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भारत में अफ्रीकी: गहराता रंग रंगभेद का

हाल के दिनों में नाइजीरिया और अफ्रीकी मूल के अन्य लोगों के प्रति नस्लभेदी पक्षपात खतरनाक हद तक बढ़ा है.

अपडेटेड 19 जून , 2011

बायोटेक्नोलॉजी के नाइजीरिया छात्र 22 वर्षीय केविन ओबाफेमी को उस वक्त  जबरदस्त झ्टका लगा जब एक महीना पहले उन्हें और उनके मित्रों को बंगलुरू में लीला पैलेस के बार, एथेना में प्रवेश नहीं करने दिया गया.

केविन कहते हैं, ''यकीन नहीं हुआ, हमें बताया गया कि क्लब बंद हो गया है लेकिन मैं देख रहा था कि तमाम लोग अंदर जा रहे हैं, केवल हमें ही अंदर जाने से रोका गया, शायद इसलिए कि हम अश्वेत हैं. उन लोगों के चेहरे पर जरा भी शर्मिंदगी नहीं थी.''

बंगलुरू में पिछले तीन महीने से लागोस से आए 48 वर्षीय अध्यापक रिक ओसाजे हैरान हैं, ''लोग जब भी चार अश्वेतों को सड़क पर देखते हैं, वे पीछे हटने लगते हैं. ऐसा नहीं है कि हमें अपराधी गिरोह समझा जाता हो. मैंने चेन्नै और बंगलुरू में ये चीज नोटिस की. ऐसा लगता है जैसे एक बार फिर चारों तरफ  रंगभेद है.''

पिछले वर्ष आइपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब के दो अश्वेत चीयर लीडर्स को स्वदेश वापस भेज दिया गया क्योंकि ''भारतीयों को गोरी चमड़ी वाली चीयर लीडर्स ज्‍यादा पसंद हैं.''

ओबाफव्मी जोर देकर कहते हैं कि ''भारत में निश्चित तौर पर ऑस्ट्रेलिया से ज्‍यादा रंगभेद है.'' पिछले महीनों में बंगलुरू 'कॉस्मोपॉलिटन शहर' से 'नस्लभेदी शहर' बन गया है. एक स्थानीय दैनिक ने इस बात को उजागर किया है कि किस तरह शहर के बार और पब अश्वेतों को प्रवेश की इजाजत नहीं देते.

अधिकारियों का दृढ़ता के साथ कहना है उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि चमड़ी का रंग कैसा है लेकिन वे किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचना चाहते हैं. शहर के एक पब के मालिक का कहना है, '' हमें काली चमड़ी वाले लोगों से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन हम इसलिए एहतियात बरत रहे हैं क्योंकि हाल में नाइजीरियाई नागरिकों के चलते काफी परेशानी उठानी पड़ी.'' इसी पब में नाइजीरिया के मेहमानों और बार के कर्मचारियों के बीच किसी बात में कहा-सुनी मारपीट में बदल गई और 3 लाख रु. की संपत्ति को क्षति पहुंची. ओसाजे जानना चाहते हैं कि अगर ऐसी ही घटना गोरे अमेरिकी के साथ हो जाए तो क्या बार श्वेतों के प्रवेश पर रोक लगा देगा.

इस महीने के शुरू में, शहर के एक कॉलेज के स्थानीय छात्र 18 वर्षीय ऋषि मूर्ति और एक नाइजीरियाई और उसके मित्रों के बीच मारपीट के चलते मूर्ति की दो पसलियां और घुटने की हड्डी टूट गई.

मूर्ति के सहपाठी सुंदर राव का कहना है, ''वे इतने गुस्सैल होते हैं कि कोई भी उनसे उलझ्ना नहीं चाहता.'' छिटपुट वारदात के कारण बंगलुरू से दिल्ली तक लगाव की भावना बढ़ी है. लोग अफ्रीकी लोगों के साथ बातचीत करते समय चौकन्ने रहने लगे हैं. ऐसा सिर्फ  भेदभाव के कारण ही नहीं है बल्कि साइबर जालसाजी, हत्या, धोखाधड़ी, नशीली दवाओं से जुड़ी वारदातों में अश्वेतों (खास तौर से नाइजीरियाइयों) के आए दिन शामिल होने की खबरों के कारण हुआ है.

पूर्वाग्रह इतना बढ़ गया है कि बॉलीवुड में भी 'बुरे' पाकिस्तानियों का स्थान अब नाइजीरियाई और अन्य अश्वेतों ने ले लिया है. रोहन सिप्पी की दम मारो दम में एक इंस्पेक्टर अभिषेक बच्चन के किरदार को बताता है कि नाइजीरियाई गिरोह का गोआ के एक खास हिस्से पर नियंत्रण है.

विशाल भारद्वाज की कमीने के क्लाइमेक्स में अश्वेतों का गिरोह है. शैतान में मुंबई के पुलिसवालों की केन्‍या के एक ड्रग और अपहरण गिरोह से संयोग से मुलाकात होती है और उन्हें निर्ममता से मार दिया जाता है.

एक अनुमान के मुताबिक दिल्ली में 2,500 और बंगलुरू में 3,000 तथा देश के अन्य भागों में 4,000 नाइजीरियाई रहते हैं. न तो पुलिस के पास और न ही नाइजीरिया के उच्चायोग के पास इस बारे में विस्तृत जानकारी है कि भारत में इस समय कितने नाइजीरियाई नागरिक रह रहे हैं.

बंगलुरू के एक पुलिस अधिकारी का कहना है, ''वे जब मन करता है, आते हैं और चले जाते हैं.'' लेकिन पुलिस नस्लभेद की बात स्वीकार करने के बारे में सावधान है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त सुशील कुमार का कहना है, ''इनमें से कुछ आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन पूरे समूह के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया जा सकता क्योंकि नस्ल, धर्म या जाति के नाम पर भेदभाव अपराध है.''

बंगलुरू और दिल्ली में रह रहे नाइजीरियाई लोगों में से आधे से ज्‍यादा वीसा की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी लौटे नहीं हैं. निर्धारित अवधि से अधिक रहने पर पिछले वर्ष 50 नाइजीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया. गलत धंधों में शामिल होने की प्रवृत्ति के कारण इन्हें 'नाइजीरियाई ओसी' नाम दे दिया गया है. 'ओसी' का अर्थ है 'संगठित अपराध'.

इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में 100 नाइजीरियाई कैद हैं. इनमें से अधिकतर मादक पदार्थ बेचने, या जालसाजी से जुड़े मामलों, साइबर और लॉटरी से जुड़े अपराधों और हत्या जैसे मामलों में शामिल हैं. नाइजीरिया के राष्ट्रीय स्तर के एक पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी 34 वर्षीय किंग्सले इजूचुकवा को इस साल दिल्ली पुलिस ने 25 ग्राम कोकीन के साथ गिरफ्तार किया. इजुचुकवा ने स्वीकार किया कि वह जल्दी अमीर बनने के लिए मादक पदार्थ बेचने के धंधे से जुड़ गया था.

अपराध के बारे में पक्षपातपूर्ण खबर देने के लिए अश्वेत लोग अखबारों को दोषी मानते हैं. ओबाफव्मी ने कहा, ''जब आपको अखबार में रोजाना इस तरह की खबरें पढ़ने को मिलेंगी, तो इस बारे में उम्मीद करना बेकार है कि स्थानीय लोग हमें सम्मान देंगे.'' उनके मित्र इको ओदाताजे कहते हैं, ''हां कुछ गिरोह हैं और अपराध होते हैं, लेकिन नस्लभेदी व्यवहार के लिए वे कोई बहाना नहीं है. दुकानों, बार, रेस्तरां में हमें आदर नहीं मिलता. आप नाइजीरियाई हैं तो किराए पर मकान मिलना बहुत मुश्किल है.''

नाइजीरियाई अपराध के सिंडीकव्ट की मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता. यह ई-मेल और एसएमएस के जरिए जालसाजी और नशीले पदार्थों को बेचने का धंधा करते हैं. दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (विशेष सेल) अरुण कंपानी का कहना है कि नशीले पदार्थ पड़ोसी देशों से खरीद कर लाए जाते हैं और उन्हें दिल्ली में रहने वाला नाइजीरियाई सिंडीकव्ट बेचता है. इनका नेटवर्क देश भर में फैला हुआ है.

''पार्टियां आयोजित करने वालों और नाइट क्लब के साथ इनका संपर्क होता है. ड्रग सप्लाइ करने वाला हाइ सोसाइटी ग्राहकों को पकड़ता है और ये नशीले पदार्थ प्राइवेट जगहों और बार में चुनिंदा पार्टियों में लिए जाते हैं.''

ओबाफेमी का कहना है, ''नाइजीरियाई  कहना किसी समय गर्व की बात माना जाता था, लेकिन अब नहीं. आज मुझे कहने में डर लगता है कि मैं नाइजीरिया से हूं. मैं बहाना करता हूं कि मैं दक्षिण अफ्रीका या सूडान से हूं.''

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