कोविड -19 के मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों और कोरोना पाजिटिव के संपर्क में आए लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के उपयोग का रास्ता साफ हो गया है. उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने एक विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है जिसमें इस बात का जिक्र है कि किस व्यक्ति को कैसे हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा दी जानी है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई है जिसके अनुसार, हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा का प्रयोग प्रोफाइलेक्सिस की तरह किया जा सकता है. प्रोफाइलेक्सिस दवाएं किसी रोग के खिलाफ शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती हैं. इस तरह बीमारी से बचाव करती हैं.
स्वास्थ्य विभाग के डाक्टर अमित गुप्ता बताते हैं कि किसी भी बीमारी से बचाव के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं को प्रोफाइलेक्सिस कहा जाता है. स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी के क्रम में यूपी स्वास्थ्य विभाग की सचिव हेकाली झिमोमी के अनुसार, इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने कोरोना संक्रमित और संदिग्ध रोगियों का इलाज कर रहे बिना बिना कोविड-19 के लक्षणों वाले (एसिम्पटोमैटिक) स्वास्थ्यकर्मियों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन टैबलेट देने के निर्देश दिए हैं.
वहीं संक्रमित रोगी के संपर्क आए बिना लक्षणों वाले घर के लोगों को भी रैपिड रेस्पांस टीम ( आरआरटी) के डॉक्टर तीन सप्ताह तक दवा देंगे. स्वास्थ्य विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि किसी भी व्यक्ति को आरआरटी डॉक्टरों की निगरानी में ही दवा दी जाएगी. डॉक्टर दवा लेने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य का परीक्षण कर डोज को नियंत्रित करेंगे. डॉ. अमित गुप्ता बताते हैं, “ब्लड प्रेशर कम होना, धड़कन का असामान्य होना, बेहोशी, सीने में कसाव होना, घबराहट, खुजली, चक्कते निकलना, पेट में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, देखने में धुंधलापन, या फिर कोविड-19 जैसे लक्षण मसलन बुखार, खांसी, सांस में तकलीफ होने पर तुंरत हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा रोक दी जाएगी.”
इसके अलावा ऐसे लोग जिन्हें रेटिनोपैथी हो या फिर ग्लूकोज-6 फॉस्फेट की कमी हो, जिन्हें कार्डियोमॉयपैथी या कार्डिक रिदम डिसऑर्डर हो या फिर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन या एमीनोक्वीनोलिन कंपाउड से एलर्जी हो और 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा नहीं दी जाएगी.
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