पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चरमराती कानून व्यवस्था और अपराधों में हुई बेतहाशा वृद्धि से अब पुलिसवाले भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं. पिछले तीन हफ्तों के दौरान मथुरा, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में पांच पुलिसकर्मी बदमाशों के हाथों अपनी जान गंवा चुके हैं. इतना ही नहीं, बदमाशों ने दुस्साहस दिखाते हुए छह सरकारी राइफलें भी लूट ली हैं. पुलिस महकमे में दहशत का यह आलम है कि एडीजी-एनसीआर के.एल.
मीणा ने पूरे मेरठ जोन में और डीआइजी सहारनपुर रेंज जयनारायण सिंह ने गश्ती पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए असाधारण कदम उठाते हुए उनकी संख्या दोगुनी किए जाने के निर्देश दिए हैं. पुलिस महकमा अभी तक इस नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है कि इन वारदातों के पीछे कौन है. डीआइजी जयनारायण सिंह और नवगठित जनपद प्रबुद्धनगर (शामली) के एसपी उपेंद्र अग्रवाल ने इंडिया टुडे से कहा कि अपराधियों के पकड़े जाने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पुलिस की राइफलें लूटे जाने की वजह क्या थी?
सहारनपुर रेंज में पुलिसकर्मियों की हत्या का सिलसिला 2 जून को शुरू हुआ, जब जिला प्रबुद्धनगर के झंिझना थाना क्षेत्र की बिड़ौली चेकपोस्ट पर मुजफ्फरनगर जनपद के सर्विलांस के माहिर और एसओजी टीम में शामिल कांस्टेबल सचिन की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई.
इस प्रकरण में सहारनपुर के गंगोह थाना क्षेत्र के गांव बड़ी माजरा निवासी पचास हजार के इनामी कुख्यात मुस्तफा गुर्जर उर्फ 'कागा' का नाम प्रकाश में आया. पुलिस का कहना है कि 12 अक्तूबर को जिला प्रबुद्धनगर के थानाभवन थाना क्षेत्र के गांव मस्तगढ़ के जंगल में रात्रि गश्त के दौरान कांस्टेबल कृष्णपाल की हत्या और कांस्टेबल अमित कुमार को गंभीर रूप से घायल कर उनकी राइफलें लूटने एवं दो दिन बाद 14 अक्तूबर की रात्रि को जनपद सहारनपुर के थाना बेहट की धौलाकुआं की रॉयल्टी चेकपोस्ट पर ड्यूटी दे रहे कांस्टेबल बलबीर सिंह की हत्या और होमगार्ड इंतजार को गंभीर रूप से घायल कर उनकी राइफलें लूटने की घटनाओं में काफी समानता है.
बकौल एडीजीपी के.एल. मीणा और डीआइजी जयनारायण सिंह, इन दोनों संगीन वारदातों में मुस्तफा और उसका गिरोह शामिल है. उसे पकड़ने की पुलिस की सारी कोशिशें नाकाम रही हैं. गंगोह क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार राकेश गर्ग के मुताबिक विफलता की वजह यह है कि मुस्तफा पूरे इलाके से वाकिफ है और उसके प्रति आम लोगों में हमदर्दी का भाव है. साथ ही उसे राजनैतिक संरक्षण भी हासिल है.
डीआइजी जयनारायण सिंह का इंडिया टुडे से कहना था कि 26 सितंबर को मुस्तफा के गंगोह थाना क्षेत्र के ग्राम बुढहनपुर-कंहेड़ा के जंगल में छिपे होने की सूचना मिलने पर सहारनपुर के एसएसपी दीपक रतन की अगुवाई में गंगोह के पुलिस इंस्पेक्टर चमन सिंह चावड़ा एवं मुजफ्फरनगर के इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह के एक बड़े संयुक्त दल ने जंगल का घेराव कर बदमाशों का आधे घंटे तक मुकाबला किया, लेकिन उन्हें पकड़ने में नाकामयाब रहे.
पुलिस दल में शामिल इंस्पेक्टर गंगोह चमन सिंह चावड़ा का कहना था कि बदमाश ईंख के घने खेतों में छिपे होने के कारण पकड़े नहीं जा सके. मौके से दो लाइसेंसी राइफलें, एक लाइसेंसी पिस्तोल, एक डबल बेरल बंदूक व कई देसी तमंचे और कारतूस वगैरह बरामद हुए.
पुलिस के मुताबिक मुस्तफा ने इनमें से कुछ हथियार कु छ दिन पूर्व ही गंगोह थाने के बुह्याखेड़ा के प्रधान रमेशचंद सैनी के यहां से लूटे थे. 27 सितंबर को मथुरा में नोजल थाने की बाजना चौकी पर कांस्टेबल रामवीर और कांस्टेबल कृष्णवीर की हत्या करने वाले बदमाश अलीगढ़ के खेर निवासी नदीम और नीटू को मथुरा पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है.
उन्होंने यह वारदात नगला निवासी दो भाईयों कालू और मनवीर के साथ मिलकर की थी. कालू के भाई संजय को पुलिस ने 2008 में मुठभेड़ में मार गिराया था. संभवतः उसी रंजिश के चलते इन बदमाशों ने दोनों कांस्टेबलों रामवीर व कृष्णवीर की हत्या कर दी. एसएसपी मथुरा प्रेम गौतम के मुताबिक पुलिस अभी तक लूटी गई राइफलें बरामद नहीं कर पाई है.
एडीजीपी एनसीआर के.एल. मीणा सहारनपुर रेंज में डेरा डालकर मुस्तफा के सफाए की रणनीति बनाने में लगे हैं पर अभी तक कोई कारगर सफलता हाथ नहीं लगी है. मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद भारद्वाज ने कहा कि पुलिस तंत्र आज सर्विलांस और टेक्नोलॉजी पर ही आश्रित होकर रह गया है, जबकि आपराधिक घटनाओं का सुराग लगाने में पहले बीट कांस्टेबल द्वारा बनाई गई डायरी और मुखबिरों द्वारा दी जाने वाली सूचनाएं महत्वपूर्ण हुआ करती थीं.
देवबंद के पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह बैसला कहते हैं कि मुस्तफा को यह मुगालता है कि पुलिस उससे डर जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है पुलिस उसे जल्द से जल्द जिंदा या मुर्दा पकड़ने में जरूर कामयाब होगी.

