राजसी रोमांस के महाकाव्य से निकली परीकथाओं की नाजुक लहरें थिंपू को सराबोर किए हुए हैं. एक किस्से के मुताबिक किसी पारिवारिक पिकनिक के दौरान जब उन्होंने एक-दूसरे को पहली बार देखा तो वह सात साल की शर्मीली-सी लड़की थी और वह 17 साल का गबरू जवान था. सितारों का मेल और ईश्वर की कृपा हुई. वह उससे चिपटकर बोली, ''मैं तुम्हारे संग चलूंगी.'' लड़का बोला, ''तुम्हारे बड़ा हो जाने तक अगर मैं कुंवारा रहा और तुम भी कुंवारी रहीं, तो मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाना चाहुंगा.''
14 साल एक झटके में बीत गए. लड़का एक सुंदर राजा बन गया और वह एक मोहिनी सुंदरी. 13 अक्टूबर को नियति ने अपना चक्र पूरा कर लिया. भूटान के ड्रैगन नरेश, 31 वर्षीय जिम्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने 21 वर्ष की आशि जेतसुन पेमा के साथ पिछले सप्ताह विवाह रचा लिया.
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इस परीकथा रोमांस को भारत के प्रतीक्षारत युवराज-राहुल गांधी से बेहतर कोई नहीं जानता है. आखिरकार, उनके पड़नाना और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1958 में इस अंतरमुखी हिमालयी देश में घूमने और इसे मित्र बनाने के लिए 27 दिन तक घुड़सवारी की थी. 14 अक्टूबर को सलीकदार नेवी ब्लू टी-शर्ट और जींस पहने राहुल गांधी ने भूटान के लिए सुबह की उड़ान पकड़ी और अपनी तरफ की खिड़की से साथ बैठी महिला यात्री को उंगलियों के इशारे से कंचनजंघा की चोटी दिखाते रहे.
15 अक्टूबर को तड़के वे इस राजसत्ता और दिव्यता 800 वर्ष पुरानी पीठ - थिंपू के ताशिछो द्जांग-में शराब चढ़ाने की निजी रस्म में शामिल हुए. राजपरिवार के बाहर से शामिल होने वाले वे एकमात्र व्यक्ति थे.
विश्व का सबसे नया लोकतंत्र आनंद से सराबोर है. नरेश की ब्रह्मांडीय धातु जल और रानी की खाम पृथ्वी है. बौद्ध ज्योतिषियों ने इसके परिपूर्ण संगम होने की घोषणा की है. इस राजसी विवाह को, जो इस वर्ष का पांचवां राजसी विवाह था, दुनिया में करोड़ों लोगों ने देखा, जिसमें 10,000 से ज्यादा स्थानीय लोग और 4,000 पर्यटक शामिल हुए, इसका संचालन 100 से ज्यादा भिक्षुओं के किया और इसकी देखरेख खुद नरेश के चुने गए 100 अधिकारियों ने की.
विवाह भोज के लिए 100 से ज्यादा रसोइयों ने 54 परंपरागत व्यंजन बनाए. सेवानिवृत्ति से वापस बुलाए गए 26 वरिष्ठ राजनर्तकियों ने, अपनी पवित्र कला शाही दंपती के समक्ष प्रस्तुत की.
इस सबका केंद्र थीं, भूटान की नई दुल्हन-महारानी जेतसुन पेमा. महारानी का वार्डरोब डिजाइन करने वाली फैशन डिजाइनर रितु कुमार के मुताबिक, महारानी ने सौंदर्य की अपनी ही शैली विकसित की है. वे कहती हैं, ''महारानी न सिर्फ अलौकिक बल्कि परिपक्वता के साथ मिठास का अनूठा मेल भी है.'' उनके व्यक्तित्व के अनुरूप ही, रितु कुमार ने महारानी के लिए बनारसी, किमखाब, चिकनकारी, गोटा और धूप-छाया फैब्रिक्स से मेल से किरा (परंपरागत स्कर्ट) तैयार किए हैं.
26 अक्टूबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
पर कई लोगों के लिए नरेश का रोमांटिक जीवन ऐसी आकर्षक गपशप का विषय रहा है कि ''वे विवाह क्यों नहीं कर रहे हैं?'' बहुत समय से यह खुसर-फुसर चली आ रही थी कि वे नई महारानी से मिलते-जुलते रहते हैं लेकिन मई, 2010 के बाद से, जब उन्होंने संसद में सब कुछ खुलेआम रख दिया था और यहां तक कह डाला था कि वह अपनी भावी दुल्हन के कितने मुरीद हैं, महारानी के बारे में चर्चाएं चलने लगी थीं. उन्होंने कभी यह भी छिपाने की कोशिश नहीं की कि वे अपनी भावी दुल्हन पर किस हद तक फिदा हैं, और हमेशा जनता के सामने उनके हाथों में हाथ डालकर पेश हुए.
नरेश के साथ 'स्नेह और सम्मान' के संबंध रखने वाले भारत के पूर्व राजदूत पवन के. वर्मा कहते हैं, ''महारानी की ननिहाल मध्यवर्ती जिले बुमतांग में है और राजघराना भी मूलतः उसी जिले का है. एक एयरलाइन में पायलट उनके पिता ने उनका पालन-पोषण सलीके से और परिपूर्ण शिष्टाचार सिखाकर किया है.'' वर्मा खुद को भाग्यशाली मानते हैं कि नरेश ने भावी दुल्हन से उनका परिचय बहुत पहले करवाया था.
नरेश के विवाह समारोह की शुरुआत इंडिया हाउस ने 10 अक्टूबर को एक भव्य भोज का आयोजन करके की. समूचे रास्ते के दोनों ओर जलते दीपक, पधारो म्हारे देस गाते राजस्थान से आए मंगाणियार लोकगायक, भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक प्रस्तुतियां कुल मिलाकर वर्मा के लिए यह एक 'भावनापूर्ण क्षण' था.
कश्मीरी कालीन, बुद्ध की कांस्य प्रतिमाएं, चांदी के मीनाकारी बर्तन और चीनी मिट्टी के पात्रों सहित भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की ओर से उपहार लेकर वर्मा गए थे. वे कहते हैं, ''मैंने उन्हें तंजावुर पेंटिंग्स दीं. नरेश को वे बहुत पसंद हैं.''
भूटान के सूचना एवं संचार मंत्रालय के अधिकारी दोरजी वांग्मो कहते हैं, ''एक-दूजे के लिए बने होने का भाव उन्हें बहुत ही आकर्षक बना देता है.'' यदि नरेश पहाड़ियों पर बाइक दौड़ाने और पैदल चलने के लिए प्रसिद्ध हैं, तो महारानी बॉस्केटबॉल की ओजस्वी खिलाड़ी हैं. अगर नरेश आइवी लीग स्कूलों में पढ़े, तो महारानी की पढ़ाई भी आलीशान विद्यालयों-थिंपू के लंगतेनजंपा, सनावर में लॉरेंस स्कूल और लंदन में रीजेंट्स कॉलेज में हुई है.
भूटान भर में लगे पोस्टर ऐलान करते हैं, ''हर जगह खुशी है.'' शाही दंपत्ति के चित्र देवदार के जंगलों, तेज बहती पहाड़ी नदियों, बौद्ध मठों और छोटी-मोटी बस्तियों से होकर गुजरती और राजधानी थिंपू में पहुंचती सभी सड़कों पर छाए हैं. याक के पनीर से बनी छुपरी चूसनियों की मालाएं दुकानों के आगे टंगी हैं. बेतरह दोमा (पान) चबा-चबाकर पीले पड़ चुके दांत दिखाती महिलाएं, पुरुष और बच्चे हाथ हिलाते हैं और मुस्कुराते हैं.
बंदनवार और झंडे हवा में फहरा रहे हैं. रास्ते भर खुशियां मनाते सैकड़ों स्कूली बच्चे हाथों में बैनर, पेंटिंग्स या चावल और अंडे का शुभ कटोरा लेकर इंतजार में खड़े हैं. राष्ट्रीय गीत 'ड्रक त्सेनधेन' (तूफानी ड्रैगन राज) की लहरियां हवा में गूंज रही हैं. शाही दंपत्ति पुरानी राजधानी पुनाखा से, जहां 13 अक्टूबर को उनका विवाह हुआ था, थिंपू में अपने महल लौट रहा है.
उस दिन लोगों ने घंटों इंतजार किया. उनके प्रेम से अभिभूत नरेश कार से उतर पड़े और उन्होंने राजधानी के प्रवेश द्वार से लेकर शहर की मुख्य सड़क-नोरजिन लाम-के अंतिम छोर तक अपनी दुल्हन के साथ पैदल चलने का फैसला किया. लोगों ने खुशियां मनाईं और नए जोड़े को उपहार दिए और 5 किमी की यात्रा सदा-सदा के लिए यादगार बन गई.
इस सबके बावजूद सुपरस्टार्स और राष्ट्र प्रमुखों की अनुपस्थित स्पष्ट झ्लक रही थी. सूचना सचिव किन्ले दोरजी बताते हैं, ''नरेश सारी चीजों को बेहद सादगीपूर्ण रखना चाहते थे. उन्होंने हमसे कहा था कि कोई भी तड़क-भड़क नहीं होना चाहिए.'' पांच वर्ष पहले सत्ता संभालने और 2008 में भूटान के लोकतंत्र में बदलने के समय से ही, नरेश दिलों पर राज करते आ रहे हैं. और अब प्रजा को परी-कथाओं की दुनिया में ले जाने के लिए उनके साथ उनकी महारानी भी है.
भूटान में विवाह का बुखार टूटते जाने के साथ भारत ने शाही दंपत्ति के एक अलग किस्म के रोमांस के लिए न्यौता दिया है. वर्मा कहते हैं , ''नरेश को ट्रेनें बहुत पसंद हैं. हमने उन्हें उनकी पहली राजकीय विदेश यात्रा के लिए, राजस्थान से होकर जाने वाली एक विशेष ट्रेन पर एक तरह के हनीमून के वास्ते बुलाया है.

