मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना पर लगाम लगाने के लिए आला अधिकारियों को सुविधाओं को बढ़ाने के आदेश दिए हैं. उन्होंने गांवों में हेल्थ सेक्टर को और भी मजबूत करते हुए कोरोना काल में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को “एल वन प्लस” कोविड अस्पताल में तब्दील करने के आदेश दिए हैं. ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर से लैस इन अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार से लोगों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी. उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपदों के चार सीएचसी अस्पतालों को एल वन प्लस कोविड अस्पताल में तब्दील किया जा रहा है. उसमें 50-50 बेड की सुविधा, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर और डॉक्टरों की विशेष टीम मरीजों की 24 घंटे निगरानी करेगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में एल वन प्लस अस्पतालों में बेड के साथ मरीज को ऑक्सीजन की सुविधा भी दी जाएगी. बता दें कि शहरी क्षेत्रों में जहां आइसोलेशन वार्ड को एल वन अस्पताल कहा जाता है जिसमें हल्के लक्षण वाले मरीजों को केवल बेड, उपचार और डॉक्टर की निगरानी में उसकी देख रेख की जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इस सुविधा को बढ़ाते हुए बेड के साथ ऑक्सीजन की सुविधा भी दी जाएगी. स्वास्थ्य महानिदेशक डीएस नेगी ने बताया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऑक्सीजन के लिए सीएम योगी के निर्देशानुसार 17,000 ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर के ऑर्डर दिए गए हैं जो जल्द से जल्द मिल जाएंगे.
उधर, यूपी के ग्रामीण इलाकों में निगरानी समितियां बीमारी को रोकने के लिये ढाल बन गई हैं. गांव-गांव में कोरोना वायरस के खात्मे के लिये तिगुनी ताकत से आर-पार की लड़ाई में जुटी हैं. इसके लिये योगी सरकार के निर्देशों पर 60 हजार निगरानी समितियां दिन-रात मेहनत कर रही हैं. 'टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट' के मूलमंत्र पर समितियों के 4 लाख सदस्य प्रतिदिन एक-एक व्यक्ति के घर तक पहुंच रहे हैं. राज्य में इस तरह का अभियान चलाने वाला यूपी देश का पहला राज्य है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना की चेन तोड़ने में लगी निगरानी समितियों के सदस्यों ने पिछले तीन (09 से 12 मई) दिनों में जनपदों में 3,19,37,797 मकानों का भ्रमण किया है. जिनमें लक्षित मकानों की संख्या 3,30,69,010 पाई गई है. निगरानी समितियों ने कुल 3,74,685 रोगियों तक मेडकिल किट पहुंचाने का काम किया है. जनपदों में ब्लाक तक क्रियाशील सचल कोविड टेस्ट टीमों ने 6,081 पाजिटिव केसों की पुष्टि की है. टीमों ने कुल 2,57,845 लोगों की कोविड जांच कराई गई. क्रीयाशील सचल कोविड टेस्ट टीम दिवसों की कुल संख्या 12,976 रही.
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डी. एस. नेगी बताते हैं कि कोरोना की चेन तोड़ने में लगी निगरानी समितियों के सदस्यों की ओर से परिवार के एक-एक सदस्य की जांच की जा रही है. बीमारी के लक्षण वाले लोगों को तत्काल इलाज दिलाया जा रहा है. मेडिकल किट से लेकर होमआइसोलेशन में रहने की गाइडलाइनों से परिचित कराया जा रहा है. जो घरों में आईसोलेट नहीं रह सकते हैं उनको गांव के ही विद्यालयों, सामुदायिक केन्द्रों व स्वास्थ्य केन्द्रों पर इलाज की मुफ्त सुविधाएं दी जा रही है. गौरतलब है कि इतनी तेज रफ्तार से बीमारी की रोकथाम करने में जुटी योगी सरकार के शानदार कोविड प्रबंधन को दुनिया भर में प्रशंसा मिली है. सरकार के ग्रामीण इलाकों में कोरोना के माइक्रो मैनेजमेंट का डब्ल्यूएचओ भी कायल हो चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी अपनी वेबसाइट पर यूपी सरकार के कोविड प्रबंधन की खुल कर तारीफ की है.
निगरानी समिति में लेखपाल, रोजगार सेवक, एनजीओ, एसएचजी, कोटेदार से लेकर सफाई कर्मचारी तक अहम भूमिका अदा कर रहे हैं. निगरानी समितियां होम आइसोलेट मरीजों का हालचाल ले रही हैं. रोजाना टेलीकन्सल्टेशन के माध्यम से डॉक्टर इनकी स्वास्थ्य की जानकारी हासिल कर रहे हैं. सरकार के निर्देश पर दिक्कत होने पर गंभीर रोगियों को हायर मेडिकल फैसिलिटी भी उपलब्ध कराई जा रही है. कोरोना पर लगाम लगाने के लिये निगरानी समितियां बढ़ा हथियार बन कर सामने आई है. प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 60,589 निगरानी समितयों के चार लाख से अधिक कोरोना के आगे दीवार बन कर खड़े हो गए हैं. ग्रामीण इलाकों में कोविड समेत अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए योगी सरकार ने बड़े स्तर पर स्वच्छता अभियान चला रखा है.
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