scorecardresearch
डार्क मोड

झारखंड में सियासत का शातिर खेल

सीबीआइ की जांच में विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर खुल रहे नए रहस्य.

अपडेटेड 17 जून , 2012

भले ही विधायक जेल के भीतर रहे हों या बाहर, 30 मार्च को राज्‍यसभा चुनाव के दौरान वे प्रत्याशियों और पावर ब्रोकर के साथ गुप-चुप तरीके से संपर्क में थे. ऐसी क्या वजह हो सकती है कि राज्‍यसभा चुनाव से डेढ़ हफ्ते पहले फर्जी दस्तावेज के आधार पर उन्होंने दर्जनभर से ज्‍यादा एमटीएस मोबाइल के सिम कार्ड खरीदे और इस्तेमाल के बाद तुरंत सबूत मिटाने के लिए उन्हें तोड़कर फेंक दिया.

30 मार्च को हुए राज्‍यसभा के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी बिल्डर पवन कुमार धूत ने कथित तौर पर विधायकों से संपर्क करने और वोट के लिए सौदे तय करने का जो शातिर तरीका निकाला था वह सीबीआइ के मंजे अफसरों को चौंकाने के लिए काफी है. प्रदेश में राज्‍यसभा के चुनाव खरीद-फरोख्त के आरोप के कारण रद्द कर दिए गए.

जांच के दौरान सीबीआइ को वह अहम नंबर (9135846806) मिला, जिसने अन्य कई नंबरों तक पहुंचने में मदद की. इसे फर्जी तरीके से हासिल किया गया था. ये सारे नंबर मांडर के एक झोलाछाप डॉक्टर याकूब अली के नाम पर लिए गए थे. लिहाजा सीबीआइ ने धूत के एक करीबी रामकुमार बांगर से पूछताछ की जिसके बारे में संदेह किया जाता है कि उसने ही यह सिम दिलवाए थे.

सीबीआइ ने फर्जी आधार पर लिए उन दर्जनों नंबरों को खोज निकाला है और उसके साथ-साथ कॉल और एसएमएस डिटेल भी, इससे सीबीआइ को यह समझने में मदद मिली कि कौन-कौन से विधायक और उनके सहयोगी धूत के संपर्क थे. सब कुछ काफी सावधानी से किया गया ताकि किसी को इसकी भनक न लग सके. विधायकों ने भी सावधानी बरती. उन्होंने इन नंबरों से बातचीत करने के लिए अपने नंबर की जगह अपने रिश्तेदारों या अपनी पत्नी के नंबर का इस्तेमाल किया.

इनमें से एक विसुनपुर से निर्दलीय विधायक चमरा लिंडा भी शामिल हैं जिन्होंने 27 से 29 मार्च के बीच कथित तौर पर अपनी पत्नी के मोबाइल नंबर से तीन संदिग्ध एमटीएस नंबरों से करीब 24 बार बातचीत की और संदेश का आदान-प्रदान किया. ''अब जब बातचीत हो गई

है, निश्चिंत रहें.'' यह छोटा-सा एसएमएस कई तथ्यों की ओर इशारा करता है. पिछले हफ्ते सीबीआइ ने लिंडा के घर समेत झारखंड, ओडीसा, दिल्ली और कोलकाता में 18 स्थानों पर छापेमारी की. सीबीआइ ने लिंडा के चार मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए, जिनके कॉल डिटेल निकाले जा रहे हैं. इंटेलिजेंस विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, ''वे दावा कर सकते हैं कि फोन पर अध्यात्म की बातें कर रहे थे. लेकिन फर्जी दस्तावेज के आधार पर नंबर हासिल करना फिर उसे तोड़ कर फेंक देना,  सीक्रेट नंबर से बात करना आपराधिक साजिश के संदेह को जन्म देता है.''

27 मार्च को सवेरे सात बजे से दोपहर दो बजे के भीतर लिंडा ने अपनी पत्नी के नंबर से एमटीएस के दो नंबरों (जिसकी आखरी दो संख्या 69 और 87 है) पर छह बार लंबी बातचीत की. 28 मार्च को 69 वाले नंबर पर लिंडा ने 15 बार बातचीत की. 29 मार्च को लिंडा ने एमटीएस के तीन अलग-अलग नंबर से तड़के 3.47 बजे से दोपहर 12 बजे के भीतर तीन बार फोन किया. लिंडा इससे इनकार करते हैं कि उन्होंने कभी भी धूत या उनके किसी सहयोगी से बात भी की थी.

वे कहते हैं, ''पत्नी के नंबर पर बातचीत की ये बातें मनगढ़ंत हैं. मैं पब्लिक लाइफ में हूं. मेरी बहुत लोगों से बात होती है. मैं ऐसी किसी साजिश का हिस्सा नहीं था.'' लिंडा के दावे सबूतों के आगे ठहर नहीं पाते. अगर यह ललिता लिंडा कोई और हैं तो यह संयोग भी हो सकता है कि विधायक की पत्नी का नाम भी ललिता है. यह कतई संयोग नहीं हो सकता कि 2005 विधानसभा चुनाव के दौरान चमरा लिंडा द्वारा दायर किए गए शपथपत्र में दिया गया पता और मोबाइल कनेक्शन के लिए ललिता लिंडा का पता दोनों एक ही हों: डोरिया टोली, नया सराय, रांची. इन नंबरों के माध्यम से तकरीबन एक दर्जन विधायक धूत के संपर्क में रहे थे. धूत को दर्जनभर से अधिक विधायकों ने प्रथम वरीयता का मत दिया था.

बताया जाता है कि चुनाव लड़ रहे कुछ प्रत्याशियों ने वोट की खरीद-फरोख्त के लिए इतनी सुनियोजित व्यवस्था की थी कि वे जेल में बंद विधायकों से भी फोन पर लगातार संपर्क में थे. झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक विधायक ने रांची के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद एक अन्य विधायक को चुनाव के दौरान फोन किया था जबकि रांची के इस सेंट्रल जेल में मोबाइल जैमर लगे हुए हैं. सीबीआइ के एसएसपी आर.सी. चौधरी कहते हैं, ''हम किसी नतीजे पर पहुंचें इसके लिए हम सारे सूत्रों और सबूतों को बारीकी से देख रहे हैं. हम जल्द ही मामले की तह तक पहुंच जाएंगे.''

ADVERTISEMENT
Advertisement