महानगर मुंबई की डांस आंट्रप्रेन्योर 34 वर्षीया आंचल गुप्ता को दादर के फाइव गार्डेंस में जब एक जॉगर ने छेड़ा तो उसके दो दिन बाद से ही वे मुए थाई बॉक्सिंग सीखने लगीं. डांस स्टुडियो आर्ट्स इन मोशन की संस्थापिका गुप्ता बताती हैं, ''मुझे इतना गुस्सा आया कि मैं कुछ कर नहीं सकी और वह आराम से चला गया. गाली-गलौज अब इतनी आम हो गई है कि मैं अब सीधे मारने में खुद को सक्षम बनाना चाहती हूं.” आजकल महिलाओं के पर्स में काली मिर्च के स्प्रे, चाकू और पिस्तौल जरूरी चीजें हो चली हैं. मुंबई में सेल्स एग्जिक्यूटिव 30 वर्षीया दिव्या घड़ीगांवकर कहती हैं, ''पहले मेरे बैग में लिपस्टिक जरूर होती थी, अब मैं चाकू के बगैर नहीं निकलती. मुझे इससे ताकत मिलती है कि अगर कोई छूता है या छेड़ता है तो मैं उससे निबट लूंगी.” दिव्या उन 21,000 महिलाओं में हैं, जिन्हें शिवसेना ने कुछ दिन पहले चाकू बांटे हैं. शिवसेना के विभाग प्रमुख अजय चौधरी कहते हैं, ''छेड़े जाने के वक्त ही महिलाओं को जवाबी हमला करने में सक्षम होना चाहिए.”
हाथ का जवाब लात से
लंबे नाखून, जूतियां या एक पतली छड़ी भी मुश्किल हालत में काम आ सकती है. मार्शल आर्ट के जानकार और बैडऐज कॉम्बैट एकेडमी के संस्थापक फ्रैंकलिन जोसफ अपने यहां आने वाली महिलाओं को यही शिक्षा देते हैं. अपने यहां क्राव मागा के सत्रों में वे निंजा कुबातन या लकड़ी के नुकीले औजारों से बिना चोट पहुंचाए लडऩा सिखाते हैं. बंगलुरू में अपने प्रशिक्षण सत्र के दौरान वे नकली चाकू, बंदूक और छड़ी ले जाते हैं और कभी-कभार बस में छेडख़ानी वाली नकली स्थितियां पैदा करते हैं.
वे कहते हैं, ''जरूरी है कि महिलाओं को किसी स्थिति का सामना करने के सटीक तरीके बताए जाएं और उपलब्ध संसाधनों से ही काम चलाने के तरीके सिखाए जाएं.” दिल्ली के साकेत में क्राव मागा इंडिया आउटलेट की प्रबंधक पायल तिवारी कहती हैं, ''यह आपको सिखाता है कि हैंडबैग से लेकर किचेन तक की किसी भी चीज को कैसे अपना हथियार बनाया जाए.
शारीरिक क्षमता बढ़ाने के अलावा यह महिलाओं में आत्मविश्वास जगाता है कि वे किसी संकट की स्थिति में खुद को बचा सकती हैं.” इसकी कक्षाएं हफ्ते में तीन बार होती हैं और महीने का 2,500 रु. खर्च आता है. तिवारी के मुताबिक, दिल्ली गैंग रेप की घटना के बाद रजिस्ट्रेशन में 25 फीसदी का इजाफा हुआ है.
नुकीले औजारों के सहारे
चाकू और काली मिच के स्प्रे को हैंडबैग में रखना आसान है, इसलिए आजकल ये जरूरी चीजें बन गई हैं. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश मार्केट में संजीव स्टोर ने बलात्कार की घटना के एक हफ्ते के भीतर 200 स्प्रे बेचे हैं. अमेजन, ग्रुपऑन और हेल्थकार्ट जैसी ऑनलाइन शॉपिंग साइटों पर महिलाओं ने स्टन गन और स्प्रे की खरीदारी शुरू कर दी है. दिल्ली यूनिवर्सिटी की 21 वर्षीया छात्रा केया मंगलानी ने बताया, ''अगर हमलावर स्टन गन छीनने की कोशिश करेगा तो उसे बिजली का झ्टका लग जाएगा. इससे मुझे भाग निकलने का काफी समय मिल जाएगा.”
लेकिन महाराष्ट्र पुलिस के आइजी देवेन भारती एक चेतावनी दे रहे हैं, ''पुरुष और स्त्री, सभी को खाली हाथ लडऩे की शिक्षा मिलनी चाहिए क्योंकि सबके पास आत्मरह्ना का अधिकार है, लेकिन चाकू और हथियारों के इस्तेमाल से लोगों को बचना चाहिए क्योंकि उसका उलटा नतीजा हो सकता है.”
ऐप्स, अलार्म और हमले
सॉफ्टवेयर कंपनियों के बनाए ऐप्स अगर एक बटन दबाने भर से इमरजेंसी चेतावनी जारी कर सकते हैं तो जूतों में लगा एक चिप महज पैर पटकने से अलार्म बजा सकता है. जयपुर के 24 वर्षीय सॉफ्टवेयर डिजाइनर वैभव जैन का बनाया स्टे सेफ ऐप इमरजेंसी कॉन्टेक्ट्स को मैसेज भेज सकता है जबकि कोच्चि की कंपनी माइंडहेलिक्स टेक्नोसोल का बनाया सेंटिनल फोन तोड़ दिए जाने के बाद भी लगातार टेक्स्ट और ई-मेल भेज सकता है.
ठाणे के 26 वर्षीय इंजीनियर पुरुषोत्तम पचपांडे के बनाए एक चिप को जूतियों में फिट कर दिया जाता है और जैसे ही दाएं पैर को तीन बार पटका जाता है, अलार्म बज उठता है. इसे मोबाइल फोन से भी जोड़ा जा सकता है और यह पांच नंबरों पर तुरंत मैसेज भेज सकता है.
साइबर स्पेस में सोल सिस्टर्स
सोशल नेटवर्क पर आजकल एक-दूसरे की काउंसलिंग ताजा चलन है. सोल सिस्टर्स एक ऑनलाइन मेलिंग लिस्ट है. इसे दिल्ली की 24 वर्षीया बीमाकर्मी रूप देसाई ने शुरू किया है. वे कहती हैं, ''इसका लक्ष्य उन महिलाओं को साथ लाना है जो एक-दूसरे की परवाह करती हैं.” इस फोरम में अब तक दिल्ली की 5,000 से ज्यादा महिलाएं जुड़ चुकी हैं. रूप की छोटी बहन 19 साल की मानसी देसाई कहती हैं, ''आज मुझे बाहर निकलने में ज्यादा आत्मविश्वास रहता है क्योंकि मुझे मालूम है कि एक पूरा समुदाय मेरी सुरक्षा की चिंता करता है.”
जरूरी बातें
केरल की मरारीकुलम साउथ की ग्राम पंचायत ने स्त्री सौहृद ग्राम कार्यक्रम (एसएसजी) की शुरुआत की है. पंचायत प्रमुख एन.पी. स्नेहजन कहते हैं, ''गांव में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ उत्पीडऩ की घटनाओं से हम सदमे में थे.” एसएसजी उन सड़कों की पहचान करेगा, जो महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं. वह वहां पुलिस गश्त बढ़ाएगा, नागरिक निगरानी समितियां बनाएगा, संसाधन केंद्र खोलेगा और महिलाओं को आत्मरक्षा की तकनीक सिखाएगा.
उधर बठिंडा में विमेन आर्म्ड स्पेशल प्रोटेक्शन (वास्प) भारत की अपने किस्म की सशस्त्र महिलाओं की पहली पुलिस टुकड़ी है. पूर्व ओलिंपियन 31 वर्षीया अवनीत कौर सिद्धू, जो पंजाब पुलिस में डीएसपी हैं, इसका नेतृत्व कर रही हैं. इसमें 25 महिला कांस्टेबल हैं जिन्हें मार्शल आर्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है और उनके पास छोटे हथियार भी हैं. इसी 13 जनवरी को शुरुआत के बाद से पहले सप्ताह में ही स्कूटर से चलने वाली इसकी सिपाहियों ने करीब दर्जनभर लफंगों को पकड़ा है.
सरकारी और कंपनियों का प्रशासन भी अब महिलाओं के लिए अनुकूल माहौल बनाने की तैयारी करने लगा है. कॉर्पोरेट जगत में महिलाओं को काली मिर्च स्प्रे दिए जा रहे हैं और कैब की व्यवस्था की जा रही है तो मुंबई पुलिस भी अपनी महिला कांस्टेबलों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे रही है.
—साथ में देविका चतुर्वेदी, एम.जी. राधाकृष्णन, असित जॉली, रोहित परिहार और मोना रामावत

