भारत की आर्थिक सुस्ती से दुनिया का ऑटो उद्योग हतोत्साहित नहीं है. दिल्ली में 5 जनवरी से शुरू हुए 11वें ऑटो एक्सपो में अबकी बार कारों और दूसरे वाहनों के 50 से ज्यादा चमचमाते नए मॉडल पेश किए गए हैं. लांच किए जा रहे मॉडलों की संख्या साल 2010 के 10वें ऑटो एक्सपो से थोड़ी ज्यादा है. कारों की रफ्तार और डिजाइन के कद्रदां दिल्ली के प्रगति मैदान में 200 से ज्यादा कार मॉडल पेश किए गए हैं.
11 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
इस बार ऑटो एक्सपो में प्रीमियम सेगमेंट के तहत मर्सडीज अपने एक मॉडल से लोगों के दिलों पर छाने की कोशिश कर रही है. मर्सडीज का यह मॉडल सुपर लग्जरी कन्वर्टिबल एसएलआर रोडस्टर है. कंपनी ने इसकी कीमत 2.5 करोड़ रु. रखी है. लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियां बीएमडब्ल्यू और ऑडी भारत के कार प्रेमियों को अपनी हालिया कंसेप्ट कारों से रू-ब-रू करा रही है. वहीं सबसे सस्ती की होड़ में शामिल बजाज ने ऑटो एक्सपो से तीन दिन पहले अपनी नई छोटी कार आरई 60 लांच कर दी है. बजाज की इस कार पर लोगों का खास ध्यान है. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इस कार को सभी ग्राहक खरीद सकेंगे या फिर यह पब्लिक ट्रांसपोर्ट तक ही सीमित होगी. कंपनी का दावा है कि यह कार एक लीटर में 35 किलोमीटर का माइलेज देगी.
04 जनवरी 2012: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
2012 यूटिलिटी व्हीकल का साल जान पड़ता है. महिंद्रा एंड महिंद्रा अपने स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल सैंगयांग कोरेंडो और सैंगयांग रेक्सटॉन को लांच कर रही है. वहीं, देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी मल्टी यूटिलिटी व्हीकल एर्टिगा को लोगों के बीच पेश कर रही है. निसान अपनी कार एनवी200 भारत में उतारने को तैयार है. कीमत के मामले में मध्यम दर्जे वाली रेनो की एसयूवी डस्टर, फोक्सवैगन की टूअरेज भी ऑटो एक्सपो के दौरान प्रदर्शन के लिए तैयार हैं.
28 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
साल 2011 में जिस तेजी से पेट्रोल की कीमतें बढ़ी हैं, वैसे में भारतीय ग्राहकों का रुझान डीजल कारों की ओर बढ़ा है. अगर पेट्रोल और डीजल की प्रति लीटर कीमत के अंतर की बात की जाए तो दोनों के बीच करीब 25 रु. का अंतर है. ज्यादातर नई एसयूवी डीजल से चलती हैं. हालांकि, कुछ छोटी कारें भी इस सेगमेंट में अपना कारोबारी दखल बनाने की तैयारी में हैं.
21 दिसम्बर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
टाटा मोटर्स अपनी लखटकिया कार नैनो का डीजल वर्जन उतार रही है. डीजल मॉडल कार के जरिए कंपनी पेट्रोल वर्जन की कमजोर बिक्री की भरपाई करना चाहती है. कई और कंपनियां ऐसा ही सोचती हैं. जनरल मोटर्स के वाइस प्रेसिडेंट पी बालेंद्रन ने इंडिया टुडे को बताया कि साल 2011 में कंपनी की ग्रोथ हालांकि, ज्यादा नहीं रही है. लेकिन शेवरले बीट के डीजल वर्जन की बिक्री में खासी तेजी देखने को मिली है.
इस बार ऑटो एक्सपो की थीम गोईंग विद ग्रीन यानी पर्यावरण को बचाना है. इवेंट के दौरान आपको ऐसी भी कारें देखने को मिलेंगी, जो पेट्रोल या डीजल पर नहीं बल्कि वैकल्पिक ईंधन पर चलने वाली होंगी. मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स हाइब्रिड मॉडल्स पेश करेंगी. महिंद्रा अपनी इलेक्ट्रिक कार रेवा के अपग्रेडेड वर्जन रेवा एनएक्सआर को लांच कर सकती है.
14 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
हालांकि भारत की कार कंपनियों के लिए साल 2011 कारोबारी लिहाज से अच्छा नहीं रहा. कंपनियां अब उम्मीद कर रही हैं कि यह ऑटो एक्सपो उनकी कारोबारी दिशा बदलने की शुरुआत होगा. ऐसा अनुमान है कि साल 2011 में ऑटोमोबाइल सेक्टर की ग्रोथ करीब तीन फीसदी रही. जबकि साल 2010 में इस सेक्टर ने 30.8 फीसदी के हिसाब से ग्रोथ दर्ज की थी. ऊंची महंगाई दर, बढ़ती ब्याज दरों और पेट्रोल की कीमतों में आई तेज उछाल के कारण भारतीय उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता पर खासा असर पड़ा है.
07 दिसंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव का मानना है कि साल 2012 कार कंपनियों के लिए कारोबारी लिहाज से काफी अच्छा होगा. कार उद्योग के कारोबारी चक्र का जिक्र करते हुए भार्गव बताते हैं, ''अक्सर ऐसा होता है कि एक खराब कारोबारी साल के बाद कार उद्योग में अच्छा साल आता है.'' हालांकि, वे साल 2010 की तरह अच्छे कारोबार की उम्मीद नहीं पाल रहे हैं.भार्गव का कहना है, ''मुझे नहीं लगता है कि साल 2012 में सेक्टर की ग्रोथ 25 फीसदी होगी.'' उनका यह बयान कार बनाने वाली कंपनियों के सतर्कता भरे मिजाज को दर्शाता है. हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि ऊंची ब्याज दरों, बढ़ती महंगाई और ईंधन की ऊंची कीमतों का दौर महज एक साल में खत्म हो जाएगा. ब्रोकिंग फर्म आइसीआइसीआइ डायरेक्ट ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है कि ब्याज दरों में कटौती के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर में तेजी का दौर देखने को मिलेगा.
30 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
रिपोर्ट के मुताबिक, ''हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2013 में वी शेप रिकवरी (तेजी के बाद मंदी और फिर वैसी ही तेजी) देखने को नहीं मिलेगी. हमारे मुताबिक, ऑटो सेक्टर की ग्रोथ 11-13 फीसदी के स्तर पर रहेगी.'' बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस साल ब्याज दरों में कटौती देखने को मिलेगी, क्योंकि रिजर्व बैंक ने अपनी दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दर बढ़ोतरी में लगाम लगाने का संकेत दिया था. यस बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ राणा कपूर का कहना है, ''मुझे उम्मीद है कि सितंबर, 2012 तक ब्याज दरें 1.5 फीसदी नीचे आ जाएंगी.''
23 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडेअगर कार खरीदने वाले ग्राहकों के लिहाज से बात करें तो उनके लिए नए साल की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही है. महिंद्रा एंड महिंद्रा, ह्युंदई मोटर्स इंडिया, टोयोटा किर्लोस्कर, फोर्ड इंडिया, निसान और जनरल मोटर्स इंडिया ने अपनी गाड़ियों के दाम में 1-3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ साल की शुरुआत की है. बढ़ती महंगाई और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की कमजोरी ने कीमतों के स्तर पर दबाव बनाया है और इसी को देखते हुए कुछ कार कंपनियों ने बढ़ी लागत के बोझ को अपने ग्राहकों पर डाला है. इसके बावजूद जिन लोगों ने साल 2011 में कार खरीदने का फैसला टाल दिया था, अब वे और कारें खरीदेंगे.
16 नवंबर 2011: तस्वीरों में देखें इंडिया टुडे
बालेंद्रन का मानना है कि अप्रैल-मई तक बाजार की कारोबारी चाल में बदलाव देखने को मिलेगा. वे छोटी कारों के कारोबार के बढ़ने को लेकर ज्यादा आशावादी नहीं हैं. उनका कहना है, ''छोटी कारों के कारोबार में ज्यादा ग्रोथ देखने को नहीं मिली है. अधिकांश कारोबार लंबी कारों के वर्ग में हुआ है. छोटे-मध्यम वर्ग की कारों के वर्ग में भी ग्रोथ ठीक रही है, लेकिन मिनी कार ने इस साल हमें निराश कर दिया है.'' साल 2010 में जहां कार कंपनियों को छोटी कारों से कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी वहीं, 2012 में वे प्रीमियम और मिड प्राइस सेगमेंट पर अपना ध्यान दे रही हैं. किफायती कारों की तुलना में इन महंगी कारों पर बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरों का ज्यादा असर नहीं पड़ता.

