लखनऊ से सुल्तानपुर हाइवे पर 12 किलोमीटर दूर गोसाईगंज के चांदसराय इलाके में अचानक से मशीनों की गड़गड़ाहट बढ़ जाती है. हाइवे पर दोनों तरफ बड़े-बड़े पिलर दिखाई देने लगते हैं. यह वह जगह है जहां से गाजीपुर को जाने वाले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए लिंक रोड का निर्माण हो रहा है. इस सुल्तानपुर हाइवे के दूसरे किनारे पर मौजूद एक निजी इंजीनिरिंग कॉलेज में बीटेक तीसरे वर्ष की छात्रा मनीषा राय की तो खुशी का ठिकाना ही नहीं है. कोरोना संक्रमण में छह महीने से ज्यादा बंद रहे कॉलेज के बाद पिछले महीने 26 अक्तूबर को मनीषा का कॉलेज खुला. मनीषा कॉलेज के गेट पर पहुंची तो वहां से कुछ दूरी पर चल रहे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ऐंट्री प्वाइंट पर काफी निर्माण हो चुका था. मनीषा ने फौरन अपने मोबाइल से कुछ दूरी पर लगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बोर्ड के पास जाकर सेल्फी ली और गाजीपुर में रहने वाले अपने परिवारीजनों के पास भेजी. मनीषा कहती हैं, "लखनऊ से ट्रेन और उसके बाद बस से गाजीपुर के जमानिया में अपने घर जाने में मुझे 12 घंटे लगते हैं. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बनने के बाद पांच से छह घंटे में मैं लखनऊ में अपने कॉलेज से घर पहुंच जाउंगी."
अगर सरकारी तैयारियों पर भरोसा किया जाए तो अगले वर्ष गणतंत्र दिवस से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर वाहन फर्राटा भरने लगेंगे. एक्सप्रेस-वे के कुछ पैकेज पर करीब 63 तो कुछ पर 70 फीसद तक कार्य पूरा हो चुका है. इसके साथ ही पुलों व फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है. गाजीपुर के हैदरिया से लखनऊ के चांदसराय तक कुल 341 किलोमीटर लम्बे 6 लेन (आठ लेन तक बढ़ाए जा सकने वाले) के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के विकास के लिए योगी सरकार के द्वारा सुल्तानपुर, आंबेडकर नगर, अमेठी और अयोध्या के अतिरिक्त आर्थिक रूप से कम विकसित जनपदों आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर को प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जोड़ने के लिए कराया जा रहा है. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ-सुल्तानपुर रोड (एन.एच.-731) पर स्थित ग्राम चांदसराय, जनपद लखनऊ से प्रारंभ होकर यूपी-बिहार सीमा से 18 किमी पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-31 पर जनपद लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, आंबेडकर नगर, आजमगढ़, मऊ तथा गाजीपुर लाभान्वित होंगे.
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को कुल 8 पैकजो मे विभक्त किया गया है. इस परियोजना में क्लीयरिंग ऐंड ग्रबिंग का कार्य 100 प्रतिशत, मिट्टी का कार्य 92 प्रतिशत, भौतिक प्रगति लगभग 62 प्रतिशत पूर्ण हो चुकी है. सरकारी तैयारियों के अनुसार, अगले वर्ष जनवरी 2021 में एक्सप्रेसवे का मुख्य मार्ग यातायात के लिये खोल दिया जायेगा. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र प्रदेश की राजधानी एवं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से देश की राजधानी से त्वरित एवं सुगम यातायात के कॉरिडोर से जुड़ जाएगा. 'उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवेज डेवलेपमेंट अथॉरिटी' (यूपीडा) के सीईओ और अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रगति की रोज समीक्षा कर रहे हैं. 7 नवंबर को अवस्थी आइआइडीसी आलोक टंडन के साथ लखनऊ से गाजीपुर के हैदरिया तक निर्माणाधीन पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के पैकेज तीन का निरीक्षण व समीक्षा करने बल्दीराय के बड़ाडाड़ पहुंचे. समीक्षा में पैकेज तीन पर 70 फीसद व पैकेज चार पर अधिक कार्य पूरा पाया गया. समीक्षा व निरीक्षण में अपर मुख्य सचिव ने पैकेज चार का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए फर्म को तीन सप्ताह का समय दिया है. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सब कुछ ठीक रहा तो 26 जनवरी 2021 से सिक्सलेन पर वाहन दौड़ने लगेंगे. इसकी कोशिश शासन की ओर से लगातार की जा रही है. अवस्थी ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के सेतुओं और आरओबी के कार्यों में और तेजी लाई जाएगी. निर्माण कार्य की रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है. गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. फिलहाल अपर मुख्य सचिव के दावे के बीच कुछ पैकेज पर करीब 40 फीसद व कुछ पर 30 फीसद कार्य ढाई माह में पूरा कराने की चुनौती है. इसके साथ ही अधूरे सेतुओं व आरओबी का निर्माण पूरा कराने का भी कम कठिन नहीं है.
उधर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को गोरखपुर से जोड़ने के लिए भी लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया जा रहा है. गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए घाघरा नदी पर विशाल पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है. घाघरा नदी पर इस पुल का निर्माण काफी मुश्किल काम मान जाता है. इस पुल के बनने के बाद गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा.
यूपीडा के मुताबिक, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के तेज निर्माण के लिए वर्तमान मे लगभग 1,750 श्रमिक, 370 तकनीकी स्टाफ एवं 720 मशीनरी कार्यरत हैं. लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण दो पैकेजों में कराया जा रहा है. इस परियोजना के लिए कुल 1,094.65 हेक्टेयर जमीन चाहिए, इसमें से 994.68 हेक्टेयर जमीन (90.87 प्रतिशत ) क्रय/अधिग्रहीत की जा चुकी है.
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे प्रवेश नियंत्रित परियोजना (ग्रीन फील्ड) परियोजना गोरखपुर में गोरखपुर बाईपास एनएच 27 ग्राम-जैतपुर के पास से शुरू हो रही है. वहीं यह आजमगढ़ में ग्राम सालरपुर के पास खत्म होगा. 91.352 किमी का गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे यहीं पर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा. इस परियोजना से गोरखपुर, आंबेडकर नगर, संतकबीर नगर, आजमगढ़ के लोग सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए लखनऊ और उसके आगे आगरा होते हुए नोएडा तथा दिल्ली जा सकेंगे. यह एक्सप्रेसवे 4 लेन चौड़ा (6 लेन में विस्तारणीय) होगा तथा संरचनाएं 6 लेन चैड़ाई की बनायी जायेंगी.
परियोजना से लाभः-
#एक्सप्रेसवे के निर्माण से गोरखपुर क्षेत्र पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से लखनऊ, आगरा एवं दिल्ली तक त्वरित एवं सुगम यातायात कॉरिडोर से जुड़ जाएगा.
#एक्सप्रेसवे के निर्माण से गोरखपुर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा. एक्सप्रेसवे के प्रवेश नियंत्रित होने से वाहनों के ईंधन खपत में महत्वपूर्ण बचत, समय की बचत एवं पर्यावरणीय प्रदूषण का नियंत्रण भी संभव हो सकेगा.
#परियोजना से अच्छादित क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के साथ ही कृषि, वाणिज्य, पर्यटन तथा उद्योगों की आय को बढ़ावा मिलेगा.
#एक्सप्रेसवे से आच्छादित क्षेत्रों में स्थित विभिन्न उत्पादन ईकाईयों, विकास केन्द्रों तथा कृषि उत्पादन क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजधानी से जोड़ने हेतु एक औद्योगिक काॅरिडोर के रूप में सहायक होगा.
#एक्सप्रेसवे के निकट इंडस्ट्रीयल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेडिकल संस्थान आदि की स्थापना हेतु भी अवसर सुलभ होंगे.
#एक्सप्रेसवे खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों, भंडारण ग्रह, मंडी तथा दुग्ध आधारित उद्योगों की स्थापना हेतु एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा.
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