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कलकत्ता विश्वविद्यालय: नए शिखर की ओर

नैनोटेक्नोलॉजी के लिए सेंटर. 2011 में 14 पेटेंट हासिल किए. ज्ञान-विज्ञान की नई रोशनी अब भी अकसर पूरब से आती है.

अपडेटेड 23 मई , 2012

अगर कॉलेज स्ट्रीट कैंपस में स्थित उपनिवेश काल की सफेद इमारतों पर नजर दौड़ाएं तो ये कुछ ऐसा आभास देती हैं जैसे कि वे गुजरे वक्त में थमी हुई हैं. लेकिन इनका यह रूप छलावा भर है. इंडिया टुडे-नीलसन के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय सर्वेक्षण में साल-दर-साल शीर्ष पांच में शामिल रहने वाला कलकत्ता विश्वविद्यालय एक पायदान ऊपर चढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. इसे अंतर-विषयी और इनोवेटिव रिसर्च में बढ़त हासिल हुई है.

इतिहास के प्रोफव्सर और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पुराने छात्र रहे इसके कुलपति 58 वर्षीय सुरंजन दास जोर देकर कहते हैं, ''पारंपरिक विषयों और बायोलॉजिकल, सोशल और एप्लाइड साइंसेज जैसे उभरते क्षेत्रों के बीच संतुलन ने विश्वविद्यालय के विकास में योगदान दिया है.'' 2008 से ही विश्वविद्यालय के मामलों से जुड़े दास के मुताबिक, अहम बात यह है कि कोर्स, विभागों या छात्रों की संख्या बढ़ने से ही इसका आकार नहीं बढ़ा है बल्कि शैक्षिक मानकों में भी गुणात्मक सुधार आया है.UNIVERSITY OF CALCUTTA

अंतर-विषयक (एक के साथ दूसरे विषय) कार्यक्रमों की श्रृंखला की बदौलत ही विश्वविद्यालय ने अध्ययन के पारंपरिक क्षेत्रों के पुराने ठिकाने की बजाए अधिक वैश्विक और आधुनिक संस्थान के रूप में खुद में बदलाव किया है. सेंटर फॉर रिसर्च इन नैनोसाइंस ऐंड नैनोटेक्नोलॉजी अब बेसिक और एडवांस्ड साइटोमेट्री में शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग कोर्स कराता है.

साइटोमेट्री कोशिकाओं और कोशिका के अवयवों के माप और विशेषता से जुड़ा विषय है. साथ ही यह सेंटर बायोलॉजिकल रिसर्च में इमेजिंग और सेल सॉर्टिंग के एप्लिकेशंस पर वर्कशॉप भी आयोजित करता है. इस सेंटर ने सेल कल्चर के लिए एक आधुनिक केंद्र का निर्माण कराया है और इसकी 54 शोध परियोजनाएं चल रही हैं जिनसे 58 फैकल्टी सदस्य और 51 प्रोजेक्ट फेलो जुड़े हुए हैं.

डॉ. बी.सी. गुहा सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग ऐंड बायोटेक्नोलॉजी को भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने जीवन विज्ञान के अंतर-विषयी कार्यक्रमों के लिए 13.5 करोड़ रु. दिए हैं. विश्वविद्यालय के राजाबाजार साइंस कॉलेज परिसर को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से 6.15 करोड़ रु. की आर्थिक सहायता मिली है. अब परिसर में इस साल मैथमेटिकल मॉडलिंग समेत इलेक्ट्रो-फीजियोलॉजी और न्यूरो-इमेजिंग स्टडीज पर इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया जाएगा.

कलकत्ता विश्वविद्यालय की फैकल्टी नई खोजों को अंजाम देने के मामले मे भी अग्रणी है. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभागों के फैकल्टी सदस्यों ने 28 पेटेंट के लिए आवेदन किया है और इनमें से 14 मिल भी चुके हैं. कलकत्ता विश्वविद्यालय के शिक्षकों को 2011 में 109 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है.

इनमें इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की ओर से पृथा बनर्जी को मॉडर्न इंटीग्रेटेड सर्किट में उनके डॉक्टरल शोध के लिए इनोवेटिव प्रोजेक्ट अवॉर्ड 2011; भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग का डीबीटी-सीआरईएसटी अवॉर्ड डॉ. सुचरिता मित्रा (सरकार) को सस्ती ईसीजी मशीन विकसित करने की परियोजना पर; नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज का इंडिया'ज यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड बायोकेमिस्ट्री विभाग के ए. उकिल को और इंटलेक्चुअल वेंचर्स, बंगलुरू का इन्वेंशन अवॉर्ड्‌स, जो इन्वेंशन डेवलपमेंट के लिए वित्तीय और प्रशासनिक सहायता के लिए दिए जाते हैं. फैकल्टी के दो सेवानिवृत्त सदस्यों को यूजीसी ने 2012 में बेसिक साइंटिफिक रिसर्च फेलोशिप से नवाजा है.UNIVERSITY OF CALCUTTA

सीखाने के लिए शानदार फैकल्टी होने के कारण छात्रों के पास शिकायत करने के लिए कुछ खास बचता नहीं है. मास कम्युनिकेशन के दूसरे वर्ष के छात्र 23 वर्षीय संचारी बंद्योपाध्याय कहते हैं, ''शिक्षण के मानक सर्वश्रेष्ठ हैं.'' विश्वविद्यालय में  शिक्षकों की गुणवत्ता बेहतरीन है लेकिन उनकी संख्या कम है.

लाइब्रेरी और सूचना विज्ञान के प्रोफेसर 53 वर्षीय बिप्लव चक्रवर्ती कहते हैं, ''सभी विभागों में शिक्षक-छात्र अनुपात एक जैसा नहीं है. निश्चित ही विश्वविद्यालय को ज्‍यादा फैकल्टी सदस्यों की जरूरत है. लाइब्रेरी और इन्फॉर्मेशन साइंस की प्रथम वर्ष की छात्रा 25 वर्षीया पांचाली भादुड़ी बताती हैं कि बुनियादी सुविधाएं भी ऐसी चीज हैं जिस पर खास ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

वे कहती हैं, ''विश्वविद्यालय में दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में कोई संदेह नहीं है. लेकिन बेहतर बुनियादी सुविधाओं और अधिक शिक्षकों से निश्चित तौर पर मदद मिलेगी.'' उनका कहना है कि बाहर से आने वाले छात्रों को अकसर विश्वविद्यालय में छात्रावास पाने के लिए एडमिशन के बाद लगभग छह से सात महीने तक इंतजार करना पड़ता है.

कलकत्ता विश्वविद्यालय का परिसर दिल्ली विश्वविद्यालय के ट्रेंडी, आइपैडधारी युवाओं की फौज से लैस परिसर की तुलना में एकदम अलग ही नजर आता है. शालीन तरीके से सलवार कमीज या जींस और कु र्तियां पहने छात्र-छात्राओं को शायद ही टैटू या कैंपस में कभी गिटार ले जाते देखा जाता है. यहां लैंगिक अनुपात भी अच्छा है और 1,016 लड़कों पर 1,000 लड़कियां हैं.

यहां पिछड़े समुदायों के छात्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व भी शामिल है. इस विश्वविद्यालय का एक खास पहलू यह भी है कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) की टॉप रैंकिंग में चयनित सबसे अधिक छात्र इसी विश्वविद्यालय के होते हैं जो डॉक्टरेट अध्ययन के लिए सरकारी छात्रवृत्ति पाते हैं.

विश्वविद्यालय को शोध के उद्देश्य से  2011-12 में 10 करोड़ रु. का अनुदान मिला है, जिसमें 22 बड़ी और पांच छोटी शोध परियोजनाएं शामिल हैं. फिर भी फंड लगातार चिंता का कारण बना हुआ है. दास केंद्रीय और राज्‍य विश्वविद्यालयों को बांटे जाने वाले फंड की विषमता की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ''हालांकि आधे से ज्‍यादा छात्र राज्‍य विश्वविद्यालयों में चले जाते हैं और यूजीसी के 'नौ उत्कृष्टता की संभावना वाले केंद्रों' में से पांच राज्‍य के संस्थान हैं लेकिन इसका 65 फीसदी से अधिक बजट केंद्रीय विश्वविद्यालयों को जाता है.''

संयुक्त राष्ट्र एकेडमिक इंपैक्ट प्रोग्राम ने 2011 में कलकत्ता विश्वविद्यालय को दुनिया के 10 वैश्विक केंद्रों में से एक और देश के एकमात्र ऐसे विश्वविद्यालय के रूप में चुना जो शांति और संघर्ष के संकल्प पर आधारित सिद्धांतों पर काम करता है. विश्वविद्यालय को नेशनल असेसमेंट ऐंड एक्रिडिशन काउंसिल से 2010 में हुए' ग्रेड मान्यता मिल चुकी है. इसके 50 से अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों और वैश्विक संस्थानों से समझैते हैं.

इनमें ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड ब्रुक्स यूनिवर्सिटी, जापान की कानाजावा यूनिवर्सिटी के साथ सहयोगात्मक परियोजनाएं शामिल हैं. इसके अलावा आइएनएसए-जेएसपीएस एक्सचेंज प्रोग्राम भी है. इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरन पॉलिसी स्टडीज विश्वविद्यालय का प्रमुख केंद्र  है, जिसे विदेश मंत्रालय से आर्थिक मदद मिलती है.

इस संस्थान ने दिसंबर 2011 में ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर 'द एशियन सेंचुरीः सिक्युरिटी, सस्टेनिबिलिटी और सोसायटी' पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर अपने भावी एजेंडे को आगे बढ़ाया था.

दास कहते हैं, ''सीमित वित्तीय संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं के बावजूद विश्वविद्यालय अपनी ओर से हरसंभव कोशिश कर रहा है.'' विश्वविद्यालय जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उतनी ही रफ्तार से उसे वाहवाही मिल रही है.

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