गीतकार गुलजार ने अपने राजनयिक दोस्त पवन के. वर्मा की काव्य कृति युधिष्ठिर ऐंड द्रौपदी का हिंदी में अनुवाद किया है. मनीषा पांडेय से हुई इस बातचीत में पवन वर्मा साहित्य और राजनयिक जीवन से जुड़े कुछ अंतरंग पहलुओं के बारे में बता रहे हैं:
गुलजार द्वारा किया गया अनुवाद आपने पढ़ा? कैसा है?
काफी पहले मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में उन्होंने अचानक मुझे अपने पास बुलाया और हिंदी में कुछ कविताएं पढ़कर सुनाईं. कविता मुझे अद्भुत लगी. यह तो बाद में समझ में आया कि वे मेरी ही कविताओं का हिंदी तर्जुमा सुना रहे थे.
यानी आपको पता नहीं था कि वे आपकी कविताओं का हिंदी में अनुवाद कर रहे हैं?
बिलकुल नहीं. मैं कुछ नहीं जानता था और उन्होंने पूरी किताब अनुवाद कर डाली.
किताब की अंतर्वस्तु क्या है?
यह युधिष्ठिर और द्रौपदी की कहानी है, जो उसे स्वयंवर में जीतकर लाता है, फिर अपने समूचे पौरुषीय अहंकार से उसे जुए में हार जाता है. फिर किस तरह दोनों के बीच प्रेम और राग के बीज पड़ते हैं, उन्हीं भावों को कविता में बांधकर व्यक्त किया गया है.
आप राजनीति में आना चाहते हैं?
बेशक, मैं राजनीति में आना चाहूंगा, लेकिन सही समय पर और सही कारणों से.

