गणतंत्र दिवस के मौके पर लाल किले पर उपद्रवियों की हरकत से केंद्र सरकार के कृषि बिल के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन की तपिश कुछ हल्की हुई थी. लेकिन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसुओं ने 28 जनवरी की रात अचानक माहौल बदल दिया. गाजीपुर बॉर्डर पर मीडिया से बातचीत करते हुए अचानक राकेश टिकैत रोने लगे. रोते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बरबाद करना चाहती है. बार-बार राकेश टिकैत यह कहते रहे कि किसानों के साथ धोखा हुआ है. राकेश टिकैत ने रोते हुए ही घोषणा की कि अगर किसान आंदोलन वापस नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेंगे. राकेश टिकैत की यह भावुक अपील किसानों के बीच बिजली की तरह कौंध गई. इससे न केवल किसानों को एकजुट कर दिया बल्कि टिकैत के विरोधी भी उनके समर्थन में आ गए.
राकेश टिकैत के रोते हुए वीडियो देख राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह भी साथ आ गए. उन्होंने 28 जनवरी की रात भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत से बात की. उसी रात में करीब पौने आठ बजे के बाद जयंत चौधरी ने ट्वीट भी कर दिया. वर्ष 2019 लोकसभा चुनावों में मुजफ्फरनगर सीट से रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की हार के बाद रालोद और भाकियू में काफी गहरी खाई बन गई थी. भाकियू जिलाध्यक्ष और भाकियू के बड़े नेताओं पर पर्दे के पीछे भाजपा प्रत्याशी के समर्थन के आरोप रालोद के नेता लगाते रहे हैं. पिछले करीब डेढ़ साल से रालोद और भाकियू के बीच खाई बनी हुई थी. गाजीपुर बॉर्डर पर पिछले साठ दिनों से चल रहे भाकियू के धरने के बजाए रालोद के महासचिव जयंत चौधरी बड़ौत में किसानों के धरने पर पहुंचते रहे. 28 जनवरी को राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद से रालोद के नेताओं ने भी भाकियू से अपने मतभेद फौरन भुला दिए. 28 जनवरी की देर रात सिसौली की आपात पंचायत में रालोद के वरिष्ठ नेता राजपाल बालियान भी पहुंचे और समर्थन दिया.
किसान आंदोलन के बदले रुख का असर भाकियू द्वारा बुलाई गई महापंचायत में स्पष्ट दिखाई दिया. शुक्रवार 29 जनवरी दिल्ली-उत्तरप्रदेश की सीमा पर गाजीपुर में बीकेयू के नेता राकेश टिकैत के रोने और वहां दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों को स्थानीय प्रशासन द्वारा जबरन हटाने की आशंकाओं के एक दिन बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भारी संख्या में लोग एकजुट हुए. महावीर चौक के पास जीआईसी मैदान खचाखच भरा हुआ था. लोग गाजीपुर में यूपी गेट पर प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए एकजुट हुए थे. शहर की सड़कों पर सैकड़ों ट्रैक्टरों पर तिरंगा और किसान संगठनों के झंडे लहरा रहे थे. मुजफ्फरनगर में बीकेयू के नेतृत्व में किसानों की पंचायत को राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के प्रमुख अजित सिंह ने भी समर्थन दिया और उनके पुत्र जयंत चौधरी ने भी महापंचायत में हिस्सा लिया. महापंचायत में हिस्सा लेने के लिए आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के कई नेता पहुंचे थे. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने राकेश टिकैत से बात की है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसान नेताओं को जिस तरह आरोपित व प्रताड़ित किया है, वो पूरा देश देख रहा है.
किसान आंदोलन से निबटने का सरकार का अदूरदर्शी रवैये ने भी किसानों को सरकार के खिलाफ लामबंद किया. सरकार ने किसानों का पानी बंद कर दिया था. आंदोलनकारियों के लिए पानी जैसी मूलभूत सुविधा हटा लिए जाने के बाद यह संदेश गया है कि सरकार ने अपनी तरफ से आंदोलनकारियों को कोई भी सहयोग देना बंद कर दिया है. इसे देखते हुए राकेश सिंह टिकैत ने घोषणा की थी कि अब उनके घर से पानी आएगा तभी वे जल ग्रहण करेंगे. इस अपील को देखते हुए यूपी बॉर्डर पहुंच रहे किसान अपने साथ पानी की बोतलें लेकर पहुंचने लगे. कई किसान अपने साथ पराठे, छाछ, दही, चूड़ा और अन्य सामान लेकर भी पहुंचे.
राकेश सिंह टिकैत के नाम में जुड़े 'टिकैत' शब्द किसी जाति का सूचक नहीं है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब-हरियाणा के क्षेत्रों में इस शब्द का प्रयोग उन जातीय नेताओं के लिए किया जाता था, जिनका चयन जाति विशेष के नेता एक पंचायत के माध्यम से किया करते थे. माना जाता था कि यह नेता जातीय हितों-परंपराओं की रक्षा के लिए अपनी कही गई बात पर हमेशा टिका रहेगा. इसीलिए उसे टिकैत का नाम दिया जाता था इसका अर्थ होता था जो अपनी बात पर टिका रहे. बाद में टिकैत चौधरी चुनने की परंपरा भी वंशानुगत हो गई, जिसे पहले तो राकेश सिंह टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत ने अपनाई. उपनामों के चयन पर कोई प्रतिबंध न होने के कारण बाद में महेंद्र सिंह टिकैत के सभी बेटों ने भी इसे अपने नाम के साथ जोड़ लिया. राकेश सिंह के नाम में 'टिकैत' शब्द इसी क्रम में शामिल किया गया है. राकेश सिंह टिकैत के साथ जिस तरह जनभावनाओं की ज्वार उमड़ा है उसने किसानों के बीच इनकी छवि में बेहद सुधार किया है. किसानों से मिले समर्थन के बद पर राकेश टिकैत ने आंदोलन को और तेज करने की तैयारी कर दी है. जिस तरह से विपक्षी नेताओं के साथ किसानों का समर्थन राकेश टिकैत को मिला है उससे स्पष्ट है कि आने वाले दिन सरकार के लिए कठिन होने वाले हैं.
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