जब दिग्गज राजनीतिक जेल में बंद हो रहे हैं, ऐसे समय में दिल्ली की तिहाड़ जेल को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर जहां दिल्ली की यह प्रसिद्ध जेल राज्यसभा सांसद अमर सिंह, पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री ए. राजा, कांग्रेस के सांसद सुरेश कलमाडी और द्रमुक सांसद कणिमोलि जैसी हस्तियों के अपने यहां कैद होने पर नाज कर रही थी, वहीं दूसरी ओर बंगलुरू की परप्पना अग्रहारा जेल में जाने वाले राजनीतिकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.
पूर्व मुख्यमंत्री और दक्षिण में भाजपा के शुभंकर बी.एस. येद्दियुरप्पा उसमें जाने वाले नवीनतम कैदी हैं. उनके मंत्रिमंडल के दो अन्य सदस्य-पूर्व उद्योग मंत्री कट्टा सुब्रमण्य नायडू और पूर्व मुजराई (धर्मादा) मंत्री कृष्णैया शेट्टी भी उनके साथ अंदर हैं.
सभी राजनीतिक परप्पना अग्रहारा जेल के एक ही ब्लॉक में बंद हैं. येद्दियुरप्पा को सर्वाधिक सुरक्षा मिल रही है. उन्हें कोठरियां दी गई हैं जिनके साथ में शौचालय हैं और उन्हें कभी-कभी टेलीविजन सेट भी मिल जाता है. उनके साथ कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं. पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट में गैरकानूनी खनन और जमीन हथियाने के मामले में नाम आने के बाद जनार्दन रेड्डी के भाई और पूर्व राजस्व मंत्री करुणाकर, उनके सहयोगी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलु और वर्तमान आवास मंत्री वी. सोमन्ना भी घिर गए हैं. उनके अलावा पूर्व खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री एच. हलप्पा बलात्कार के एक मामले का सामना कर रहे हैं. उन्हें भी कैद हो सकती है.
येद्दियुरप्पा का तत्कालीन 28 सदस्यीय मंत्रिमंडल अपराधियों की तस्वीरों के संग्रह की तरह लगता है. कर्नाटक के एक मंत्री का कहना है, ''पहले लोग बिहार और उत्तर प्रदेश को भ्रष्ट राजनीतिकों का अड्डा कहते थे. आज उन राज्यों की जगह कर्नाटक ने ले ली है. इन सभी घोटालों के सामने आने के बाद हमारे राजनीतिक ही नहीं, हमारे अधिकारियों के साथ भी उपेक्षापूर्ण बर्ताव किया जा रहा है.'' इस बार येद्दियुरप्पा के उत्तराधिकारी डी.वी. सदानंद गौड़ा के मंत्रिमंडल के एक अन्य मंत्री सी.पी. योगेश्वर कॉर्पोरेट धोखेबाजी का सामना कर रहे हैं और उन्हें भी जेल भेजा जा सकता है.
मंत्रियों का मानना है कि सूचना का अधिकार मिलने के साथ ही ढेर सारे घोटाले सामने आने और सभी घटनाओं के बारे में टेलीविजन पर विस्तार से बताए जाने की वजह से राजनेताओं की गिरफ्तारी संभव हो सकी. उस मंत्री का कहना है, ''अण्णा हजारे के आंदोलन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों के आक्रोश के बाद न्यायपालिका भी बहुत सक्रिय हो गई है. येद्दियुरप्पा के खिलाफ एक निजी शिकायत पर दीवानी मामला दर्ज किया गया था. उनको जमानत देने से इनकार करने की कोई जरूरत नहीं थी, लेकिन न्यायाधीश ने हवा का रुख देखकर फैसला सुनाया.''
सत्तारूढ़ और विपक्षी सदस्यों के मुताबिक, येद्दियुरप्पा की गलती यह है कि उन्होंने और उनके पुत्रों-लोकसभा सांसद बी.वाई. राघवेंद्र और बी.वाई. विजयेंद्र-ने भ्रष्टाचार के ढेर सारे कागजी सबूत छोड़ दिए, जिसे लोगों ने आरटीआइ का इस्तेमाल करके सार्वजनिक कर दिया. एक अन्य मंत्री का कहना है, ''पुराने राजनीतिकों को अधिकारी सिखाते थे कि ऐसे सौदे कैसे किए जाएं जिसमें कोई सबूत न बचे. लेकिन हमें किसी ने नहीं बताया और इसी वजह से हमारे साथी पकड़े जा रहे हैं.''
भ्रष्टाचार के मामलों सिर्फ येद्दियुरप्पा और उनके भाजपा के मंत्री ही नहीं घिरे हैं बल्कि जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और उनकी विधायक पत्नी अनिता भी येद्दियुरप्पा जैसे मामले का सामना कर रहे हैं और उन्हें भी जेल की हवा खानी पड़ सकती है. कुमारस्वामी के भाई बालकृष्ण गौड़ा के यहां भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा था. देश और खासकर प्रदेश में जनमानस को देखते हुए लगता है कि उन्हें भी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सकता है. लोकायुक्त की रिपोर्ट में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अनिल लाड और पूर्व खान मंत्री वी. मुनियप्पा के नाम हैं. यही नहीं, कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री एन. धरम सिंह का नाम पिछली रिपोर्ट में है. ये सारे मामले तूल पकड़ सकते हैं.
विपक्ष के नेता, कांग्रेस के सिद्धरमैया का कहना है, ''यह दलगत राजनीति से ऊपर है, लेकिन मुझे खुशी है कि राजनीतिकों को जेल भेजा जा रहा है. इससे लोगों का कानून के शासन में विश्वास बहाल हुआ है और उम्मीद जगी है कि राजनीति में मूल्य और नैतिकता वापस लौट सकते हैं.''

