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बनारस ने अरविंद केजरीवाल को दिए 'रणछोड़' और 'यूटर्न' जैसे नाम

बनारस में अरविंद केजरीवाल भले ही इस बार मोदी के खिलाफ मैदान में नहीं हैं. लेकिन यहां की जनता और दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल को बार-बार याद कर रहे हैं.

फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे
फोटो सौजन्यः इंडिया टुडे

बनारस में नरेंद्र मोदी एक बार फिर से मैदान में हैं. उनके सामने कांग्रेस के अजय राय और समाजवादी पार्टी (सपा)-बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन से तेज बहादुर का नामांकन रद्द होने के बाद अब समाजवादी पार्टी से शालिनी यादव हैं . लेकिन यहां की जनता और दूसरी पार्टियों के कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल की याद बार-बार कर रहे हैं. राजनीतिक कार्यकर्ता तंज कर रहे हैं तो जनता उन पर धोखेबाज होने का आरोप मढ़ रही है. यहां के गांव लोहता की सीमा कहती हैं, '' पिछले साल तो गंगा का जल हाथ में लेकर बोले थे कि कुछ भी हो जाए बनारस नहीं छोड़ेंगे. महीनों यहीं बनारस में पड़े रहे थे. वोट तो उन्हें भी मिले थे. पर, हारने के बाद दोबारा दर्शन नहीं दिए. इस बार चुनाव लड़ने भी नहीं आए.''

सीमा के साथ खड़े राकेश कहते हैं, ''रणछोड़'' नाम दिए हैं. मतलब जो रण छोड़कर भाग जाए. अबकी लड़ने नहीं आए, मोदी से डर गए क्या? राकेश की यह बात दरअसल खीझ का नतीजा है, ''पिछली बार नरेंद्र मोदी को अरविंद केजरीवाल ने टक्कर दी थी, जहां कांग्रेस के अजय राय की जमानत जब्त हो गई थी वहीं केजरीवाल को यहां के 2 लाख नौ हजार लोगों ने वोट दिया था. अब केजरीवाल को वोट देने वाले उनकी इस दगाबाजी से नाराज हैं. चोलापुर ब्लाक के गांव भर्तरा खुर्द की शाहिदा कहती हैं, '' अरे जिस बनारस ने पहली ही बार में आप को लाखों वोट दे दिए कम से कम कभी तो उसकी सुध लेनी चाहिए थी.

अरविंद केजरीवाल तो अपनी बात से इतना पलटे हैं कि उनका नाम ही यहां सब 'यू-टर्न' रख दिए हैं. कांग्रेस से इस बार फिर मैदान में अजय राय हैं, ''वे तो सीधे कहते हैं, अरविंद केजरीवाल ने यहां की जनता को खूब ठगा, लाखों वोट लिए और चंपत हो गए. हार जीत तो राजनीति का हिस्सा है. लेकिन अपने वोटर से ऐसा दगा, अब यहां के वोटर कभी उन पर भरोसा नहीं करेंगे.''

जनवरी 2019 में जब 'आप' संयोजक संजय सिंह ने अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली की जिम्मेदारियों का हवाला देकर कहा बनारस से चुनाव न लड़ने की बात कही थी, तभी से उन पर अन्य राजनीतिक दल निशाना साध रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय सचिव आर.पी. सिंह ने उस वक्त कहा था, ''इनका कोई ठौर-ठिकाना नहीं, कभी कसम खाकर कहते हैं, कांग्रेस और भाजपा से समर्थन नहीं लेंगे, फिर कांग्रेस से समर्थन के लिए बिल्कुल डेस्परेट हो जाते हैं. कहते हैं, बनारस कभी नहीं छोड़ूंगा फिर भागकर दिल्ली आ जाते हैं, बनारस कभी नहीं जाते हैं. सच तो यह है कि केजरीवाल साहब सत्ता प्राप्ति के लिए आम आदमी का मुखौटा पहनकर आम आदमी को ही छलते हैं.'' कांग्रेस के प्रवक्ता हरनाम सिंह ने भी भाजपा प्रवक्ता की बात से सहमति जताई थी.

फिलहाल इस बार बनारस में नरेंद्र मोदी को टक्कर देने वाला कोई प्रत्याशी नजर नहीं आ रहा. गठबंधन ने पहले कांग्रेस सपा में आईं शालिनी यादव को उतारा पर एक दिन में ही उनकी जगह बीएसएफ से बर्खास्त तेजबहादुर को उतारा. लेकिन तेजबहादुर का नामांकन चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया है. अब गठबंधन की तरफ से दोबारा शालिनी यादव है. उधर अजय राय पिछले साल जमानत जब्त करा ही चुके है. हालांकि इस बार वे 'माटी के लाल' बनाम 'बाहरी' का नारा देकर मैदान में हैं.  

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