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यूपी का मिशन शक्ति‍ अभि‍यान: औसतन हर दिन 25 अपराधियों पर कार्रवाई, 19वें दिन एक को फांसी

महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के उद्देश्य से योगी सरकार ने शारदीय नवरात्र से बासंतिक नवरात्र तक चलने वाले “मिशन शक्त‍ि अभि‍यान” की शुरुआत की है. 17 अक्तूबर, 2020 से तीन मार्च 2021 तक प्रदेश में कुल 3,440 अ‍पराधि‍यों पर हुई कार्रवाई.

यूपी का मिशन शक्ति अभियान
यूपी का मिशन शक्ति अभियान
अपडेटेड 6 मार्च , 2021

महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के उद्देश्य से योगी आदित्यनाथ सरकार ने 17 अक्तूबर से 'मिशन शक्ति' का आगाज किया. शारदीय नवरात्र से बासंतिक नवरात्र तक चलने वाले इस 180 दिवसीय अभियान के दौरान प्रदेश के समस्त 75 जनपदों, 521 ब्लॉकों, 59,000 पंचायतों, 630 शहरी निकायों और 1,535 थानों के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण, सुरक्षा एवं सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाने के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी में चलाये गये मिशन शक्ति अभियान के दौरान महिला एवं बाल अपराधों में प्रभावी अभियोजन के माध्यम से इन अपराधों में लिप्त अपराधियों को अधिकतम सजा दिलाने की दिशा में गृह विभाग ने प्रयास किए हैं. इसी का नतीजा है कि अभियान अवधि में जनपद हापुड़, हाथरस, रायबरेली, बांदा, गाजियाबाद, हरदोई में विभिन्न अभियोगों में 7 अपराधियों को फांसी की सजा से दंडित कराया जा चुका है.

अपर मुख्य सचिव गृह, अवनीश कुमार अवस्थी एवं प्रमुख सचिव, न्याय एवं विधि परामर्शी, श्री प्रमोद कुमार श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त रूप से अभियोजकों के कार्यों की वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से पिछले दिनों गहन समीक्षा की गई थी. गृह विभाग के एक अधि‍कारी बताते हैं, “समीक्षा के दौरान अधि‍कारियों को निर्देश दिये गये कि बलात्कार सहित हत्या के मामलों में ऐसे मामले जो विरले से विरले पाये जायें, अभियोजन विभाग उनमें मृत्युदंड की सजा सुनिश्चित कराने के हर संभव प्रयास करे ताकि अपराधियों के बीच यह संदेश स्पष्ट एवं मुखर रूप से पहुंचे कि यदि उनके द्वारा ऐसा जघन्य अपराध किया जायेगा तो उन्हें प्रत्येक दशा में मृत्युदंड ही मिलेगा.” अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने बताया कि मिशन शक्ति अभि‍यान के दौरान दिनांक 17 अक्तूबर 2020 से 3 मार्च 2021 तक प्रदेश में 7 अपराधियों को फांसी के अलावा महिला एवं बाल अपराध के 435 अपराधियों को आजीवन कारावास तथा 394 अपराधियों को 10 वर्ष से अधिक कठोर कारावास तथा 1,108 अपराधियों को 10 वर्ष से कम कारावास तो कराया ही गया, साथ ही शोहदे और गुंडे किस्म के 1,503 अपराधियों को जिलाबदर भी कराया जा चुका है. इस तरह मिशन शक्त‍ि अभियान के 138 दिनों के दौरान कुल 3,440 अपराधि‍यों पर कार्रवाई हुई है. आंकड़ों को दिन के हिसाब से देखा जाए तो औसतन रोज 25 अपराधि‍यों पर कार्रवाई हुई और हर 19वें दिन एक अपराधी को फांसी की सजा दिलाई गई है.

अभियान के दौरान अब तक लगभग 10 हजार ऐसे अपराधियों की जमानतें भी खारिज करायी जा चुकी हैं. अपर पुलिस महानिदेशक, अभियोजन, आशुतोष पांडेय ने बताया कि अभियान के दौरान विभिन्न संवेदनशील प्रकरणों में तथा ऐसे मामलों में जिन्होंने समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था, उनमें अभियोजन द्वारा सजा करायी गयी. आशुतोष पांडेय द्वारा उदाहरण के रूप में जनपद अलीगढ़ के थाना इगलास के एक मामले का जिक्र गया, जिसमें एक बच्ची को अगवा किया गया था और मामला 11 साल से लंबित था जिसमें अभियोजन द्वारा मिशन शक्ति के अन्तर्गत तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा से दंडित कराया गया. इसी तरह जनपद मुरादाबाद के एक मामले में जहां पीड़िता के साथ बलात्कार के बाद उसका गला अपराधी ने काट दिया था लेकिन मृत्युशैया पर पीड़िता ने इशारे से आरोपी की ओर उंगली से इशारा कर अपने जुल्म की दास्तान बयान की और इसी मृत्युकालिक कथन के आधार पर अभियोजन ने आरोपी को उम्रकैद की सजा करायी गयी. पांडेय बताते हैं, “मिशन शक्ति अभियान के दौरान हत्या सहित दुष्कर्म करने वाले मुंहबोले चाचा का मामला हो या अयोध्या के हैदरगंज थाने में दुराचार करने वाले पिता को दंडित कराने का मामला हो, अभियोजन ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कराते हुए दोषियों को आजीवन कारावास से दंडित कराया है.” पांडेय जनपद मिर्जापुर के मड़िहान थाने के एक मामले का जिक्र करते हैं जिसमें एक 6 साल की एक मूकबधिर बालिका के साथ दुष्कर्म किया गया था. इस मामले में अभियोजन द्वारा मात्र 23 दिनों की सुनवाई में ही दोषी को आजीवन कारावास से दंडित कराया गया तथा पीड़ित परिवार को तत्काल ढाई लाख रू. उसके खाते में उपलब्ध कराये गये. बाल एवं महिला अपराध के अपराधियों को आजीवन कारावास कराने में बलिया अव्वल रहा, जहां 32 अपराधियों को सजा करायी गयी, वहीं दूसरे स्थान पर आगरा 22 सजा कराकर रहा तथा तीसरा स्थान 21 आजीवन कारावास कराते हुए फतेहपुर ने प्राप्त किया. समीक्षा के दौरान अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि वे महिला के मान सम्मान के लिये अपना संघर्ष जारी रखें ताकि उत्तर प्रदेश अभियोजन भारत का नंबर एक अभियोजन के रैंक पर बरकरार रहे.    

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