scorecardresearch
डार्क मोड

निहित स्वार्थ रखने वाला ही विरोध करता है: मोदी

मैं परदे के पीछे रहने वाला पार्टी कार्यकर्ता रहा हूं. मैंने मुख्यमंत्री बनने का सपना कभी नहीं देखा, लेकिन गुजरात के लोगों ने मुझे न केवल मुख्यमंत्री बनाया बल्कि मुझे बहुत प्यार भी दिया. गुजरात की सेवा करके मैं आध्यात्मिक सुख प्राप्त करता हूं.

नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी
अपडेटेड 28 सितंबर , 2011

नरेंद्र मोदी के सद्भावना उपवास में उनकी छवि मेलमिलाप वाले नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की गई. गुजरात के मुख्यमंत्री ने सीनियर एडिटर  उदय माहूरकर से बातचीत की. उसी के कुछ अंशः

मुख्यमंत्री के रूप में क्या यह आपका अंतिम कार्यकाल है?
मैं परदे के पीछे रहने वाला पार्टी कार्यकर्ता रहा हूं. मैंने मुख्यमंत्री बनने का सपना कभी नहीं देखा, लेकिन गुजरात के लोगों ने मुझे न केवल मुख्यमंत्री बनाया बल्कि मुझे बहुत प्यार भी दिया. गुजरात की सेवा करके मैं आध्यात्मिक सुख प्राप्त करता हूं. मैं स्वयं को इसमें पूरी तरह डूबा हुआ पाता हूं.

गुजरात में आपने बहुत कर लिया? क्या अब भारत आवाज दे रहा है?
गुजराती भारत की 120 करोड़ जनता का अंग हैं. गुजरात की सेवा करने का मतलब है भारत माता की सेवा करना. दोनों के बीच फर्क करना अनुचित है.

यह माना जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी के विचार का सबसे बड़ा विरोध बाहर की बजाए आपकी ही पार्टी में हो रहा है. क्यों?
यह सवाल काल्पनिक, यहां तक कि निहित अर्थों वाला और दुर्भाग्यपूर्ण भी है. उन्हीं नेताओं ने मुझे तैयार किया और आज मैं जो हूं उन्हीं की बदौलत हूं. मैंने उनसे कई बातें सीखी हैं. यह मेरे लिए दुखदायक ही है कि कोई भी उनके बारे में इस तरह से सोचे.

आपके तीन दिन के उपवास ने क्या बदलाव किया है?
देश की सत्ता के गलियारों में गुजरात के विकास मॉडल के बारे में चर्चाएं चल रही थीं,  पर ऐसा दबी जबान में ही हो रहा था. जब अमेरिकी सरकार ने गुजरात के शासन के बारे में सकारात्मक टिप्पणियां प्रकाशित कीं तो इसके बारे में और भी लोगों को मालूम हो गया. मैं सद्भावना मिशन पर चलकर दुनिया को यह बताना चाहता था कि हमारी विकास यात्रा शांति, सद्भाव और भाईचारे पर आधारित है. मैं चाहता था कि गुजरात की प्रशंसा करने वाले उसके पीछे छिपी भावना के बारे में जानें.

आपने कहा कि विकास से संबंधित आपका सद्भावना मॉडल एक रोज भारत में वोट बैंक की राजनीति पर आधारित विकास को समाप्त कर देगा. इससे आपका क्या आशय है?
अगर आप भारत के पिछले 40 वर्षों को देखें तो आप पाएंगे कि सत्ताधारी पार्टियों ने वोट बैंकों को मजबूत बनाने के लिए अपने बजट तैयार किए. उन्होंने ऐसे मॉडल तैयार किए जिनसे लोग सरकार पर निर्भर हो गए. लेकिन गुजरात में हमने वोट बैंक राजनीति पर आधारित मॉडल को खारिज करके 'सबका साथ, सबका विकास' नारे पर आधारित एक नया मॉडल बनाया. लोग विकास में भागीदार बन गए हैं. और प्रगति टुकड़ों में नहीं, समग्र में रूप में है. मेरा पूरा विश्वास है कि सद्भावना और जनशक्ति इस देश में वोट बैंक की राजनीति को खत्म कर देगी.

अपनी सारी कोशिशों के बावजूद आप एकजुट करने वाले नेता की बजाए ध्रुवीकरण करने वाली शक्ति बने हुए हैं. ऐसा क्यों है?
जब मैंने पद संभाला तो कई लोगों को लगा कि मैं सरकार चलाने के लिए बहुत अनुभवहीन हूं लेकिन आज वे ही लोग कहते हैं कि मैंने खुद को खरा साबित कर दिया है. सो, समय के साथ राय बदल सकती है. लेकिन भारत में बौद्धिक सामर्थ्य के साथ निहित स्वार्थ वाला एक समूह है जो सरदार पटेल, मोरारजी देसाई, अटल जी, आडवाणी जी और अब मेरा विरोध करता आ रहा है. अतः यह मानना उचित नहीं है कि मैं ध्रुवीकरण करने वाला व्यक्ति हूं.

क्या आप बिहार के नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार करेंगे?
राष्ट्र फैसला करेगा कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा. जो कोई प्रधानमंत्री बनेगा उसे नागरिक के रूप में मुझे स्वीकार करना होगा.

क्या आपको लगता है कि सुशासन का रिकॉर्ड ही आपको राष्ट्रीय नेता बनाने के लिए पर्याप्त है?

दोनों चीजें अलग-अलग हैं. क्रिकेट के मैच में आप किसी गोलकीपर से विकेट कीपिंग के लिए नहीं कह सकते. अगर आप गोलकीपिंग के बारे में कोई चर्चा करना चाहते हैं तो आपको क्रिकेट के बारे में नहीं बल्कि हॉकी के बारे में पूछना चाहिए.

ADVERTISEMENT
Advertisement