अर्थव्यवस्था पर मंदी के छाए काले बादल और राजनैतिक अनिश्चितता के हालात अमीर भारतीयों को और अधिक अमीर होने से नहीं रोक पाएंगी. भारतीयों की संपत्ति में बढ़ोतरी को लेकर हाल की दो रिपोर्टों में यही भविष्यवाणी की गई है.
कंसल्टिंग फर्म कैपजेमिनी और निवेश फर्म मेरिल लिंच वेल्थ मैनेजमेंट की विश्व की धन-दौलत संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल भारतीय दो पायदान ऊपर पहुंचकर दुनिया में हाइ नेट वर्थ इनडिविजुअल्स (एचएनआइ या मोटी कमाई करने वाले व्यक्तियों) का 12वां सबसे बड़ा समुदाय बन गए. भारत में सन् 2011 में अमेरिका और चीन के बाद अरबपतियों की सबसे ज्यादा संख्या थी.
कोटक वेल्थ मैनेजमेंट और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि सन् 2016 तक भारत में अल्ट्रा हाइ नेट वर्थ इनडिविजुअल्स (यूएचएनआइ) की संख्या 2,19,000 हो जाएगी जिसकी वजह से लक्जरी कारों, घड़ियों की खपत और दुनिया भर में सैर की चाहत में इजाफा हो जाएगा. इस रिपोर्ट में यूएचएनआइ उन व्यक्तियों अथवा परिवारों को बताया गया है जिनके पास पिछले 10 साल से औसतन 25 करोड़ रु. की धन-दौलत रही है.
मेरिल लिंच वेल्थ के प्रबंध निदेशक और प्रमुख अतुल सिंह का कहना है, ''सन् 2010 में उच्च आर्थिक विकास और बाजार पूंजीकरण में 25 फीसदी इजाफे की वजहों ने भारत की बढ़ती संपत्ति में योगदान किया.''
अमीरों की बढ़ रही संख्या केवल भारत तक ही सीमित नहीं है. दुनिया भर के आंकड़ों से पता चलता है कि एचएनआइ व्यक्तियों की संपत्ति आर्थिक विकास दर के मुकाबले तेजी से बढ़ी है. हालांकि सन् 2010 में वैश्विक अर्थव्यवस्था मात्र 2 फीसदी की दर से बढ़ी, लेकिन दुनिया के एचएनआइ व्यक्तियों की आबादी 8.3 फीसदी बढ़कर 1.09 करोड़ हो गई.
अब तक अपनी सबसे गंभीर आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे अमेरिका में एचएनआइ व्यक्तियों की दौलत में 9.1 फीसदी इजाफा हुआ. दुनिया भर के एचएनआइ व्यिक्तयों की कुल दौलत 42.7 करोड़ खरब डॉलर हो गई जबकि वह 2007 में आर्थिक संकट से पहले 40.7 करोड़ खरब डॉलर थी.
दौलत के इस हद तक बढ़ने के साथ ही भारतीयों को उसकी नुमाइश शुरू करने में कोई वक्त नहीं लगा. प्रसिद्ध मोटरसाइकिल निर्माता हर्ले डेविडसन का कहना है कि चालू वर्ष में उसकी सारी बाइक्स पहले से ही बुक हो चुकी हैं. उसकी एक मोटरसाइकिल की कीमत 5.5 लाख रु. से शुरू होकर 34 लाख रु. तक जाती है.
मोटरसाइकिल पाने की प्रतीक्षा अवधि 4-6 महीने की है और मुंबई में कंपनी के शोरूम में हर महीने कम-से-कम एक बुकिंग जरूर होती है. हर्ले डेविडसन के एक वरिष्ठ एक्जीक्यूटिव का कहना है, ''पिछले कुछ वर्षों में धन-दौलत में तेजी से इजाफा होने के साथ ही लक्जरी वस्तुओं की मांग तेजी से बढ़ी है.''
एक्सक्लूसिव लगेज और फैशन एक्सेसरीज के लिए प्रसिद्ध लुई विटॉन अपने हैंडबैगों की, जिनमें से कुछ की कीमत एक लाख रु. तक हो सकती है, जबरदस्त बिक्री के मद्देनजर देश में अपना पांचवां स्टोर खोलने वाली है. मर्सिडीज बेंज ने 2010 में अपनी 5,819 कारें बेचकर भारत में अपनी अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री दर्ज की है, जो पिछले साल की बिक्री के मुकाबले 80 फीसदी ज्यादा है. मुंबई में रहतीं इंटीरियर डिजाइनर तनाज वरियावा कहती हैं, ''20 करोड़ रु. में घर खरीदने वाले लोग रसोईघर पर 1 करोड़ रु. खर्च करने को तत्पर रहते हैं.''
लेकिन क्या लक्जरी वस्तुओं की मांग एक ही बार की घटना है अथवा इसमें बढ़ोतरी होती जाएगी? सारे संकेत यही बताते हैं कि यह मांग अभी बनी रहेगी. भारत में सबसे सफल लक्जरी ब्रांडों में से एक मों ब्लांक के बारे में बताया जाता है कि इस देश में करीब एक दशक बिताने के बात वह अपने स्थानीय साझीदार, पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी दिलीप दोशी की एनट्रैक इंटरनेशनल को खरीदकर सीधा निवेश करने के लिए तैयार है.
लक्जरी राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स (कलम इत्यादि) और एक्सेसरीज की निर्माता मों ब्लांक ने मुंबई स्थित ताजमहल होटल में एक छोटे से स्टोर से शुरुआत की थी. आज उसके पास 17 स्टोर हैं और उसे देश में लक्जरी ब्रांडों की आदर्श कंपनी माना जाता है. ब्रिटिश मोटरसाइकिल निर्माता ट्रिम्फ बढ़ती मांग के मद्देनजर बॉनविले जैसी अपनी बाइकों के लिए किसी स्थानीय वितरक की व्यवस्था करने वाली है.
कोटक-क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार मांग की वजह एचएनआइ व्यक्तियों की धन-दौलत में पांच गुना इजाफे की संभावना में निहित है. क्रिसिल की प्रबंध निदेशक रूपा कुडवा कहती हैं, ''इन अल्ट्रा-हाइ नेट वर्थ इनडिविजुअल्स की सालाना आय 3.5-4 करोड़ रु. होती है और खर्च करने की उनकी बढ़ती प्रवृत्ति से लक्जरी वस्तुओं के बाजार पर जबरदस्त असर पड़ सकता है.'' इस रिपोर्ट में लक्जरी ज्वैलरी का बाजार 229 अरब डॉलर और लक्जरी कार का बाजार 150 अरब डॉलर आंका गया है.
संपन्नता की वजह से क्रीड़ा नौका सरीखी लक्जरी वस्तुओं की मांग उफान मार रही है. लेकिन कोटक-क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, बेहद महंगी कारों और जेट (छोटे विमानों) पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमीर लोग अपना करीब एक-तिहाई पैसा इन्हीं चीजों पर खर्च कर रहे हैं. मेरिल लिंच-कैपजेमिनी की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 2010 में लक्जरी संग्रहणीय वस्तुओं, आर्ट और ज्वैलरी की मांग बढ़ गई.
बंगले के लिए बड़ी रकम
सज्जन जिंदल ने जुलाई के पहले सप्ताह में दह्निण मुंबई में नैपियन सी रोड पर समुद्र के किनारे तीन मंजिला इमारत 400 करोड़ रु. में खरीदी. वे 20,000 करोड़ रु. की जेएसडब्लू स्टील के मालिक हैं. पिछले हफ्ते 40,000 करोड़ रु. कारोबार वाले महिंद्रा ऐंड महिंद्रा समूह की रियल एस्टेट कंपनी महिंद्रा लाइफस्टाइल ने नैपियन सी रोड पर ही 270 करोड़ रु. में एक बंगला खरीदा.
उसी बंगले में कंपनी के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक आनंद महिंद्रा किराएदार के रूप में रहते हैं. जिंदल और महिंद्रा, मुकेश अंबानी, सचिन तेंडुलकर और रतन टाटा जैसे उन अमीर और मशहूर लोगों की बढ़ती जमात में शामिल हो जाएंगे जिन्होंने मुंबई में अपना स्वतंत्र बंगला हासिल कर लिया है.
अंबानी के पास अल्टामाउंट रोड पर दुनिया का सबसे महंगा घर एंटीला है. उसकी कीमत 4,500 करोड़ रु. से भी ज्यादा है. हाल ही में तेंडुलकर ने बांद्रा स्थित उस बंगले में साज-सज्जा करवाई जिसे उन्होंने 2008 में 39 करोड़ रु. में खरीदा था.
टाटा कोलाबा में समुद्र के किनारे स्थित 13,350 वर्ग फुट में फैले बंगले की साज-सज्जा को अंतिम रूप दे रहे हैं. बताया जाता है कि उन्होंने यह संपत्ति 'मामूली रकम' चुकाकर पारिवारिक लेन-देन में हासिल की है. उस जमीन का बाजार भाव 70-90 करोड़ रु. बताया जाता है.
रियल एस्टेट कंपनी सनटेक सेंट्राको के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक कमल खेतान का कहना है, ''मुंबई में खास अपना घर हासिल करने के विकल्प बहुत ज्यादा नहीं हैं और ऐसे में चंद लोगों को उसके लिए मोटी कीमत चुकाते देख ताज्जुब नहीं होता.''
संपत्ति प्रबंधन की कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष प्रणय वकील उनसे सहमति जताते हैं, ''लोगों ने बढ़िया सौदे का इंतजार करना छोड़ दिया है. उन्हें जब चाहिए, उसका मतलब है तब उन्हें मिलना ही चाहिए.'' ऐसे समय में जब मंदी की आशंका जताई जा रही है, देश के अमीरतरीन और जाने-माने लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है.
मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो देखने के लिए जाएं m.aajtak.in पर.

