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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय: हम हैं बेमिसाल

विलक्षण पाठ्यक्रम, लोकतांत्रिक ढाबे और विदेशी सहमति पत्र, जेएनयू अंतरविषयक अध्ययनों की प्रयोगशाला है.

अपडेटेड 23 मई , 2012

नए मीडिया रिसर्च डिपार्टमेंट का उद्घाटन; वियतनाम के उप प्रधानमंत्री, न्गेन थिएन न्हान के साथ स्टुडेंट एक्सचेंज कार्यक्रम की रूपरेखा बनाना; अब तक गुमनाम से रहे पर्यावरणविदों का 6,000 से अधिक छात्रों से परिचय कराने से पहले परिसर के एक ढाबे में छात्रों के साथ बातचीत करना. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 54 वर्षीय कुलपति सुधीर कुमार सोपोरी की इस तरह की दिनचर्या इस विश्वविद्यालय के मल्टी डिसिप्लिनरी तौर तरीकों से पूरी तरह मेल खाती है.

दक्षिण दिल्ली के बीचोबीच स्थित जेएनयू ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसका फोकस बाहरी दुनिया के शोरगुल से अछूता और आत्मनिर्भर शैक्षणिक माहौल देने पर है. हर साल नई सुविधाएं लागू की जाती हैं, जो छात्रों के समग्र अनुभव को समृद्ध बनाती हैं.JNU

2011 में, विश्वविद्यालय ने सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च, जनगणना सेंटर और सेंटर फॉर इंक्लूजन ऐंड एक्सक्लूजन और साथ ही लिंग्विस्टिक एम्पावरमेंट सेल को सफलतापूर्वक शामिल किया. लिंग्विस्टिक एम्पावरमेंट सेल ने अंग्रेजी में दो फाउंडेशन कोर्स शुरू किए और तकनीकी तथा अनुवाद लेखन पर शिक्षण शुरू किया है. जेएनयू जिस चुनिंदा ढंग से छात्रों का चयन करता है, उसे देखते हुए, ये कोर्स वरदान हैं.

उपकरणों के प्रयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम हाल ही में कोर्स में जोड़ा गया है. भारत में अपनी तरह के गिने-चुने कोर्सों में से एक इस कोर्स का उद्देश्य छात्रों को माइक्रोस्कोप, स्पेक्ट्रोमीटर, डाटा रिसर्च सॉफ्टवेयर और हाइड्रॉलिक प्रेस जैसे उन उपकरणों का प्रयोग सिखाना है, जिनका इस्तेमाल सामान्य रूप से अनुसंधान में किया जाता है.

कला के क्षेत्र में अच्छी तरह प्रतिष्ठित होने के बाद यह कोर्स जेएनयू में विज्ञान और क्वांटिटेटिव शोध करने वाले छात्रों के लिए स्वागत योग्य सौगात है. तीस से अधिक साल तक जर्मनी की म्युनिख यूनिवर्सिटी और अमेरिका के ऑस्टिन की टेक्सास यूनिवर्सिटी जैसे शीर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुके मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट सोपोरी बताते हैं, ''मशीन की तरह डाटा तैयार करने की बजाए, छात्र यह सीखने में सक्षम होंगे कि डाटा वास्तव में कैसे तैयार होता है और इससे वे अपने अंतिम नतीजों पर और अधिक विश्वास कर सकेंगे.''JNU

विश्वविद्यालय के लिए गर्व का एक और पहलू यह भी है कि इसका 70 से ज्‍यादा विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ एफिलिएशन (संबद्धता) है. इस तरह के सहयोग छात्रों को कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में जाने और वहां पढ़ने का मौका देते हैं, और इससे उनका शैक्षणिक एक्सपोजर बढ़ता है. 2011 में कार्यभार संभालने के बाद से, सोपोरी संसाधनों और छात्रों के एक्सचेंज की सुविधा के लिए 25 से अधिक सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर कर चुके हैं.

सोपोरी कहते हैं, ''हमारे एक्सचेंज कार्यक्रम युवा छात्रों, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो विदेशी शिक्षा का खर्च स्वयं नहीं उठा सकते, बहुत अच्छा अनुभव रहे हैं.''

उदाहरण के लिए, जनवरी, 2012  में जेएनयू और ट्रिनिटी कॉलेज डबलिन के ट्रिनिटी लांगरूम हब के बीच इसी तरह के एक सहमति पत्र से एक विश्वविद्यालय के स्कॉलर्स को दूसरे विश्वविद्यालय में जाने और वहां अनुसंधान शुरू करने का मौका मिलता है. इकोनॉमी क्लास से लौटने का किराया, मासिक वजीफा, साजो-सामान वाला अपार्टमेंट और यूनिवर्सिटी के मानक प्रावधान छात्रों को मिलेंगे. चुने गए दो फेलो अपनी पसंद की रिसर्च कर सकेंगे और कुछ एकेडमिक प्रजेंटेशंस भी बना सकेंगे.

हस्ताक्षर किए गए सारे सहमति पत्रों में केवल छात्रों के एक्सचेंज की बात नहीं है. 2011 में स्कॉटलैंड की एडिनबरा यूनिवर्सिटी, बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी और जर्मनी में जॉर्ज ऑगस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ गटिंगन के साथ किए गए समझौतों में फैकल्टी के आदान-प्रदान, शैक्षिक सामग्री के लेन-देन, संयुक्त सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रशासनिक प्रबंधकों के आदान-प्रदान की बात कही गई है.

1,000 एकड़ के कैंपस की जान यहां के छात्र हैं. छात्र कैंपस के भीतर की पहल, वाद-विवाद, वार्ता, सेमिनार, सांस्कृतिक उत्सव और सामाजिक आंदोलनों का प्रचार भी करते हैं, और उसे अंजाम भी देते हैं. हाल ही में की गई ऐसी एक पहल थी ''ईको-क्लब'', जिसे 2011 में औपचारिक रूप दिया गया.

कैंपस को कचरे और गंदगी से मुक्त करने को समर्पित, यह क्लब पर्यावरण हितैषी पहल और परिसर को साफ करने के तरीकों के बारे में सुझाव देता है. क्लब कैंपस के अंदर कारों की बजाए साइकिल के इस्तेमाल की भी वकालत करता है. विभिन्‍‍न पृष्ठभूमि के छात्रों का एक उद्देश्य के लिए साथ आना भी अनौपचारिक 'अननोटिस्ड क्लब' से जाहिर हो जाता है. इस साल से शुरू हुआ यह क्लब मजदूरों के बीच शिक्षा का प्रसार करता है.

फोटोग्राफी और कैमरे के इस्तेमाल पर इन बच्चों का प्रशिक्षण सत्र पहले ही शुरू हो चुका है. छात्र समुदाय की ओर से जेएनयू में चलाए जा रहे अन्य क्लबों में से कुछ हैं-पर्वतारोहण, फोटोग्राफी, बुक-क्लब, ताइक्वांडो और योग क्लब.

छात्र उन लोगों की ओर भी बारीकी से ध्यान देते हैं, जो किसी सामाजिक उद्देश्य के लिए काम करते हैं, लेकिन जिनकी ओर किसी का ध्यान नहीं जाता है. इसी पहल के तहत जेएनयू ने जादव पयेंग को इस साल अपने पृथ्वी दिवस समारोह पर मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था. असम के एक ग्रामीण पयेंग को अपने ही बूते ब्रह्मपुत्र के किनारे 550 हेक्टेयर से अधिक इलाके में जंगल उगाने का श्रेय जाता है. जेएनयू कैंपस से भी बड़े इस जंगल में अब लुप्तप्राय भारतीय गिद्ध, एक सींग वाले गैंडे और रॉयल बंगाल टाइगर रह रहे हैं.

भाईचारे की भावना और विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों के साथ मेल-जोल जेएनयू में अध्ययन को एक यादगार अनुभव बना देते हैं. एमआइटी, अमेरिका में फोर्ड फाउंडेशन के प्रोफेसर 51 वर्षीय अभिजीत विनायक बनर्जी जेएनयू में बिताए अपने समय को ''आंखें खोल देने वाला'' बताते हैं.

बनर्जी याद करते हैं, ''उस समय की एडमिशन पॉलिसी यह थी कि भारत के विभिन्न वर्गों के लोगों का एडमिशन सुनिश्चित किया जाए, न कि सिर्फ महानगरीय बड़े लोगों का. मेरे जैसे किसी व्यक्ति के लिए, जो कोलकाता के उच्च मध्यम वर्ग की दुनिया में जन्मा और पला-बढ़ा था, ऐसे दोस्त बनाने का यह एक सुनहरा अवसर था, जिन्हें मैं कभी अपना दोस्त न बना पाता.'' वे 1983 में जेएनयू में आए और उन्होंने अर्थशास्त्र में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी.

सोपोरी जोर देकर कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता परिपूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है. वे कहते हैं, ''शिक्षा सिर्फ नौकरी के लिए तैयार होने से अधिक भी कुछ होती है. यह समाज में वास्तविक बदलाव लाने से जुड़ी होती है. हम वार्ता, आदान-प्रदान और बहस को प्रोत्साहित करते हैं, ताकि छात्रों की विषयों पर व्यापक समझ विकसित हो सके.'' यही वजह है कि जेएनयू में पढ़ाना भी क्लास से आगे बढ़कर जीवन में शामिल हो जाता है.

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