केंद्र सरकार के 1.5 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए पर लगी रोक के बीच कर्मचारी संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि यदि सरकार वेतन के साथ डीए देने में असमर्थ है तो वह डीए को प्रोविडेंड फंड में जमा कर दे. बीएसएनएल, बीमा कर्मचारी संगठनों के बाद अब इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन ने डीए पर लगी रोक पर आपत्ति तो जताई है लेकिन सरकार को यह सुझाव दिया है कि, यदि सरकार को वेतन के साथ डीए देने में दिक्कत है तो इसे प्रोविडेंड फंड में जमा करा दे.
रेलवे एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा है कि कोरोना संकट के इस माहौल में रेलवे कर्मचारी जरूरी सामग्रियों को पहुंचाने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रहा है. ऐसे में यदि डीए और वेतन में कटौती होती है तो इससे कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ेगा. पत्र में यह भी कहा गया है कि जब खुद प्रधानमंत्री प्राइवेट सेक्टर से यह कह रहे हैं कि वह अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं काटें तो ऐसे में सरकारी कर्मचारियों के भत्ते में कटौती करना मुनासिब नहीं है. जब सरकार ही कटौती कर रही है तो फिर प्राइवेट फर्म कटौती क्यों नहीं करेंगे.
पत्र में कहा गया है कि सरकार के इस फैसले से 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक रिटायर होने वाले कर्मचारियों का बड़ा नुकसान होगा क्योंकि ग्रैच्यूटी और लीन इनकैशमेंट का बड़ा नुकसान होगा क्योंकि इसमें डीए भी जुड़ा रहता है.

