उत्तर प्रदेश में 58,758 ग्राम पंचायतें, 821 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं, जहां चुनाव होना है. मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है. इस वर्ष मार्च से कोविड-19 की परिस्थितियों और फिर लॉकडाउन के चलते चुनाव की तैयारियां समय से प्रारंभ नहीं हो सकीं थीं. राज्य चुनाव आयोग ने पंचायत चुनाव के मद्देनजर अब मतदाता सूचियों की जांच का काम शुरू कर दिया है. मतदाता सूचियों से गैरजरूरी नाम हटाए जा रहे हैं और नए नाम जोड़ने का काम जारी है. इस संबंध में अधिसूचना जारी की जा चुकी है. दिसंबर के आखिर में वोटर लिस्ट जारी की जाएगी. आयोग की तैयारियों के अनुसार, यूपी में पंचायत चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में कराए जा सकते हैं.
पंचायत चुनाव का समय नजदीक आता देख अवैध हथियारों के तस्कर भी सक्रिय हो गए हैं. पंचायत चुनाव में दहशत फैलाने के लिए बिहार और मध्य प्रदेश से लाए गए असलहों के साथ तीन तस्करों को यूपी की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 24 नवंबर को लखनऊ के विभूतिखंड इलाके से गिरफ्तार किया. एडीशनल एसपी, एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, 30 जुलाई को मऊ के मधुबन थानाक्षेत्र में एसटीएफ ने मुठभेड़ के बाद चार बदमाशों को गिरफ्तार किया था. एसटीएफ पर फायरिंग करने वाला जनार्दन वर्मा मौके से भाग निकलने में कामयाब हुआ था. जनार्दन की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम भी रखा गया था. एसटीएफ की छानबीन में जनार्दन के असलहा तस्करों के रैकेट में शामिल होने की बात भी सामने आई थी. इसके आधार पर पड़ताल की जा रही थी. इसी दौरान 24 नवंबर को एसटीएफ को जनार्दन के साथियों के साथ गोमतीनगर के विभूतिखंड इलाके में मौजूद होने की जानकारी मिली. एसटीएफ ने जनार्दन को साथियों समेत गिरफ्तार कर लिया. असलहा तस्कर गिरोह के सरगना जनार्दन पर अयोध्या और आंबेडकर नगर में हत्या, लूट, डकैती और एनडीपीएस के 17 मुकदमे दर्ज हैं. एसटीएफ की पूछताछ पता चला कि जनार्दन यूपी में पंचायत चुनाव के मद्देनजर अवैध असलहों के कारोबार को तेजी देने के लिए सक्रिय हुआ था.
मध्य प्रदेश के खांडवा में बड़े पैमाने पर अवैध असलहे का कारोबार होता है. जनार्दन के पास से एसटीएफ को जो 19 पिस्टल बरामद हुई थीं वे खांडवा से खरीदकर यूपी में बेचने के लिए लायी जा रही थीं. ये असलहे आंबेडकर नगर और अयोध्या में सप्लाई किए जाने थे. पंचायत चुनाव में वर्चस्व बनाने के लिए इन असलहों का उपयोग किया जाना था. जनार्दन ने एसटीएफ को बताया कि वह डिमांड के अनुसार ही असलहों की सप्लाई करता है. एसटीएफ इन तस्करों से असलहे खरीदने वालों की जानकारी जुटाने में लग गई है इसके आधार पर चिन्हित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी. यूपी में जैसे-जैसे पंचायत चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है अवैध असलहों की मांग में इजाफा हुआ है और इसी डिमांड को पूरा करने के लिए असलहा तस्कर सक्रिय हो गए हैं.
अवैध असलहा फैक्ट्रियों का गढ़ बना शाहजहांपुर
आम तौर राजनीतिक रूप से शांत रहने वाला रुहेलखंड का शाहजहांपुर इलाका अवैध असलहा फैक्ट्रियों का गढ़ बनकर उभरा है. पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआइजी) बरेली रेंज के कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, 10 अक्टूबर से 10 नवंबर के बीच शाहजहांपुर में सबसे अधिक चार अवैध शस्त्र फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं. दूसरे नंबर पर बरेली में अवैध हथियारों की तीन फैक्ट्रियां पकड़ी गई हैं. बरेली रेंज में अवैध असलहा कारोबार पर हुई कार्रवाई के दौरान कुल 190 पिस्टल और 10 बंदूकें बरामद हुई हैं. लेकिन इस दौरान हुई कार्रवाई में बरेली में सबसे ज्यादा 241 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ है. इस मामले में शाहजहांपुर दूसरे नंबर पर रहा. यहां पर पुलिस ने 47 किलोग्राम विस्फोटक बरामद किया है. डीआइजी बरेली रेंज राजेश पांडेय कहते हैं, “अवैध हथियारों के कारोबार में लिप्त अपराधियों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. अवैध शस्त्र का कारोबार करने के आरोप में शाहजहांपुर से आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है.”
स्कूल को बना लिया अवैध हथियारों की फैक्ट्री
कोरोना आपदा में भी अवैध हथियार का धंधा करने वालों ने अपने लिए अवसर तलाश लिए हैं. मुरादाबाद जिले की पुलिस ने 28 अक्तूबर को डिलारी थानाक्षेत्र में एक बंद पड़े स्कूल में अवैध हथियारों की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था. मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विद्या सागर मिश्र के अनुसार, भोजपुर थानाक्षेत्र के पीपलसाना निवासी धर्मानंद भटनागर का डिलारी के गांव नाखूनका में एक पब्लिक स्कूल है. लॉकडाउन लागू होने के बाद से यह स्कूल बंद चल रहा था. पुलिस को इस बंद पड़े स्कूल में हथियारों की अवैध फैक्ट्री संचालित होने की जानकारी मिली थी. इसके बाद 28 अक्तूबर को सीओ ठाकुरद्वारा डॉ. अनूप सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने स्कूल में छापा मारकर यहां से चार बने असलहे, 29 अधबने असलहे, नाल, कारतूस, ट्रेगर, कटर समेत कई सामान बरामद किए. पुलिस का दावा है कि तीन से चार हजार रुपए में एक असलहे की सप्लाई की जा रही थी.
अवैध असलहा की मंडी बना मेरठ
डीजीपी के आदेश पर सक्रिय हुई मेरठ जिले की 31 थानों की पुलिस ने 7 सितंबर को अभियान चलाकर 24 घंटे के भीतर 140 हथियार तस्करों को गिरफ्तार कर लिया था. इनके कब्जे से 239 अवैध हथियार बरामद किए गए थे. तीन अवैध शस्त्र फैक्ट्री भी पकड़ी गई थी. अवैध हथियारों के साथ पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि ये हथियार पंचायत चुनाव के लिए तैयार किए जा रहे थे. पुलिस को जानकारी मिली थी कि हथियार तस्करों का एक बड़ा गैंग मेरठ में काम कर रहा है. परेशानी की बात यह है कि अवैध हथियारों का नेटवर्क खड़ा करने वालों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं. पुलिस को यह जानकारी मिली है कि अवैध हथियारों के सप्लायर यूपी से सटे दूसरे प्रदेशों से हैं. दूसरे प्रदेशों की पुलिस से तालमेल न होने पर इनपर शिकंजा नहीं कस पा रहा है. पंचायत चुनाव से पहले अपराधियों को अवैध असलहों की सप्लाई होने का खुलासा होने के बाद पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने यूपी में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. एसटीएफ के साथ एटीएस और स्टेट इंटेलिजेंस और जिला के पुलिस अफसरों को भी अलर्ट किया गया है.
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