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रियो ओलंपिक: ताकतवर चक्केबाज विकास गौड़ा

अगर विकास गौड़ा अपनी चोट से उबर आते हैं, तो वे रियो ओलंपिक में पदक ला सकते हैं.

विकास गौड़ा
विकास गौड़ा
अपडेटेड 31 जुलाई , 2016

विकास गौड़ा
33 वर्ष,  एथलेटिक्स, डिसकस, शॉटपुट
कैसे क्वालीफाइ कियाः मई 2015, जमैका
उपलब्धियां: 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण, 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में रजत, 2014 के इंचिऑन एशियाई खेल में भी रजत

विकास गौड़ा विशालकाय इनसान हैं. दो मीटर से भी ज्यादा ऊंचे, उनकी लंबाई एनबीए पावर फॉरवर्ड जितनी और वजन डब्ल्यूडब्ल्यूई पहलवान जितनी है. वे एक दिन में ढाई किलो चिकन खाते हैं और बालटियां भरकर प्रोटीन शेक पीते हैं. हो सकता है शब्दशः बाल्टियां भरकर न पीते हों, मगर वे पी तो सकते ही हैं; यह कहना ज्यादा सही होगा. गौड़ा चक्का और गोला फेंकते हैं.

चक्का तो वे इतनी दूर तक फेंक चुके हैं जितना कभी किसी भारतीय ने नहीं फेंका. 66.28 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है. उन्होंने 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. इस तरह वे 1958 में मिल्खा सिंह के बाद एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए थे.

इस बात के मद्देनजर कि ओलंपिक में भारत के लिए पदकों की कमी रही है और गौड़ा 2012 के लंदन ओलंपिक में चक्का फेंक के फाइनल में पहुंच गए थे और कुल मिलाकर आठवें स्थान पर रहे थे, कहा जा सकता है कि गौड़ा को उससे कहीं ज्यादा मशहूर और यशस्वी होना चाहिए था जितने वे हैं. कंधे की चोट की वजह से ओलंपिक में भाग लेने पर संदेह के बादल मंडराने से पहले तक गौड़ा ओलंपिक में भारत की सबसे बड़ी चुनौती थे. गौड़ा पांच साल की उम्र में अमेरिका चले गए थे.

अमेरिका गौड़ा के लिए अहम रहा है. गणित की पढ़ाई करते हुए वे यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में कॉलेज एथलीट थे. वहां उन्होंने 2006 में राष्ट्रीय चक्का फेंक खिताब जीता. यह अमेरिका ही था जहां गौड़ा बहुत खास किस्म का तकनीकी प्रशिक्षण हासिल कर सके, जो इस अबूझ खेल के लिए बेहद जरूरी है. यह उस किस्म का प्रशिक्षण है जो हिंदुस्तानी एथलीटों को बहुत मुश्किल से ही मिल पाता है. गौड़ा ने जॉन गोडिना से प्रशिक्षण लिया, जो शॉटपुट फेंक में पूर्व विश्व चैंपियन हैं और इन दिनों कैलिफोर्निया और एरिजोना में इन्हीं खेलों की अकादेमियां चलाते हैं. चक्का फेंक बेहद प्रतिष्ठित खेल है और ओलंपिक के साथ यह इतने प्रतीकात्मक ढंग से जुड़ा है कि गोल्फ, टेनिस और फुटबॉल सरीखे खेल कभी जुड़ नहीं सकते. यह गैरमामूली विधा है, जिसमें ऐसी सटीक जुंबिश और बारीक चीजें साधनी पड़ती हैं जिन्हें नौसिखिए शायद न साध सकें.

कई एथलीट और मशहूर शख्सियतों की तरह गौड़ा भी ट्विटर पर हैं. मगर दूसरों की तरह वे बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते. जनवरी 2015 में इस पर आने के बाद उन्होंने महज 40 ट्वीट किए हैं. हालांकि इस पर उनका लाजवाब वीडियो है जिसमें वे सिंगल लेग बॉक्स जंप साधते दिखाई देते हैं. वे एक जिम में दीवार से सटाकर बहुत ऊंचाई तक रखे गए कुछ प्लायोमेट्रिक डिब्बों की तरफ एक या दो लंबे कदमों से बढ़ते हैं और फिर एक पैर से इस तरह छलांग लगाते हैं कि दूसरे पैर से सीधे डिब्बों के ऊपर जा उतरते हैं. अपनी बेहद ऊंची कद-काठी के लिहाज से वे लाजवाब रफ्तार, फुर्ती और शान का प्रदर्शन करते हैं. ये वे खूबियां हैं जो अगर वे अपनी चोट से उबर आते हैं, तो उन्हें रियो में पोडियम की ऊंचाई पर पहुंचा सकती हैं और भारत में उन्हें वह वाहवाही और शोहरत दिला सकती हैं जिसके वे लंबे समय से हकदार हैं.

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