कुछ महीने पहले टीम अण्णा के सदस्य और कर्नाटक के लोकायुक्त जस्टिस संतोष हेगड़े ने अपना कार्यकाल पूरा किया. उनका स्थान लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की नियुक्ति की गई. लेकिन एक विवाद छिड़ गया कि उनकी पत्नी और परिजनों के नाम कथित तौर पर अनुचित और अनियमित ढंग से हाउसिंग सोसायटी के दो स्थल आवंटित कर दिए गए थे. इस वजह से उन्होंने शपथ लेने के कुछ हफ्तों के भीतर ही इस्तीफा दे दिया. अगले जिस व्यक्ति के कार्यभार ग्रहण करने की चर्चा उठी वे इसके लिए तैयार नहीं हुए. अभी नए लोकायुक्त ने कार्यभार ग्रहण भी नहीं किया है कि वे विवादों के केंद्र में आ गए. पूछे जाने पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा ने कहा, ‘मैं लाचार हूं, कर क्या सकता हूं. सभी लोगों पर कोई न कोई आरोप हैं.
8 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
उधर, टीम अण्णा की सदस्य किरण बेदी पर यात्रा बिलों में हेराफव्री और अनियमितताओं के आरोप हैं, और अरविंद कव्जरीवाल पर आरोप है कि उन्होंने अण्णा हजारे आंदोलन के पैसों को अपने ट्रस्ट में डाल दिया. शराब पीने को लेकर अण्णा के अनोखे विचार हैं और आरएसएस के साथ उनके रिश्तों को लेकर हमले जारी हैं. इस बीच कांग्रेस दोहरी नीति पर काम कर रही है. जहां प्रधानमंत्री अण्णा को दोस्ताना पत्र भेजते हैं, वहीं पार्टी के प्रवक्ता और सरकार के नियंत्रण और प्रभाव में रहने वाली एजेंसियां अण्णा पर हमले करती हैं, प्रेस का गला घोंटने की कोशिश करती हैं और जता देती हैं कि आलोचना करने वालों को सत्तारूढ़ दल की नाराजगी झेलनी पड़ेगी. ऐसी कार्रवाइयों से वे मजबूत लोकपाल की फौरी जरूरत के मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने में सफल हो सकती हैं, लेकिन इससे कांग्रेस पार्टी की छवि में चार चांद कतई नहीं लगते.
1 फरवरी 2012: तस्वीरों में इंडिया टुडे
संसद में हुई बहस और मुद्दे को भटकाने की रणनीति ने सभी दलों की कलई खोल दी है. उन सभी का मकसद अपने राजनैतिक एजेंडे को साधना है और कोई भी दल मजबूत और स्वतंत्र लोकपाल के लिए जरूरी व्यवस्थागत बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं दिखता. टीम अण्णा के लिए यह सही नहीं है कि वह इसके लिए सिर्फ कांग्रेस को दोषी ठहराकर उसका गला पकड़े. एक पल के लिए यह मान भी लिया जाए कि अण्णा और उनकी टीम के खिलाफ लगाए गए आरोप सच हैं तो क्या यह साफ नहीं है कि मजबूत लोकपाल की मांग बेहद जरूरी है.
हमें पता चल रहा है कि हममें से ज्यादातर लोग दागदार हैं, और कि एक इंसान के रूप में हम कमजोर और स्वार्थी हैं और लालच के सामने झुककर हम ऐसे काम करते हैं जो समाज की कीमत पर हमें फायदा पहुंचाते हैं या कभी-कभी राजकीय कोष को नुकसान पहुंचाते हैं. फिर साधारण व्यावहारिक बुद्धि तो यही कहती है कि सत्ता का दुरुपयोग रोकने और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी या सिविल सोसायटी के किसी व्यक्ति को सूली पर चढ़ाने की बजाए हमें व्यवस्थागत बदलावों की ज्यादा जरूरत है. हमें ज्यादा से ज्यादा संस्थाओं को कमजोर नहीं बल्कि मजबूत बनाकर उन्हें स्वतंत्र करना होगा, इसलिए भी कि हममें से सबसे बेहतर लोग भी सत्ता और पैसे के लालच से मुक्त नहीं हैं.
25 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
जब केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी की तरह ही कर्नाटक में भी सत्तारूढ़ भाजपा के घोटाले दर घोटाले में लिप्त होने का पर्दाफाश हुआ तो मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्रियों के पास एक रटा-रटाया जवाब तैयार था-कांग्रेस और जनता दल की पिछली सरकारों में हमसे पहले के मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने भी अपने बच्चों को जमीन आवंटित की है और खान के लाइसेंस दिए हैं.
हमने कोई अनूठा काम नहीं किया है. पूरी ढिठाई से वे इस आधार पर भ्रष्टाचार को जायज ठहराते रहे कि उनके पूर्ववर्ती भी भ्रष्ट थे. भाजपा के दोहरे मानकों के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने सपाट जवाब दिया, ‘राजनीति संभावनाओं की कला है. राजनैतिक दलों को यथार्थवादी होना पड़ता है और समझौते करने पड़ते हैं.’ वे बड़ी आसानी से भूल जाते हैं कि जब मनमोहन सिंह ने कबूल किया कि 'गठबंधन धर्म' की अपनी मजबूरियां होती हैं तो भाजपा ने कैसा कोहराम मचाया था.
18 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखिए इंडिया टुडे
इस तरह आज हम खुद को चौराहे पर खड़ा पाते हैं. जब गलत तरीके से कमाई गई दौलत समाज में सम्मान प्राप्त कर रही हो, जब हम सत्ता का दुरुपयोग करने वालों की चापलूसी कर रहे हों और इसे लेकर बुरा न महसूस कर रहे हों, जब हम घूस लेने या देने में संकोच न करते हों, और जब हममें से ऐसा कोई व्यक्ति मिलना मुश्किल हो जिसने कोई पाप न किया हो तो शायद समाज पतन के खतरे के निशान को पार कर गया है और असाध्य बीमारी की अवस्था में पहुंचने वाला है.
11 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
व्यापक व्यवस्थागत बदलाव किए जाने के लिए यह हम सब लोगों को जगाने का आह्वान है. कांग्रेस मौजूदा लोकपाल बिल से अधिक मजबूत लोकपाल बिल का उपहार देश को देकर जनता का विश्वास फिर से हासिल कर सकती है और इस तरह विपक्ष की बाजी पलटकर टीम अण्णा के आंदोलन की हवा निकाल सकती है. सरकार को बदलना कोई समाधान नहीं है. हमें राजकाज का तौर तरीका बदलने की दिशा में काम करना होगा.
भारत में सस्ती विमान सेवा के अग्रदूत गोपीनाथ, सिम्पली फ्लाई-ए-डेक्कन ओडिसी के लेखक हैं.

