खेलने के लिए पैसा जरूरी है.”
लेकिन विश्व डबल्स में 21वें नंबर की खिलाड़ी 29 वर्षीय ज्वाला गट्टा और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली 19वें नंबर की खिलाड़ी 23 वर्षीय अश्विनी पोनप्पा काफी नाराज थीं क्योंकि आयोजकों ने फ्रेंचाइजियों के कहने पर उनकी न्यूनतम कीमत 50,000 डॉलर से घटाकर 25,000 डॉलर कर दी.
प्रारूप में संशोधन करने से साफ हो गया था कि फ्रेंचाइजियों को महिलाओं के डबल्स में कोई रुचि नहीं है. वे सिर्फ एकल खिलाडिय़ों और पुरुषों के डबल्स के ही पक्ष में थे. ज्वाला ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ''मिक्स्ड डबल्स में खेलने के कारण किसी महिला डबल्स की खिलाड़ी की कीमत घटाकर आधा कर देना बेहद अपमानजनक है. उन्होंने इतनी भी सज्जनता नहीं दिखाई कि वे हमें पहले ही इस बारे में बता देते.”
इसके बावजूद माना जा रहा है कि आइबीएल से खेल को काफी प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी वजह से भारतीय खिलाडिय़ों को दुनिया और देश के बेहतरीन खिलाडिय़ों के साथ और उनके खिलाफ खेलने का अवसर मिलेगा. साइना और सिंधु किसी भी प्रतियोगिता में अब तक एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खेली हैं. लेकिन उम्मीद है कि आइबीएल में उन्हें कम-से-कम दो बार ऐसा मौका जरूर मिलेगा. इससे नए खिलाडिय़ों के मन से बड़े खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलने का डर भी दूर हो जाएगा क्योंकि टूर्नामेंट में वे एक-दूसरे के करीब आ सकेंगे.
आइपीएल की तरह इसमें भी काफी ग्लैमर जुड़ा है. दिल्ली स्मैशर्स के मालिक कृष समूह है, ने सानिया मिर्जा को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है. दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता नागार्जुन मुंबई फ्रेंचाइजी के साथ हैं. सुनील गावसकर इसके ब्रांड एंबेसडर बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले गगन नारंग इस आयोजन को प्रमोट करेंगे. अफवाह यह भी है कि बॉलीवुड स्टार आमिर खान और प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका पादुकोण को टूर्नामेंट एंबेसडर बनाया जा रहा है.
पुणे फ्रेंचाइजी को खरीदने वाले मोहित बर्मन और लखनऊ फ्रेंचाइजी को खरीदने वाला सहारा परिवार आइपीएल की टीमों के भी मालिक हैं. उम्मीद है कि वे मैचों में कई क्रिकेट खिलाडिय़ों और फिल्म स्टार्स को भी लेकर आएंगे. रेडियो जिंगल, टीवी प्रमोशन, रैंप शो और पेज 3 कार्यक्रमों में भी ये खिलाड़ी नजर आएंगे क्योंकि आयोजक पूरे जोर-शोर से इसके प्रचार-प्रसार में लगे हैं. जाहिर है इससे खिलाडिय़ों को जानी-पहचानी हस्ती का दर्जा मिल जाएगा. नेट लगाओ, प्यार बढ़ाओ नारे से लगता है कि आइबीएल इस खेल को आम लोगों तक पहुंचाना चाहता है.
आलोचकों को थोड़ा संदेह है, लेकिन आइबीएल में सफल होने का जरूरी मसाला भरा हुआ है—पैसा, ग्लैमर वाले मालिक, जोरदार प्रचार और बैडमिंटन के खेल का स्टैंडर्ड और उसकी लोकप्रियता बढ़ाने का वास्तविक प्रयास.
—साथ में अमरनाथ के. मेनन
बाकी खिलाडिय़ों की किस्मत तो और भी ज्यादा चमक उठी है. हैदराबाद की 18 वर्षीया के. मनीषा को लखनऊ वॉरियर्स ने 26,000 डॉलर में चुना है, जो उनकी न्यूनतम कीमत से चार गुना ज्यादा है. मनीषा अभी जूनियर सर्किट के आखिरी साल में हैं. पिछले महीने उन्होंने मालदीव में सबको चौंकाते हुए मिश्रित युगल का खिताब जीत लिया था. भारतीय बैडमिंटन के बहुत मजबूत और मजे हुए खिलाडिय़ों में से एक 21 वर्षीय साईं प्रणीत और 23 वर्षीय आरएमवी गुरुसाईं दत्त को 40,000 डॉलर की रकम मिली. लेकिन भारतीय बैडमिंटन खिलाडिय़ों में सबसे मोटी रकम मिली साइना नेहवाल को. उन्हें हैदराबाद की ओर से खेलने के लिए 1,20,000 डॉलर में चुना गया. दुनिया में 12वें नंबर की खिलाड़ी पी.वी. सिंधु को लखनऊ के अवध वॉरियर्स ने 80,000 डॉलर में लिया है.
यह पहली बार है कि बैडमिंटन में इतना पैसा देखने को मिल रहा है. छह फ्रेंचाइजियों ने 14 अगस्त से शुरू होने वाले 17 दिन के आयोजन में 60 खिलाडिय़ों पर 9,65,000 डॉलर की भारी-भरकम रकम झोंक दी है. इसके विपरीत इस खेल के सबसे बड़े टूर्नामेंट सुपर सीरीज प्रीमियर में पुरस्कार की कुल रकम महज 2,50,000 डॉलर ही होती है और जीतने वाले को इस राशि का सिर्फ 8 फीसदी हिस्सा ही मिलता है. इसके उलट आइबीएल के विजेता की रकम 10 लाख डॉलर है. आइबीएल के सभी बड़े खिलाडिय़ों को वेतन के रूप में पहले ही दो सुपर सीरीज की पुरस्कार राशि के बराबर रकम मिल चुकी है.
कुल 36 भारतीय खिलाडिय़ों ने 8,61,000 डॉलर हासिल किए हैं, जबकि विदेशी खिलाडिय़ों को मिलने वाली कुल रकम 7,64,000 डॉलर है. इनमें विश्व के नंबर वन खिलाड़ी मलेशिया के ली चोंग वी पर सबसे ज्यादा 1,35,000 डॉलर की बोली लगाई गई. यह रकम हॉकी इंडिया लीग में खेलने वाले हॉलैंड के खिलाड़ी टेयुन डी नूइजर को दी जाने वाली रकम से 48,000 डॉलर ज्यादा है. वे हॉकी इंडिया लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी थे, जिन पर 87,400 डॉलर की बोली लगाई गई थी.
इसी तरह साइना की कीमत भी भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह से 42,000 डॉलर ज्यादा है. सरदार सिंह की कीमत 78,000 डॉलर लगाई गई थी. यहां तक कि सिंधु की कीमत भी सरदार सिंह से 2,000 डॉलर ज्यादा थी. लेकिन आइपीएल से इसका कोई मुकाबला नहीं है. आइपीएल में ऑस्ट्रेलिया के हरफनमौला खिलाड़ी ग्लेन मैक्सवेल को पिछले साल की नीलामी में 10 लाख डॉलर में लिया गया था और भारत के रवींद्र जडेजा की बोली तो सबसे ज्यादा 20 लाख डॉलर थी.
बहरहाल आइबीएल ने बैडमिंटन को एक पेशेवर खेल बना दिया है, जहां पैसा और शोहरत दोनों हैं. यहां तक कि नए और अभी खास पहचान न रखने वाले खिलाडिय़ों को भी अच्छी-खासी रकम मिलने लगी है. पैसों के लिहाज से देखा जाए तो बैडमिंटन भारत में क्रिकेट के बाद दूसरे नंबर का खेल बन गया है. इसने राष्ट्रीय खेल हॉकी को भी पीछे छोड़ दिया है.
आइबीएल के आयोजक स्पोर्ट्स सॉल्यूशंस के सीईओ आशीष चड्ढा ने इंडिया टुडे से कहा, ''बैडमिंटन ऐसा खेल है, जहां भारतीय खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. साइना के अलावा हमारे पास 7 ऐसे खिलाड़ी हैं, जो चोटी के 30 खिलाडिय़ों में आते हैं. इस प्रकार यह देश में दूसरे नंबर का खेल बन गया है.”
दुनिया में तीसरे नंबर की खिलाड़ी साइना का मानना है कि इस लीग से क्रिकेट के दीवाने देश में बैडमिंटन को बढ़ावा मिलेगा. इस समय विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी साइना कहती हैं, ''आइबीएल के कारण देश के युवाओं को बैडमिंटन खेलने का प्रोत्साहन मिलेगा. मैं हमेशा कहती आ रही हूं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा खेलने के लिए पैसा जरूरी है.”
लेकिन विश्व डबल्स में 21वें नंबर की खिलाड़ी 29 वर्षीय ज्वाला गट्टा और 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली 19वें नंबर की खिलाड़ी 23 वर्षीय अश्विनी पोनप्पा काफी नाराज थीं क्योंकि आयोजकों ने फ्रेंचाइजियों के कहने पर उनकी न्यूनतम कीमत 50,000 डॉलर से घटाकर 25,000 डॉलर कर दी.
प्रारूप में संशोधन करने से साफ हो गया था कि फ्रेंचाइजियों को महिलाओं के डबल्स में कोई रुचि नहीं है. वे सिर्फ एकल खिलाडिय़ों और पुरुषों के डबल्स के ही पक्ष में थे. ज्वाला ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ''मिक्स्ड डबल्स में खेलने के कारण किसी महिला डबल्स की खिलाड़ी की कीमत घटाकर आधा कर देना बेहद अपमानजनक है. उन्होंने इतनी भी सज्जनता नहीं दिखाई कि वे हमें पहले ही इस बारे में बता देते.”
इसके बावजूद माना जा रहा है कि आइबीएल से खेल को काफी प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी वजह से भारतीय खिलाडिय़ों को दुनिया और देश के बेहतरीन खिलाडिय़ों के साथ और उनके खिलाफ खेलने का अवसर मिलेगा. साइना और सिंधु किसी भी प्रतियोगिता में अब तक एक-दूसरे के खिलाफ नहीं खेली हैं. लेकिन उम्मीद है कि आइबीएल में उन्हें कम-से-कम दो बार ऐसा मौका जरूर मिलेगा. इससे नए खिलाडिय़ों के मन से बड़े खिलाडिय़ों के खिलाफ खेलने का डर भी दूर हो जाएगा क्योंकि टूर्नामेंट में वे एक-दूसरे के करीब आ सकेंगे.
आइपीएल की तरह इसमें भी काफी ग्लैमर जुड़ा है. दिल्ली स्मैशर्स के मालिक कृष समूह है, ने सानिया मिर्जा को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है. दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता नागार्जुन मुंबई फ्रेंचाइजी के साथ हैं. सुनील गावसकर इसके ब्रांड एंबेसडर बनाए गए हैं. माना जा रहा है कि ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले गगन नारंग इस आयोजन को प्रमोट करेंगे. अफवाह यह भी है कि बॉलीवुड स्टार आमिर खान और प्रकाश पादुकोण की बेटी दीपिका पादुकोण को टूर्नामेंट एंबेसडर बनाया जा रहा है.
पुणे फ्रेंचाइजी को खरीदने वाले मोहित बर्मन और लखनऊ फ्रेंचाइजी को खरीदने वाला सहारा परिवार आइपीएल की टीमों के भी मालिक हैं. उम्मीद है कि वे मैचों में कई क्रिकेट खिलाडिय़ों और फिल्म स्टार्स को भी लेकर आएंगे. रेडियो जिंगल, टीवी प्रमोशन, रैंप शो और पेज 3 कार्यक्रमों में भी ये खिलाड़ी नजर आएंगे क्योंकि आयोजक पूरे जोर-शोर से इसके प्रचार-प्रसार में लगे हैं. जाहिर है इससे खिलाडिय़ों को जानी-पहचानी हस्ती का दर्जा मिल जाएगा. नेट लगाओ, प्यार बढ़ाओ नारे से लगता है कि आइबीएल इस खेल को आम लोगों तक पहुंचाना चाहता है.
आलोचकों को थोड़ा संदेह है, लेकिन आइबीएल में सफल होने का जरूरी मसाला भरा हुआ है—पैसा, ग्लैमर वाले मालिक, जोरदार प्रचार और बैडमिंटन के खेल का स्टैंडर्ड और उसकी लोकप्रियता बढ़ाने का वास्तविक प्रयास.
—साथ में अमरनाथ के. मेनन

