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नीतीश सरकार के लिए खुशनुमा एहसास

दरौंधा उपचुनाव नीतीश और लालू के बीच का संघर्ष था, जिसमें एक बार फिर जीत बिहार के मुख्यमंत्री की हुई.

जगमातो देवी
जगमातो देवी
अपडेटेड 22 अक्टूबर , 2011

सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जद-यू) ने पिछले दिनों हुए उपचुनाव में दरौंधा विधानसभा सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा है. यह उपचुनाव जद-यू की विधायक जगमातो देवी की मौत के कारण करवाना पड़ा था. जद-यू ने नौसिखिया कविता सिंह को मैदान में उतारा था, जो दिवंगत विधायक के कुख्यात पुत्र अजय सिंह की नवविवाहिता पत्नी हैं.

हालांकि जद-यू की उम्मीदवार का जीत का अंतर नवंबर 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के 31,135 से घटकर इस बार सिर्फ 20,092 मतों का रह गया, लेकिन नीतीश की टीम फिर भी सही साबित हुई, क्योंकि पार्टी उम्मीदवार को 51,754 मत मिले, जो उनकी दिवंगत सास जगमातो को मिले मतों से ज्‍यादा हैं.

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दरौंधा उपचुनाव का नतीजा बिहार में नीतीश कुमार के बढ़ते दबदबे की एक बार फिर पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि लोकसभा में 40 सदस्य भेजने वाले इस राज्‍य में कांग्रेस एक गौण खिलाड़ी रह गई है. यह उपचुनाव एक बार फिर नीतीश और लालू की टक्कर बनकर उभरा, जिसमें फिर एक बार जीत बिहार के मुख्यमंत्री के ही हाथ लगी है. माना जा रहा है कि इस नतीजे में अण्णा फैक्टर की कोई भूमिका नहीं थी.

अपने उम्मीदवार परमेश्वर सिंह को मिले 31,662 मतों के साथ राष्ट्रीय जनता दल दूसरे स्थान पर रहा और उसने डटकर मुकाबला किया. लालू की टीम इस बात में संतोष मान सकती है कि वह 2010 में मिले 17,980 मतों की तुलना में इस बार न केवल अपने मतों का हिस्सा बढ़ाने में सफल रही है, बल्कि वह उस सीट पर जीत का अंतर भी कम करने में सफल रही है, जो पिछले चार चुनावों से जगमातो के परिवार के ही खाते में जाती रही है.

जहां जद-यू और राजद, दोनों अपने प्राप्त मतों में वृद्धि करने में कामयाब रहे हैं, कांग्रेस सबसे बड़ी फिसड्डी के तौर पर उभरी है. अपनी जमानत जब्त करवाने के अलावा, कांग्रेस के उम्मीदवार कालिका शरण सिंह सिर्फ 4,238 मत हासिल कर सके, जो 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिले 8,399 मतों के लगभग आधे हैं.

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लिहाजा बड़े दलों में सबसे खराब प्रदर्शन कांग्रेस का रहा, क्योंकि जब बाकी दलों ने अपने मतों में बढ़ोतरी की, तब कांग्रेस अपने वोट खो बैठी. कांग्रेस की बार-बार होती हार और ज्‍यादा गंभीर नजर आती है, क्योंकि पार्टी का 2005 के चुनाव के पहले तक रघुनाथपुर सीट पर कब्जा था और दरौंधा सीट रघुनाथपुर से काटकर निकाली गई थी, जो 2009 की परिसीमन प्रक्रिया में खत्म हो गई थी. हालांकि उसके बाद से कांग्रेस का प्रदर्शन बिहार में कांग्रेस की रूठती किस्मत का ही एक लघु रूप नजर आता है. 

2010 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार विजय शंकर दुबे को 8,399 वोट मिले थे. इस बार कांग्रेस ने एक नए उम्मीदवार को इस उम्मीद से उतारा था कि वह उसकी किस्मत फिर जगा देगा, लेकिन ऐसा हो न सका.

हालांकि उपचुनाव के नतीजे से नीतीश की टीम को एक सुखद एहसास होने के अलावा राजग सरकार के कामकाज पर शायद ही कोई फर्क पड़े, उस जिले में राजद उम्मीदवार की लगातार दूसरी बार हार होने से इसने निश्चित तौर पर लालू प्रसाद के लिए खतरे की घंटी बजा दी है, जो जिला खुद लालू के संसदीय क्षेत्र से सटा हुआ है.

दरौंधा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार परमेश्वर सिंह की मदद के लिए लालू प्रसाद दो पुराने प्रतिद्वंद्वियों-शहाबुद्दीन और प्रभुनाथ सिंह को एक साथ ले आए थे, लेकिन यह भी बेमतलब साबित हुआ. 

 

अण्णा नहीं, नीतीश फैक्टर

दरौंधा उपचुनाव के नतीजे को बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बढ़ते कद की फिर से पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है.

नवंबर, 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को  यहां मिले 8,399 वोट इस बार और भी घटकर महज 4,238 की संख्या पर आ गए.

राष्ट्रीय जनता दल और जद-यू दोनों ने नवंबर, 2010 के वोटों की तुलना में अपने मतों में वृद्धि की.

कांग्रेस ने एक नए उम्मीदवार कालिका शरण सिंह को मैदान में उतारा था, लेकिन वे भी अपनी जमानत जब्त करा बैठे.

यहां कांग्रेस का प्रदर्शन बिहार में कांग्रेस के ढहते किले का छोटा संस्करण जैसा नजर आता है.

दरौंधा सीट रघुनाथपुर से काटकर निकाली गई थी. रघुनाथपुर सीट 2009 की परिसीमन प्रक्रिया में समाप्त हो गई थी, यह 2005 के चुनाव के पहले कांग्रेस के पास थी.

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