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ऑनलाइन प्रदर्शनी से केंद्र की ‘संजीवनी’ लपकेगा यूपी

एमएसएमई सेक्टर के लिए केंद्र सरकार के सस्ते, ज्यादा और बिना गारंटी के कर्ज के तोहफे की घोषणा के फौरन बाद यूपी अपने 90 लाख से अधिक छोटे और मंंझोले उद्योगों को इसका फायदा दिलाने में जुट गया है

फोटोः इंडिया टुडे
फोटोः इंडिया टुडे
अपडेटेड 14 मई , 2020

केंद्र सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम (एमएसएमई) उद्योगों को सस्ता, ज्यादा और बिना गारंटी के कर्ज के तोहफे की घोषणा करते ही यूपी इसका अधिक से अधिक लाभ लेने की तैयारी में जुट गया है. राज्य में इस वक्त करीब 90 लाख एमएससएमई इकाइयां सक्रिय हैं जो देश की कुल इकाइयों का 14 फीसद हैं. वहीं देश में होने वाले निर्यात में इन इकाइयों की हिस्सेदारी 10 फीसद है.

केंद्र सरकार के पैकेज की घोषणा के बाद यूपी का एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन विभाग अपनी योजना तैयार करने में जुट गया है. प्रमुख सचिव एमएसएमइ और निर्यात प्रोत्साहन विभाग नवनीत सहगल ने राज्य की पहली आनलाइन प्रदर्शनी लगाने की तैयारी शुरू की है. इसके जरिए केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमई के लिए घोषित किए गए आर्थिक पैकेज का अधिक से अधिक लाभ दिलाया जाएगा.

विभाग की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई के उत्पादों का निर्यात बढ़ाकर देश में इनकी हिस्सेदारी को आगे लाना है.

वर्ष 2019-20 के आंकड़ों के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में राज्य की एमएसएमई इकाइयों ने कुल 1.10 लाख करोड़ रुपए का निर्यात किया था. सहगल बताते हैं “एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए इनकी स्थापना और संचालन से जुड़ी तमाम कागजी कार्यवाही को कम कर दिया है. ओडीओपी उत्पादों की बिक्री के लिए ऑनलाइन कॉमर्स प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है. इसे और सक्रिय करने की रणनीति बन रही है.”

उधर देशभर की बिजली कंपनियों को दिक्कतों को दूर करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पैकेज की घोषणा से यूपी की बिजली कंपनियों (डिस्काम) ने काफी उम्मीदें लगा ली हैं.

बिजली कंपनियों को उम्मीद है कि उनके हिस्से में करीब 15 हजार करोड़ रुपए आ सकते हैं जिससे कई सारी शिकायतें कम हो सकती हैं. यूपी में विद्युत वितरण की पांच कंपनियां पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल तथा केस्को हैं. इसके अलावा पारेषण निगम, उत्पादन निगम और जल विद्युत निगम भी हैं. इस समय पांचों वितरण निगम के अलावा उत्पादन निगम भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.

प्रदेश की यह सभी कंपनियां पहले से ही 85 हजार करोड़ रुपए के घाटे में चल रही हैं.

उद्योग और व्यापार बंद होने और घरेलू बिजली बिल की वसूली न हो पाने से इन कंपनियों के सामने आर्थिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं. बिजली उत्पादन के लिए कोयला खरीदने, उत्पादन गृहों से बिजली खरीदने, कर्मचारियों को वेतन भुगतान, मेंटेनेंस का खर्च आदि में काफी दिक्कतें आ रही हैं.

एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी ऑनलाइन प्रदर्शनी का आयोजन अगले महीने कराने की योजना बन रही है. यूपी के ओडीओपी प्रकोष्ठ और हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट काउंसिल के साझा प्रयास के तौर पर अगले महीने आयोजित होने वाली अपने तरह की पहली प्रदर्शनी में प्रदेश के सभी 57 ओडीओपी उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा.

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