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दिल्ली में दलितों के पेट से निकलेगा भाजपा की जीत का रास्ता?

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दलित मोर्चे ने दिल्ली में पार्टी को जिताने के लिए अपना पूरा दमखम झोंक दिया है. अब देखना यह है कि दिल्ली के दलित भाजपा की सियासी खिचड़ी को पकने देंगे या फिर बिगाड़ेंगे स्वाद.

दलित वोटों के लिए सियासी 'समरसता भोज'
दलित वोटों के लिए सियासी 'समरसता भोज'

दिल्ली की 12 विधानसभा सीटें अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए सुरक्षित हैं. ऐसे में राजधानी में दलित वोट जीत के लिए बेहद अहम है. भाजपा के दलित मोर्चे ने मंडल स्तर तक 'समरसता भोज' का आयोजन करने के साथ ही वार्ड स्तर तक जाकर पार्टी की दलित हितैषी छवि बनाने के लिए जी-तोड़ मेहनत की. दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से टिकट कटने से नाराज पूर्व भाजपाई और हाल ही में कांग्रेसी हुए उदित राज ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दलित मोर्चे ने दिल्ली में पार्टी को जिताने के लिए अपना पूरा दमखम झोंक दिया है. मोहनलाल गिर कहते हैं, ''दलित मोर्चे ने तो जनवरी में ही रामलीला मैदान से चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी थी. दरअसल, रामलीला मैदान में जनवरी, 2019 में आयोजित भीम महासंगम कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दलितों के लिए खिचड़ी पकाई. स्वाद और सियासत से भरपूर इस खिचड़ी कार्यक्रम का आयोजन भाजपा के दलित मोर्चे ने किया था. दलित मोर्चे के अध्यक्ष मोहनलाल गिर ने उस वक्त ही तैयारी कर ली थी कि लोकसभा चुनाव तक इस सियासी खिचड़ी की खुशबू को कम नहीं होने देनी है. इस जज्बे के साथ भाजपा के दलित मोर्चे ने फरवरी से मार्च के बीच दिल्ली में मंडल स्तर पर लोगों के बीच जाकर स्वादिष्ट और सियासी खिचड़ी पकाई. दरअसल इस कार्यक्रम को नाम दिया गया 'समरसता भोज'. मोहन लाल गिर कहते हैं, '' दिल्ली में करीब 21-22 फीसदी वोटर दलित हैं. ऐसे में पार्टी के दलित मोर्चे की जिम्मेदारी तो बढ़ ही जाती है.''

वे कहते हैं, ''रामलीला मैदान की तरह ही हमने यहां पर दलितों के घर से लाई गई खिचड़ी का इस्तेमाल किया. भीम महासंगम में खिचड़ी बनाने के बाद बची सामग्री का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं हो सकता था.'' लेकिन दलितों के घर-घर तक पहुंचने की गहन रणनीति के बीच पूर्व भाजपा सांसद उदित राज की बयानबाजी पार्टी के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है. उदित राज ने ट्वीटर पर भी भाजपा विरोधी अभियान छेड़ रखा है. उदित राज ने 8 मई को एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने यहां तक कहा कि भाजपा 'गूंगे और बहरे' दलितों को पसंद करती है. उसे आवाज उठाने वाला दलित नेता पसंद नहीं हैं. लेकिन दलित मोर्चा अध्यक्ष मोहन गिर को भरोसा है कि दिल्ली के ही नहीं बल्कि देशभर के दलितों के बीच भाजपा की चुनावी खिचड़ी पक चुकी है. नतीजे उन लोगों के लिए जवाब देंगे जो लगातार भाजपा पर दलित विरोधी पार्टी होने का आरोप लगा रहे हैं.

घर-घर पहुंचा दलित मोर्चा

-सातों जिलों में हर मंडल के दलित वार्ड चिन्हित किए गए. एक मंडल में तकरीबन 40-42 वार्ड हैं. हर मंडल पर दलित मोर्चे का कार्यालय है. खासतौर पर दलित आबादी वाले इलाकों में तो वार्ड स्तर तक कार्यालय हैं. मंडल स्तर तक टीमें भेजी गईं. सभाओं और चौपाल के जरिए कार्यकर्ता इनसे मिले.

-इसके बाद वार्ड के लिए टीमें बनाकर घर-घर तक दलित मोर्चे के कार्यकर्ताओं ने लोगों से मुलाकात की.

-वार्ड से लेकर मंडल स्तर तक और फिर जिला स्तर की व्यापक रिपोर्ट बनाई गई. राज्य स्तर पर इसका अध्ययन करने के बाद कार्यकर्ताओं को उन जगहों पर दोबारा जाने को कहा गया जहां पर लगा अभी और गहन चर्चा की जरूरत है.

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