मैं वर्षों से कराची आता रहा हूं, मगर इस घटना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर संस्कृति के गलियारों को भी आतंकवाद जख्मी करने लगा तो क्या होगा?
हम लोग 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय मुशायरे में शिरकत करने के लिए कराची आए. 22 मार्च को हमने उस मुशायरे में शिरकत की, जिसमें भारत से आए हुए शायरों ने भारत-पाक दोस्ती के हवाले से शायरी पढ़ी, जिसे हजारों लोगों ने पसंद किया. 23 मार्च को बदायूं क्लब कराची ने मुशायरा आयोजित किया, जिसमें हिंदुस्तान के शायरों ने पाकिस्तान के अवाम को प्यार का संदेश दिया.
24 तारीख को एमक्यूएम की जानिब से एक कॉन्फ्रेंस बाग इब्ने-कासिम में 20,000 लोगों की मौजूदगी में आयोजित की गई, जिसके संयोजक एमक्यूएम के युवा नेता हम्माद सिद्दीकी थे. इस कॉन्फ्रेस को मैंने भी संबोधित किया और हिंद-पाक के खट्टे-मीठे रिश्तों की बात करते हुए हिंदुस्तान की तरफ से प्यार और अमन का संदेश दिया. 25 तारीख की रात को दोतलवार ख्लिफ्टन में जो कराची का वीआइपी इलाका है, यहां के पुलिस ग्राउंड में अंतरराष्ट्रीय मुशायरे का आयोजन किया गया था.
मुशायरा रात 9 बजे शुरू हो चुका था. मुशायरे में पाकिस्तान लोकसभा के विपक्ष के नेता श्री फारूक सत्तार, जो राब्ता कमेटी एमक्यूएम के संयोजक भी हैं, सीनेटर नसरीन जलील, रऊफ सिद्दीकी, मुस्तफा कमाल मेयर, श्रीमती खुशबख्त शुजाअत (सीनेटर) और एमक्यूएम की टॉप लीडरशिप मौजूद थी. हम लोग काले रंग की एक गाड़ी में मुशायरा स्थल पर रात के लगभग 11.30 बजे पहुंचे.
जैसे ही हम मुशायरा स्थल के गेट पर पहुंचे, उसी समय अचानक फायरिंग शुरू हो गई. हमारा ड्राइवर घबरा गया और कार बंद हो गई. फायरिंग इतनी भयानक थी कि हम भी घबरा गए. इसी बीच कराची रेंजर्स और पुलिस की गाड़ी ने आकर हमारी गाड़ी को घेर लिया और हमें कवर करते हुए आतंकवादियों की गोलियों का जवाब गोलियों से देना शुरू किया. इसी बीच एमक्यूएम के लोगों ने अपनी जान खतरे में डालकर हमारी गाड़ी को घेर लिया और हमें सुरक्षित कर लिया गया.
पंद्रह से बीस मिनट तक हुई इस गोलीबारी में कुछ आतंकवादी मारे गए और जख्मी हुए. मुशायरे में भगदड़ मच गई. इसमें महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे धक्का-मुक्की में गिरे और जख्मी हुए. शायरों ने अपनी जान जहां-तहां छुपकर बचाई. घटना के बाद रेंजर्स और पुलिस ने घटना स्थल को चारों तरफ से घेर लिया और हम लोग जो पूरी तरह अपने आपको अब तक असुरक्षित और बेसहारा समझ रहे थे, पुलिस ने हमें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया.
आरोप है कि अवामी नेशनल पार्टी के आतंकियों द्वारा इस घटना को अंजाम दिया गया, जिसकी पूरे पाकिस्तान की राजनीतिक गैर-सामाजिक संस्थाओं ने निंदा की. पाकिस्तानी लोकसभा में इसकी निंदा की गई. खुद गृह मंत्री रहमान मलिक ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि मैं कराची जाकर घटना स्थल का जायजा ले रहा हूं और साथ ही चार सदस्यीय मजिस्ट्रेट जांच का आदेश भी दिया, जो एक सप्ताह में अपना निर्णय देंगे. एमक्यूएम के लीडर अल्ताफ 'सैन साहब ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ये हिंद-पाक की साझा संस्कृति पर हमला है और इस तरह की घटना दोबारा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
दूसरे दिन 26 तारीख को कराची बंद का ऐलान किया गया, जिसमें लगभग 40 बसेंजला दी गईं और बारह लोग मारे गए. हम सुरक्षित हैं, मगर कराची में अफरा-तफरी है. मैंने दुनिया के कई देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और कराची भी मैं पिछले कई वर्षों से आता रहा हूं.
मगर इस बार की इस घटना ने मुझे ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि अगर आतंकवाद का घिनौना खेल साहित्य और संस्कृति के गलियारों को भी जख्मी करने लगा तो दुनिया का क्या होगा? इंसान के जिस्म पर कितने जख्म लगेंगे? इंसानियत बचेगी भी या नहीं? बहनों और माताओं की चीखें सुनने वाला कोई आगे आएगा या नहीं? यही एक सवाल है, जिसका जवाब सारी दुनिया को मिलकर ढूंढऩा है.
हर एक हाथ में सामान है तबाही का.
किसी भी लम्हे ये दुनिया बिखरने वाली है.
-कराची के उस मुशायरे में शायर मंजर भोपाली मौजूद थे

