समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव वर्ष 2005 में यूपी के मुख्यमंत्री थे. इसी दौरान इन्होंने ग्रेटर नोएडा के मुर्शिदपुर आरक्षित वन में 102 एकड़ में फैली देश की पहली नाइट सफारी की योजना तैयार की थी. यह नाइट सफारी सिंगापुर की तर्ज पर बनाई जानी थी. चूंकि यह तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट था इसलिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने तेजी दिखाई. सिंगापुर समेत कई एशियाई देशों में नाइट सफारी प्रोजेक्ट की शुरुआत कराने वाले बर्नार्ड हैरिसन सो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने करार किया. इसके बाद अथॉरिटी ने सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) से नाइट सफारी के लिए जरूरी अनुमतियां लेने का प्रयास शुरू किया.
सीजेडए से अनुमोदन मिलने के बाद नाइट सफारी प्रोजेक्ट उच्चतम न्यायालय के पास मंजूरी के लिए चली गई. ऐसा इसलिए क्योंकि उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने देश में मौजूद चिड़ियाघरों की बदहाल स्थिति को संज्ञान में लेते हुए नए प्रोजेक्ट पर रोक लगा रखी थी. इसी बीच वर्ष 2007 में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार चली गई और बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनी. जनवरी 2009 में ग्रेटर नोएडा में नाइट सफारी प्रोजेक्ट को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मिल गई लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इस परियोजना को रोक दिया.
मार्च, 2012 में यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने. अखिलेश ने दोबारा अपने पिता के ड्रीम प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा में नाइट सफारी को हकीकत में तब्दील करने की कवायद शुरू की. लेकिन अखिलेश भी यह परियोजना को जमीन पर नहीं उतार सके. ग्रेटर नोएडा में नाइट सफारी बनाने के लिए बोली लगाने वालों ने बेहद खराब प्रतिक्रिया दी थी. इसकी दो वजहें थीं. पहला कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरू से 20 किलोमीटर दूर बनारघट्टा नेशनल पार्क में नाइट सफारी बनाने के सरकारी प्रयासों को वन्य जीव ऐक्टिविस्ट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश पर कर्नाटक सरकार को जनवरी, 2012 में बेंगलूरू में नाइट सफारी प्रोजेक्ट को रोकना पड़ा था. बिडर्स के ग्रेटर नोएडा नाइट सफारी में रुचि न दिखाने के पीछे पश्चिमी यूपी की बिगड़ी कानून व्यवस्था भी थी. इसके बाद से ग्रेटर नोएडा में नाइट सफारी प्रोजेक्ट फाइलों में ही कैद रहा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यूपी में फिल्म सिटी बनाने के बाद गौतम बुद्धनगर (नोएडा) में अलग-अलग लोकेशन पर अधिकारियों ने संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है. ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के पास प्रस्तावित नाइट सफारी की 550 एकड़ जमीन पर फिल्म सिटी बनाने का प्रस्ताव बनाया है. यह इलाका एजुकेशन का हब है. यहां पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय समेत सात विश्वविद्यालय हैं. इन विश्वविद्यालयों के कैंपस में कई फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है. अभिनेता जान अब्राहम की लीड रोल वाली 'परमाणु', हे बेबी, किल दिल अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अभिनीत 'छपाक' समेत कई फिल्मों के महत्वपूर्ण दृश्य यहीं पर फिल्माए गए हैं. उधर यमुना प्राधिकरण ने जिस जमीन को फिल्म सिटी के लिए चुना है वहां से नोएडा एयरपोर्ट मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर है. यह जगह न केवल परी चौक सेक्टर 21 यमुना एक्सप्रेसवे के पास है बल्कि ईस्टर्न पेरीफेरल से भी इसकी दूरी महज 12 किलोमीटर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 22 सितंबर को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में नोएडा में बनने वाली फिल्म सिटी के लिए स्थान पर सरकार की मुहर लग सकती है.
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