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मोदी के बजट ने बढ़ा दी योगी की चुनौतियां

कोविड महामारी से चौपट हुई कारोबारी गतिविधि‍यों ने केंद्रीय करों में यूपी की हिस्सेदारी को पांच साल पीछे के स्तर पर पहुंचा दिया है. वर्ष 2017-18 के बजट में यूपी सरकार को केंद्रीय करों से 1,20,939.14 करोड़ रुपए मिले थे जबकि नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में केंद्रीय करों से राज्य सरकार को 1,19,395.30 करोड़ रुपए मिलेंगे.

पिछले वर्ष यूपी का बजट पेश करने जाते व‍ित्त मंत्री सुरेश खन्ना के साथ मुख्यमंत्री योगी
पिछले वर्ष यूपी का बजट पेश करने जाते व‍ित्त मंत्री सुरेश खन्ना के साथ मुख्यमंत्री योगी
अपडेटेड 3 फ़रवरी , 2021

चुनावी वर्ष में प्रवेश कर चुकी यूपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बजट ने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं. कोविड महामारी से चौपट हुई कारोबारी गतिविधि‍यों ने केंद्रीय करों में यूपी की हिस्सेदारी को पांच साल पीछे के स्तर पर पहुंचा दिया है. केंद्रीय करों से राज्य सरकार को वर्ष 2017-18 में जो हिस्सेदारी मिली थी नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में उससे भी कम मिलने का अनुमान केंद्रीय बजट में लगाया गया है. वर्ष 2017-18 के बजट में यूपी सरकार को केंद्रीय करों से 1,20,939.14 करोड़ रुपए मिले थे जबकि नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में केंद्रीय करों से राज्य सरकार को 1,19,395.30 करोड़ रुपए मिलेंगे.

इससे पहले केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में केंद्रीय करों में से यूपी के लिए 1.40 लाख करोड़ रुपये की हिस्सेदारी तय की थी. लेकिन कोरोना महामारी के कारण संशोधित बजट में यूपी की हिस्सेदारी 41,993 करोड़ रुपये घटाकर 98,618 करोड़ रुपये कर दी गई है. वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय करों में यूपी की हिस्सेदारी करीब 1.19 लाख करोड़ रुपये रखने का प्रस्ताव किया गया है, जो चालू वित्त वर्ष 2020-21 की अनुमानित हिस्सेदारी से 21,216 करोड़ रुपये कम है. दोनों को जोड़कर देखें तो प्रदेश को सीधे तौर पर 63,209 करोड़ रुपये कम मिलने की नौबत आ गई है. केंद्रीय बजट में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने के बाद यूपी में बजट पेश करने की तैयारी में जुटी योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने कई चुनौतियां आ गई हैं. कारोबारी गतिविधि‍यों पर कोरोना का प्रभाव, केंद्रीय बजट से उम्मीद से कम आवंटन और आगामी वित्त वर्ष में पंचायत से लेकर विधानसभा तक के चुनाव ने योगी आदित्यनाथ की सरकार के आगामी बजट में पैसे के प्रबंधन को लेकर मुश्क‍िलें पेश कर दी हैं. राज्य के स्वयं के कर राजस्व में भी चालू वित्त वर्ष के अनुमान की अपेक्षा 30 से 35 प्रतिशत तक कमी के संकेत हैं. राज्य सरकार के आगामी बजट में पुनरीक्षित अनुमान में राजस्व में कमी स्पष्ट हो सकेगी. ऐसे में योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने चालू वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित योजनाओं व परियोजनाओं के लिए प्रावधान के हिसाब से आवंटन की चुनौती बढ़ गई है.

प्रदेश में पांच-पांच एक्सप्रेस-वे, अंतरराष्ट्रीय स्तर के तीन एयरपोर्ट (जेवर, अयोध्या और कुशीनगर एयरपोर्ट) के साथ डेढ़ दर्जन जिलों में उड़ान योजना के तहत निर्माण, कानपुर, आगरा सहित कई शहरों में मेट्रो सहित कई हजार करोड़ रुपये के बजट प्रावधान वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर के तमाम प्रोजेक्ट व कई राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना की कार्रवाई पहले से ही चल रही है. इनके लिए भी योगी सरकार को बजट प्रबंध करना होगा. वित्त विभाग के एक अधि‍कारी बताते हैं, “सरकार ने निवेश व रोजगार को प्रोत्साहन के लिए करीब डेढ़ दर्जन सेक्टोरल नीतियां बनाई हैं. बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट स्थापित हो रहे हैं. निवेशकों की वित्तीय सहूलियतों को लेकर किए वादों के लिए बजट प्रावधान करना है. इसी तरह मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, जल जीवन मिशन सहित केंद्रीय सहायता वाली योजनाओं व परियोजनाओं के लिए राज्यांश मद से बड़ा आवंटन करना है. केंद्र की घोषित कई नई योजनाओं के साथ इस पर भार और बढ़ना ही है. ऐसे में वित्त वर्ष 2021-22 के चुनावी बजट के लिए संसाधनों की चुनौती बढ़ गई है.”

कोरोना संक्रमण फैलने के बाद राज्य सरकार ने विधायकों की विधायक निधि‍ पर रोक लगा दी थी. अब नए वित्तीय वर्ष में विधायक अपनी नि‍धि‍ के दोबारा शुरू होने की आस लगाए हुए है तो कर्मचारी भी डीए का इंतजार कर रहे हैं. चुनावी वर्ष में योगी सरकार अपने बजट में लोकलुभावने वादे भी करना चाहती है, उसके लिए भी बजट का इंतजाम करना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है. ऐसे में अर्थव्यवस्था की बदहाली, कर्जभार बढ़ने के अनुमान के बीच चुनाव के लिहाज से सरकार किस तरह बजट तैयार करती है, इससे ही योगी सरकार की कुशलता जाहिर होगी.

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