पाकिस्तान में पिछले साल सिंध प्रांत की विधानसभा से 67 वर्षीय विधायक रामसिंह सोढा के इस्तीफे और कच्छ से उनके परिवार के पलायन ने पाकिस्तान और भारत दोनों देशों में हलचल मचा दी थी. उनके इस फैसले को पाकिस्तान में कट्टर मुसलमानों के हाथों हिंदुओं पर बढ़ते जुल्म के संकेत के तौर पर देखा गया. एक वकील रहे सोढा ने इंडिया टुडे के सीनियर एडिटर उदय माहूरकर से कच्छ के नख्तराना में बात की. लेकिन वे बहुत संभलकर बोले क्योंकि उनके बहुत से रिश्तेदार अब भी पाकिस्तान में रहते हैं.
मुख्य अंशः
आप पाकिस्तान में हालात को किस तरह देखते हैं?
पाकिस्तान में अब भी नरमपंथी मुसलमानों की बड़ी संख्या है जो हिंदुओं के साथ मिल-जुल कर रहना चाहते हैं. लेकिन वे बमों और वहाबी उग्रवादियों की बंदूकों से भयभीत रहते हैं. ये वहाबी अपने धार्मिक विरोधियों को मारने के लिए अपनी जान देने को भी तैयार रहते हैं. हालात और भी गंभीर होते जा रहे हैं. हालांकि निचले सिंध में हालत कुछ बेहतर है, जहां स्थानीय सिंधी मुसलमान सूफीवाद में विश्वास करते हैं और वे हिंदुओं की रक्षा व उनकी परवाह करते हैं.
पाकिस्तान से भागने की तात्कालिक वजह क्या थी?
वहाबीवाद पंजाब से चलता हुआ ऊपरी सिंध में करीब-करीब पहुंच चुका है. अगर कोई चमत्कार न हो जाए तो कुछ ही समय में वह निचले सिंध तक भी पहुंच जाएगा. मैंने पलायन का फैसला आत्मरक्षा के दूरगामी कदम के तौर पर उठाया. इसके अलावा निचले सिंध के हम सोढा लोगों की शादियां कच्छ के जाडेजा वंश में होती रही हैं. इस तरह यहां से हमारे ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. अन्यथा पाकिस्तान छोड़ने का कोई तात्कालिक कारण नहीं था.
क्या आपको बदले की कार्रवाई का डर है. क्या इसीलिए आप असली बात छुपा रहे हैं?
कतई नहीं. मैं सिर्फ सच बोलूंगा. आप इस बात को नहीं झुठला सकते कि उग्रवादी मुस्लिम उदार मुसलमानों को पहले से ज्यादा हिंसा के साथ निशाना बना रहे हैं.
जिन्ना के पाकिस्तान और आज के पाकिस्तान में क्या फर्क है.
जिन्ना के पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक सुरक्षित थे जबकि आज के पाकिस्तान में उदार मुस्लिम भी, जो दूसरे धर्मावलंबियों के साथ मिल-जुलकर रहना चाहते हैं, सुरक्षित नहीं हैं. जिन्ना के वादों को उनकी मौत के बाद तुरंत भुला दिया गया. लेकिन असली बदलाव 70 के दशक में आया जब जनरल .जिया-उल-हक ने अफगानिस्तान की लड़ाई का सहारा लेकर कट्टरपंथी मुसलमानों को बढ़ावा दिया. उन्होंने हिंदुओं को अलग मतदाता बना दिया और इस तरह वे दूसरे दर्जे के नागरिक बन गए.
आपको पाकिस्तान में क्या बात सबसे ज्यादा दंग करती है?
यह विडंबना कि जिस धरती ने सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान को जन्म दिया वही अब खूंखार इस्लामी आतंकवादियों को पैदा कर रही है.
पहली बार कब आपने खुद को असुरक्षित महसूस किया?
1986-87 में जब, भारत में राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रतिक्रिया में सिंध में कुछ मंदिरों को ढहा दिया गया.
इसका हल क्या है?
भारत और पाकिस्तान, दोनों को उग्रवादियों के खिलाफ मुहिम शुरू करनी चाहिए. और मेरा पक्का विश्वास है कि दोनों ही मुल्कों की आम जनता उग्रवादियों की हिंसा के बदले अमन चाहती है.
पाकिस्तान में हिंदुओं का भविष्य क्या होगा?
धार्मिक स्थिति और खराब होने के अलावा हिंदुओं का भविष्य भारत सरकार पर भी निर्भर करता है. सरकार को अपने व्यवहार में और भी उदार होना पड़ेगा. पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं को यहां सात साल रहने के बाद नागरिकता दी जाती है और इस दौरान वह यहां न तो कोई काम कर सकता है, न ही कारोबार. यह न्यूनतम अवधि तीन साल कर देनी चाहिए. जहां तक पाकिस्तान में रहने का फैसला करने वाले हिंदुओं का सवाल है तो उनका भविष्य अंधकारमय है.

